(तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ नूह तुम (ये क्या कह रहे हो) हरगिज़ वह तुम्हारे अहल में शामिल नहीं वह बेशक बदचलन है (देखो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है मुझसे उसके बारे में (दरख्वास्त न किया करो और नादानों की सी बातें न करो) नूह ने अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार मै तुझ ही से पनाह मागँता हूँ कि जिस चीज़ का मुझे इल्म न हो मै उसकी दरख्वास्त करुँ
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خدا نے فرمایا کہ نوح وہ تیرے گھر والوں میں نہیں ہے وہ تو ناشائستہ افعال ہے تو جس چیز کی تم کو حقیقت معلوم نہیں ہے اس کے بارے میں مجھ سے سوال ہی نہ کرو۔ اور میں تم کو نصیحت کرتا ہوں کہ نادان نہ بنو
لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ: तुम्हारे उन परिवार वालों में से नहीं है, जिन्हें हमने बचाने का वादा किया था।
عَمَلٌ غَيْرُ صَالِحٍ: यह एक ऐसा काम है जो अच्छा नहीं है, अर्थात यह कुफ्र और अवज्ञा पर आधारित है।
فَلَا تَسْأَلْنِ: मुझसे सवाल मत करो।
مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ: ऐसी चीज़ जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं है (यानी जो मेरी ग़ैबी हिकमत के ख़िलाफ़ हो)।
أَعِظُكَ: मैं तुम्हें नसीहत करता हूँ।
مِنَ الْجَاهِلِينَ: उन लोगों में से होने से जो अज्ञानता से काम लेते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को जवाब देते हुए फ़रमाया: "ऐ नूह! यह (तुम्हारा बेटा जो डूब गया) तुम्हारे उन अहल (परिवार) में से नहीं है, जिनसे मैंने तुम्हें बचाने का वादा किया था।" यानी वादा उन अहल से था जो ईमान वाले हों, और यह लड़का काफ़िर था, इसलिए वह उस वादे में शामिल नहीं था। अल्लाह ने स्पष्ट किया कि यह "ग़ैर-सालिह अमल" है—यानी उसका कुफ्र और अवज्ञा ही उसका असली काम था, और यही वजह बनी उसके हलाक होने की।
फिर अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को नसीहत की: "तुम मुझसे ऐसी चीज़ का सवाल मत करो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है।" यानी तुम नहीं जानते कि मेरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) में क्या बेहतर है—शायद उसका डूबना ही तुम्हारे और दीन के लिए बेहतर हो। अल्लाह ने आगे फ़रमाया: "मैं तुम्हें नसीहत करता हूँ कि तुम जाहिलों में से न बनो"—यानी ऐसा सवाल करना जो मेरी क़ुदरत और हिकमत के ख़िलाफ़ हो, जहालत की निशानी है। यह एक नरम लेकिन बहुत गहरी तनबीह (चेतावनी) थी, जो नूह (अलैहिस्सलाम) के प्यार और उनके दर्जे के लिहाज़ से थी, क्योंकि वे नबी थे और उन्हें अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना चाहिए।
फ़ायदे (सबक):
रिश्तेदारी का दावा ईमान के बिना बेकार है: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ असली निस्बत (रिश्ता) ईमान से है, न कि सिर्फ़ ख़ून के रिश्ते से। नूह (अलैहिस्सलाम) का बेटा होने के बावजूद वह अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सका।
अल्लाह से दुआ में अदब (शिष्टाचार) ज़रूरी है: हमें दुआ करते वक़्त अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखना चाहिए। कभी-कभी जो हम चाहते हैं वह हमारे लिए बेहतर नहीं होता, इसलिए दुआ में "जो आपके यहाँ बेहतर हो वही हो" का उसूल अपनाना चाहिए।
इल्म के बग़ैर बात करना जहालत है: यह आयत हमें सिखाती है कि जिस चीज़ का हमें इल्म न हो, उसके बारे में सवाल करना या फ़ैसला करना जहालत है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के फ़ैसलों पर यक़ीन रखे, भले ही वह उसकी समझ में न आए।
अल्लाह की नसीहत रहमत है: अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को नरमी से समझाया, जो दिखाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को प्यार से सुधारता है। यह हमारे लिए सबक है कि गलती पर लोगों को सख़्ती से नहीं, बल्कि हिकमत और नरमी से समझाना चाहिए।
कुफ्र और गुनाह इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देते हैं: चाहे इंसान कितना भी बड़े नबी की औलाद क्यों न हो, उसका कुफ्र उसे हलाकत की तरफ़ ले जाता है। यह हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त की तरफ़ बुलाता है।
(तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ नूह तुम (ये क्या कह रहे हो) हरगिज़ वह तुम्हारे अहल में शामिल नहीं वह बेशक बदचलन है (देखो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है मुझसे उसके बारे में (दरख्वास्त न किया करो और नादानों की सी बातें न करो) नूह ने अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार मै तुझ ही से पनाह मागँता हूँ कि जिस चीज़ का मुझे इल्म न हो मै उसकी दरख्वास्त करुँ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
और (जिस वक्त नूह का बेटा ग़रक (डूब) हो रहा था तो नूह ने अपने परवरदिगार को पुकारा और अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार इसमें तो शक़ नहीं कि मेरा बेटा मेरे अहल (घर वालों) में शामिल है और तूने वायदा किया था कि तेरे अहल को बचा लूँगा) और इसमें शक़ नहीं कि तेरा वायदा सच्चा है और तू सारे (जहान) के हाकिमों से बड़ा हाकिम है
(तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ नूह तुम (ये क्या कह रहे हो) हरगिज़ वह तुम्हारे अहल में शामिल नहीं वह बेशक बदचलन है (देखो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है मुझसे उसके बारे में (दरख्वास्त न किया करो और नादानों की सी बातें न करो) नूह ने अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार मै तुझ ही से पनाह मागँता हूँ कि जिस चीज़ का मुझे इल्म न हो मै उसकी दरख्वास्त करुँ
और अगर तु मुझे (मेरे कसूर न बख्श देगा और मुझ पर रहम न खाएगा तो मैं सख्त घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा (जब तूफान जाता रहा तो) हुक्म दिया गया ऐ नूह हमारी तरफ से सलामती और उन बरकतों के साथ कश्ती से उतरो
जो तुम पर हैं और जो लोग तुम्हारे साथ हैं उनमें से न कुछ लोगों पर और (तुम्हारे बाद) कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें हम थोड़े ही दिन बाद बहरावर करेगें फिर हमारी तरफ से उनको दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
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