हूद · 30/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَيَا قَوْمِ مَن يَنصُرُنِي مِنَ اللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمْ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٣٠
Wa yaa qawmi mai yansurunee minal laahi in tarattuhum; afalaa tazak karoon
📖 हिंदी अर्थ
और मेरी क़ौम अगर मै इन (बेचारे ग़रीब) (ईमानदारों) को निकाल दूँ तो ख़ुदा (के अज़ाब) से (बचाने में) मेरी मदद कौन करेगा तो क्या तुम इतना भी ग़ौर नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَن يَنصُرُنِي: कौन मेरी सहायता करेगा, कौन मुझे बचाएगा।
  • مِنَ اللَّهِ: अल्लाह की ओर से, अल्लाह के अज़ाब (दंड) से।
  • إِن طَرَدتُّهُمْ: यदि मैं उन्हें (ईमानवालों को) निकाल दूँ।
  • أَفَلَا تَذَكَّرُونَ: क्या तुम लोग विचार नहीं करते, क्या तुम समझते नहीं?

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि मैं इन ईमानवालों को, जो मेरे साथ ईमान लाए हैं, केवल उनके ईमान के कारण अपने पास से निकाल दूँ, तो अल्लाह की ओर से मुझे कौन बचा सकता है? कौन उसके अज़ाब को मुझसे टाल सकता है? यदि मैं ऐसा करूँ, तो मैं अल्लाह की पकड़ से कहीं नहीं भाग सकता, न कोई मेरा सहायक होगा। क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते कि मैं इन्हें क्यों नहीं निकालता? क्या तुम्हें यह समझ नहीं आता कि इन्हें निकालना मेरे लिए विनाश का कारण बनेगा और अल्लाह की नाराज़गी मुझ पर आएगी? क्या तुम इतना भी विचार नहीं करते कि इन्हें अपने पास रखना ही मेरे लिए और तुम्हारे लिए बेहतर है? तुम्हें चाहिए कि तुम अच्छे-बुरे पर ग़ौर करो और समझो कि इन ग़रीब और कमज़ोर ईमानवालों को निकालना कितनी बड़ी ग़लती होगी। अल्लाह तआला इन्हें पसंद करता है, और मैं उन्हें कैसे अपने से दूर कर सकता हूँ जिन्हें अल्लाह ने अपने पास बुलाया है?

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को कभी भी दुनियावी लोगों की खुशी के लिए सच्चे ईमानवालों को अपमानित नहीं करना चाहिए, चाहे वे कितने ही कमज़ोर या ग़रीब क्यों न हों।
  2. अल्लाह का डर इंसान को हर उस काम से रोकता है जो उसकी नाराज़गी का कारण बने, चाहे वह काम समाज में कितना ही स्वीकार्य क्यों न हो।
  3. सच्चा नेता और सच्चा मुसलमान वही है जो अल्लाह की रज़ा को लोगों की रज़ा पर तरज़ीह देता है, और किसी भी इंसानी दबाव में आकर सच्चाई का साथ नहीं छोड़ता।
  4. इस आयत में विचार और चिंतन की अपील है — इंसान को हर मामले में अंजाम सोचकर काम करना चाहिए, न कि जल्दबाज़ी या अहंकार में आकर गलत फ़ैसले लेना चाहिए।
  5. यहाँ से हमें यह भी सीख मिलती है कि ईमानवालों की इज़्ज़त करना और उन्हें अपने साथ रखना बरकत का ज़रिया है, और उन्हें दूर करना अल्लाह के अज़ाब को बुलाना है।
🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — हूद

28قَالَ يَا قَوْمِ أَرَأَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَآتَانِي رَحْمَةً مِّنْ عِندِهِ فَعُمِّيَتْ عَلَيْكُمْ أَنُلْزِمُكُمُوهَا وَأَنتُمْ لَهَا كَارِهُونَ
(नूह ने) कहा ऐ मेरी क़ौम क्या तुमने ये समझा है कि अगर मैं अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूँ और उसने अपनी सरकार से रहमत (नुबूवत) अता फरमाई और वह तुम्हें सुझाई नहीं देती तो क्या मैं उसको (ज़बरदस्ती) तुम्हारे गले मंढ़ सकता हूँ
29وَيَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مَالًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۚ وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ إِنَّهُم مُّلَاقُو رَبِّهِمْ وَلَٰكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ
और तुम हो कि उसको नापसन्द किए जाते हो और ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुमसे इसके सिले में कुछ माल का तालिब नहीं मेरी मज़दूरी तो सिर्फ ख़ुदा के ज़िम्मे है और मै तो तुम्हारे कहने से उन लोगों को जो ईमान ला चुके हैं निकाल नहीं सकता (क्योंकि) ये लोग भी ज़रुर अपने परवरदिगार के हुज़ूर में हाज़िर होगें मगर मै तो देखता हूँ कि कुछ तुम ही लोग (नाहक़) जिहालत करते हो
30وَيَا قَوْمِ مَن يَنصُرُنِي مِنَ اللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمْ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
और मेरी क़ौम अगर मै इन (बेचारे ग़रीब) (ईमानदारों) को निकाल दूँ तो ख़ुदा (के अज़ाब) से (बचाने में) मेरी मदद कौन करेगा तो क्या तुम इतना भी ग़ौर नहीं करते
31وَلَا أَقُولُ لَكُمْ عِندِي خَزَائِنُ اللَّهِ وَلَا أَعْلَمُ الْغَيْبَ وَلَا أَقُولُ إِنِّي مَلَكٌ وَلَا أَقُولُ لِلَّذِينَ تَزْدَرِي أَعْيُنُكُمْ لَن يُؤْتِيَهُمُ اللَّهُ خَيْرًا ۖ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا فِي أَنفُسِهِمْ ۖ إِنِّي إِذًا لَّمِنَ الظَّالِمِينَ
और मै तो तुमसे ये नहीं कहता कि मेरे पास खुदाई ख़ज़ाने हैं और न (ये कहता हूँ कि) मै ग़ैब वॉ हूँ (गैब का जानने वाला) और ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ और जो लोग तुम्हारी नज़रों में ज़लील हैं उन्हें मै ये नहीं कहता कि ख़ुदा उनके साथ हरगिज़ भलाई नहीं करेगा उन लोगों के दिलों की बात ख़ुदा ही खूब जानता है और अगर मै ऐसा कहूँ तो मै भी यक़ीनन ज़ालिम हूँ
32قَالُوا يَا نُوحُ قَدْ جَادَلْتَنَا فَأَكْثَرْتَ جِدَالَنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ नूह तुम हम से यक़ीनन झगड़े और बहुत झगड़े फिर तुम सच्चे हो तो जिस (अज़ाब) की तुम हमें धमकी देते थे हम पर ला चुको
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अनुवाद — हूद 30

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Tuesday, August 18, 2026

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