Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ: तुम्हारे उन परिवार वालों में से नहीं है, जिन्हें हमने बचाने का वादा किया था।
- عَمَلٌ غَيْرُ صَالِحٍ: यह एक ऐसा काम है जो अच्छा नहीं है, अर्थात यह कुफ्र और अवज्ञा पर आधारित है।
- فَلَا تَسْأَلْنِ: मुझसे सवाल मत करो।
- مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ: ऐसी चीज़ जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं है (यानी जो मेरी ग़ैबी हिकमत के ख़िलाफ़ हो)।
- أَعِظُكَ: मैं तुम्हें नसीहत करता हूँ।
- مِنَ الْجَاهِلِينَ: उन लोगों में से होने से जो अज्ञानता से काम लेते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को जवाब देते हुए फ़रमाया: "ऐ नूह! यह (तुम्हारा बेटा जो डूब गया) तुम्हारे उन अहल (परिवार) में से नहीं है, जिनसे मैंने तुम्हें बचाने का वादा किया था।" यानी वादा उन अहल से था जो ईमान वाले हों, और यह लड़का काफ़िर था, इसलिए वह उस वादे में शामिल नहीं था। अल्लाह ने स्पष्ट किया कि यह "ग़ैर-सालिह अमल" है—यानी उसका कुफ्र और अवज्ञा ही उसका असली काम था, और यही वजह बनी उसके हलाक होने की।
फिर अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को नसीहत की: "तुम मुझसे ऐसी चीज़ का सवाल मत करो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है।" यानी तुम नहीं जानते कि मेरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) में क्या बेहतर है—शायद उसका डूबना ही तुम्हारे और दीन के लिए बेहतर हो। अल्लाह ने आगे फ़रमाया: "मैं तुम्हें नसीहत करता हूँ कि तुम जाहिलों में से न बनो"—यानी ऐसा सवाल करना जो मेरी क़ुदरत और हिकमत के ख़िलाफ़ हो, जहालत की निशानी है। यह एक नरम लेकिन बहुत गहरी तनबीह (चेतावनी) थी, जो नूह (अलैहिस्सलाम) के प्यार और उनके दर्जे के लिहाज़ से थी, क्योंकि वे नबी थे और उन्हें अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना चाहिए।
फ़ायदे (सबक):
- रिश्तेदारी का दावा ईमान के बिना बेकार है: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ असली निस्बत (रिश्ता) ईमान से है, न कि सिर्फ़ ख़ून के रिश्ते से। नूह (अलैहिस्सलाम) का बेटा होने के बावजूद वह अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सका।
- अल्लाह से दुआ में अदब (शिष्टाचार) ज़रूरी है: हमें दुआ करते वक़्त अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखना चाहिए। कभी-कभी जो हम चाहते हैं वह हमारे लिए बेहतर नहीं होता, इसलिए दुआ में "जो आपके यहाँ बेहतर हो वही हो" का उसूल अपनाना चाहिए।
- इल्म के बग़ैर बात करना जहालत है: यह आयत हमें सिखाती है कि जिस चीज़ का हमें इल्म न हो, उसके बारे में सवाल करना या फ़ैसला करना जहालत है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के फ़ैसलों पर यक़ीन रखे, भले ही वह उसकी समझ में न आए।
- अल्लाह की नसीहत रहमत है: अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) को नरमी से समझाया, जो दिखाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को प्यार से सुधारता है। यह हमारे लिए सबक है कि गलती पर लोगों को सख़्ती से नहीं, बल्कि हिकमत और नरमी से समझाना चाहिए।
- कुफ्र और गुनाह इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देते हैं: चाहे इंसान कितना भी बड़े नबी की औलाद क्यों न हो, उसका कुफ्र उसे हलाकत की तरफ़ ले जाता है। यह हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त की तरफ़ बुलाता है।
📜 आयत 44-48 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 46
सूरा हूद आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ…सूरा आयत 46/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


