यूनुस · 41/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيئُونَ مِمَّا أَعْمَلُ وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ ۝٤١
Wa in kazzabooka faqul lee `amalee wa lakum `amalukum antum bareee`oona mimmaaa a`malu wa ana bareee`um mimmaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम ज़िम्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبُوكَ: उन्होंने आपको झुठलाया / आपको झूठा कहा।
  • لِي عَمَلِي: मेरे लिए मेरा कर्म (उसका फल और जिम्मेदारी मुझ पर है)।
  • وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ: और तुम्हारे लिए तुम्हारा कर्म (उसका फल और जिम्मेदारी तुम पर है)।
  • بَرِيئُونَ: बरी / मुक्त / अलग-थलग।
  • مِمَّا أَعْمَلُ: उस कर्म से जो मैं करता हूँ।
  • بَرِيءٌ: बरी / मुक्त।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! यदि आपके क़ौम के लोग (मक्का के मुशरिकीन) आपको झुठलाएँ और आपकी पैग़ंबरी को न मानें, तो आप उनसे निराश न हों और न ही उनसे किसी प्रकार का समझौता करें। बल्कि उन्हें साफ़-साफ़ कह दें: "मेरे लिए मेरा कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारा कर्म।" यानी मैं अपने कर्मों (तौहीद, इबादत, तबलीग़ और अल्लाह की इताअत) का ज़िम्मेदार हूँ और उनका फल मुझे मिलेगा; और तुम लोग अपने कर्मों (शिर्क, इंकार और नाफ़रमानी) के ज़िम्मेदार हो और उनकी सज़ा तुम्हें मिलेगी।

"तुम उस कर्म से बरी हो जो मैं करता हूँ, और मैं उस कर्म से बरी हूँ जो तुम करते हो।" इसका अर्थ यह है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के कर्मों की ज़िम्मेदारी नहीं उठाएगा। मेरे अच्छे कर्मों का सवाब तुम्हें नहीं मिलेगा, और तुम्हारे बुरे कर्मों की सज़ा मुझे नहीं दी जाएगी। हर व्यक्ति अपने कर्मों का फल भुगतेगा। यह एक कटु सत्य है जो उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया गया, ताकि वे जान लें कि नबी का काम केवल संदेश पहुँचाना है, और उनका इंकार या झुठलाना नबी के कर्मों को प्रभावित नहीं कर सकता।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. ज़िम्मेदारी का सिद्धांत: इस आयत से हमें यह महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं ज़िम्मेदार है। किसी की अच्छाई से दूसरे को फ़ायदा नहीं होगा और न ही किसी की बुराई से दूसरे को नुक़सान। यह न्याय का सबसे उत्तम सिद्धांत है, जो मानवता को ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है।
  2. सब्र और स्थिरता: जब सत्य के प्रचारक को झुठलाया जाए, तो उसे निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्य का पालन करते रहना चाहिए। यह आयत हर दावत-ए-दीन (धर्म के प्रचार) करने वाले के लिए सब्र और स्थिरता का पाठ सिखाती है।
  3. अलगाव की स्पष्टता: यह आयत सिखाती है कि सत्य और असत्य के बीच स्पष्ट अलगाव होना चाहिए। एक मुसलमान अपने ईमान और अच्छे कर्मों पर दृढ़ रहता है, और बुराई से अपनी बेज़ारी (अलगाव) ज़ाहिर करता है। यही इस्लाम की पवित्रता और स्पष्टता है।
  4. अल्लाह पर भरोसा: यह आयत नबी ﷺ और उनकी उम्मत को सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें। जब आप सत्य पर हों, तो दूसरों के इंकार से आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ देख रहा है और वही न्याय करेगा। यह विश्वास दिल को सुकून और इत्मिनान देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — यूनुस

39بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
40وَمِنْهُم مَّن يُؤْمِنُ بِهِ وَمِنْهُم مَّن لَّا يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِالْمُفْسِدِينَ
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कुरान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं
41وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيئُونَ مِمَّا أَعْمَلُ وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम ज़िम्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
42وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ وَلَوْ كَانُوا لَا يَعْقِلُونَ
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो
43وَمِنْهُم مَّن يَنظُرُ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تَهْدِي الْعُمْيَ وَلَوْ كَانُوا لَا يُبْصِرُونَ
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह ईमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे
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अनुवाद — यूनुस 41

सूरा यूनुस आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है…

सूरा आयत 41/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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