यूनुस · 40/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَمِنْهُم مَّن يُؤْمِنُ بِهِ وَمِنْهُم مَّن لَّا يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِالْمُفْسِدِينَ ۝٤٠
Wa minhum mai yu `minu bihee wa minhum mal laa yu`minu bih; wa Rabbuka a`lamu bilmufsideen
📖 हिंदी अर्थ
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कुरान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُؤْمِنُ بِهِ: इस (क़ुरआन) पर ईमान लाएगा।
  • لَا يُؤْمِنُ بِهِ: इस पर ईमान नहीं लाएगा।
  • بِالْمُفْسِدِينَ: उन लोगों को जो ज़ुल्म, सरकशी और फ़साद फैलाने वाले हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपकी क़ौम (मक्का के काफ़िरों) में से कुछ लोग ऐसे हैं जो इस क़ुरआन पर ईमान लाएँगे, और कुछ लोग ऐसे हैं जो हठधर्मी और ज़िद की वजह से इस पर कभी ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे इसी हालत में मर जाएँगे और इसी पर उठाए जाएँगे। आपका रब उन लोगों को खूब जानता है जो ज़ुल्म और सरकशी की वजह से ईमान नहीं लाते और ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं। वह उनके इस फ़साद और कुफ़्र की सज़ा उन्हें ज़रूर देगा। यह आपके लिए तसल्ली है कि आपका काम सिर्फ़ पहुँचाना है, हिदायत देना आपका काम नहीं, बल्कि यह अल्लाह के हाथ में है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली देता है कि जो लोग ईमान नहीं लाते, उनका हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है, आप पर सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाने की ज़िम्मेदारी है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें लोगों के ईमान लाने या न लाने पर परेशान नहीं होना चाहिए, बल्कि अपना फ़र्ज़ अदा करते रहना चाहिए।
  3. अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से ईमान लाता है और कौन ज़िद और फ़साद की वजह से इनकार करता है। यह हमें अल्लाह के सामने अपने इरादों को साफ़ रखने की तरग़ीब देता है।
  4. इस आयत में काफ़िरों के लिए एक ख़तरनाक चेतावनी है कि उनका फ़साद अल्लाह से छिपा नहीं है, और उन्हें उनके किए की सज़ा ज़रूर मिलेगी। यह हमें अल्लाह के अज़ाब से डरने और उसकी रहमत की तरफ़ लौटने की तरग़ीब देता है।


📜 आयत 38-42 — सूरा यूनुस

38أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّثْلِهِ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो
39بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
40وَمِنْهُم مَّن يُؤْمِنُ بِهِ وَمِنْهُم مَّن لَّا يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِالْمُفْسِدِينَ
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कुरान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं
41وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيئُونَ مِمَّا أَعْمَلُ وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम ज़िम्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
42وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ وَلَوْ كَانُوا لَا يَعْقِلُونَ
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — यूनुस 40

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Monday, September 28, 2026

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