Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَزَائِنُ اللهِ: अल्लाह के ख़ज़ाने, यानी रिज़्क़ और रहमत के भंडार।
- أَعْلَمُ الْغَيْبَ: मैं छिपी हुई बातों (ग़ैब) का ज्ञान रखता हूँ।
- تَزْدَرِي أَعْيُنُكُمْ: जिन्हें तुम्हारी आँखें हेय (तुच्छ) समझती हैं, यानी जिन्हें तुम लोग घृणा की दृष्टि से देखते हो।
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, जो अपनी जगह से हटकर ज़ुल्म करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के सरदारों से फ़रमा रहे हैं, जो उन पर आरोप लगा रहे थे कि तू अपने पास अल्लाह के ख़ज़ाने रखता है, ग़ैब जानता है, या कोई फ़रिश्ता है। वे इन सब बातों से साफ़ इनकार करते हुए कहते हैं: "मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, जिनसे मैं जो चाहूँ खर्च करूँ, और न मैं ग़ैब (छिपी हुई बातों) का ज्ञान रखता हूँ कि तुम्हें भविष्य की ख़बरें दूँ, और न मैं यह दावा करता हूँ कि मैं कोई फ़रिश्ता हूँ। मैं तो बस तुम्हारे जैसा एक इंसान हूँ, जिसे अल्लाह ने रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए चुना है।"
फिर वे उन कमज़ोर और ग़रीब मोमिनों के बारे में फ़रमाते हैं, जिन्हें क़ौम के बड़े लोग हेय समझते थे और कहते थे कि इन्हें अल्लाह कोई भलाई नहीं देगा। नूह (अलैहिस्सलाम) कहते हैं: "मैं उन लोगों के बारे में भी यह नहीं कहता कि अल्लाह उन्हें कोई भलाई (ईमान, हिदायत, या दुनिया का रिज़्क़) नहीं देगा। अल्लाह ही बेहतर जानता है जो कुछ उनके दिलों में है। वे सच्चे मोमिन हैं या नहीं, यह अल्लाह ही जानता है। अगर मैं उन्हें बुरा कहूँ या उनके बारे में ऐसी बात कहूँ जो मुझे नहीं पता, तो मैं ज़ालिमों (अत्याचारियों) में से हो जाऊँगा।"
यानी नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी बराअत (पवित्रता) और सच्चाई को साबित किया कि वे न तो कोई ऐसा दावा करते हैं जो उनका हक़ नहीं, और न ही किसी मोमिन के बारे में बुरा कहते हैं। वे सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने वाले हैं।
फ़ायदे (उपदेश):
- पैग़म्बर और दावत देने वाले को चाहिए कि वह अपनी हैसियत से बढ़कर कोई दावा न करे, और लोगों को सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ बुलाए, न कि अपनी तरफ़।
- किसी इंसान के बारे में उसकी सूरत, माल या दुनिया की हैसियत देखकर फ़ैसला नहीं करना चाहिए। असली इज़्ज़त अल्लाह के पास है, और वही दिलों के हाल जानता है।
- मोमिन को चाहिए कि वह कमज़ोर और ग़रीब लोगों की इज़्ज़त करे, उन्हें हेय न समझे, क्योंकि अल्लाह के नज़दीक सबसे प्यारे वही लोग हैं जो सच्चे दिल से ईमान लाए।
- ग़ैब का इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है। किसी इंसान को यह दावा नहीं करना चाहिए कि वह भविष्य या छिपी बातें जानता है।
- ज़ुल्म सिर्फ़ ज़मीन पर ज़बरदस्ती करना नहीं है, बल्कि किसी के बारे में बिना जाने बुरा गुमान करना और उसे नीचा दिखाना भी ज़ुल्म है।
📜 आयत 29-33 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 31
सूरा हूद आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मै तो तुमसे ये नहीं कहता कि मेरे पास…सूरा आयत 31/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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