Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَن يَنصُرُنِي: कौन मेरी सहायता करेगा, कौन मुझे बचाएगा।
- مِنَ اللَّهِ: अल्लाह की ओर से, अल्लाह के अज़ाब (दंड) से।
- إِن طَرَدتُّهُمْ: यदि मैं उन्हें (ईमानवालों को) निकाल दूँ।
- أَفَلَا تَذَكَّرُونَ: क्या तुम लोग विचार नहीं करते, क्या तुम समझते नहीं?
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि मैं इन ईमानवालों को, जो मेरे साथ ईमान लाए हैं, केवल उनके ईमान के कारण अपने पास से निकाल दूँ, तो अल्लाह की ओर से मुझे कौन बचा सकता है? कौन उसके अज़ाब को मुझसे टाल सकता है? यदि मैं ऐसा करूँ, तो मैं अल्लाह की पकड़ से कहीं नहीं भाग सकता, न कोई मेरा सहायक होगा। क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते कि मैं इन्हें क्यों नहीं निकालता? क्या तुम्हें यह समझ नहीं आता कि इन्हें निकालना मेरे लिए विनाश का कारण बनेगा और अल्लाह की नाराज़गी मुझ पर आएगी? क्या तुम इतना भी विचार नहीं करते कि इन्हें अपने पास रखना ही मेरे लिए और तुम्हारे लिए बेहतर है? तुम्हें चाहिए कि तुम अच्छे-बुरे पर ग़ौर करो और समझो कि इन ग़रीब और कमज़ोर ईमानवालों को निकालना कितनी बड़ी ग़लती होगी। अल्लाह तआला इन्हें पसंद करता है, और मैं उन्हें कैसे अपने से दूर कर सकता हूँ जिन्हें अल्लाह ने अपने पास बुलाया है?
फ़ायदे (उपदेश):
- यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को कभी भी दुनियावी लोगों की खुशी के लिए सच्चे ईमानवालों को अपमानित नहीं करना चाहिए, चाहे वे कितने ही कमज़ोर या ग़रीब क्यों न हों।
- अल्लाह का डर इंसान को हर उस काम से रोकता है जो उसकी नाराज़गी का कारण बने, चाहे वह काम समाज में कितना ही स्वीकार्य क्यों न हो।
- सच्चा नेता और सच्चा मुसलमान वही है जो अल्लाह की रज़ा को लोगों की रज़ा पर तरज़ीह देता है, और किसी भी इंसानी दबाव में आकर सच्चाई का साथ नहीं छोड़ता।
- इस आयत में विचार और चिंतन की अपील है — इंसान को हर मामले में अंजाम सोचकर काम करना चाहिए, न कि जल्दबाज़ी या अहंकार में आकर गलत फ़ैसले लेना चाहिए।
- यहाँ से हमें यह भी सीख मिलती है कि ईमानवालों की इज़्ज़त करना और उन्हें अपने साथ रखना बरकत का ज़रिया है, और उन्हें दूर करना अल्लाह के अज़ाब को बुलाना है।
📜 आयत 28-32 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 30
सूरा हूद आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मेरी क़ौम अगर मै इन (बेचारे ग़रीब) (ईमानदारों) को…सूरा आयत 30/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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