हूद · 45/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَنَادَىٰ نُوحٌ رَّبَّهُ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ابْنِي مِنْ أَهْلِي وَإِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَأَنتَ أَحْكَمُ الْحَاكِمِينَ ۝٤٥
Wa naadaa noohur Rabbahoo faqaala Rabbi innabnee min ahlee wa inna wa`dakal haqqu wa Anta ahkamul haakimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (जिस वक्त नूह का बेटा ग़रक (डूब) हो रहा था तो नूह ने अपने परवरदिगार को पुकारा और अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार इसमें तो शक़ नहीं कि मेरा बेटा मेरे अहल (घर वालों) में शामिल है और तूने वायदा किया था कि तेरे अहल को बचा लूँगा) और इसमें शक़ नहीं कि तेरा वायदा सच्चा है और तू सारे (जहान) के हाकिमों से बड़ा हाकिम है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नादा: पुकारा, आवाज़ लगाई
  • रब्ब: पालनहार, प्रभु
  • अहली: मेरे परिवार वाले, मेरे घर वाले
  • वअ्द: वादा, प्रतिज्ञा
  • अहकमुल हाकिमीन: सबसे बड़ा फ़ैसला करने वाला, सबसे न्यायपूर्ण शासक

व्याख्या:

जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि उनका बेटा जो उनके परिवार का सदस्य था, उन लोगों में शामिल नहीं हुआ जो कश्ती (नाव) पर सवार हुए, और वह डूबने वालों में से हो गया, तो उन्होंने अपने रब को पुकारा। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे पालनहार! मेरा बेटा मेरे परिवार का ही एक हिस्सा है, और आपने मुझसे वादा किया था कि आप मुझे और मेरे परिवार को इस आपदा से बचा लेंगे। और आपका वादा सच्चा है, इसमें कोई संदेह नहीं कि आप जो वादा करते हैं उसे पूरा करते हैं। आप सबसे बड़े फ़ैसला करने वाले हैं, आपका फ़ैसला सबसे न्यायपूर्ण और सबसे सही होता है।"

नूह (अलैहिस्सलाम) ने यह बात अपने बेटे के प्रति पैदाइशी मोहब्बत और पिता के स्वाभाविक जज़्बात की वजह से कही, क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उनका बेटा भी उनके परिवार में शामिल है। लेकिन उन्हें यह बात मालूम नहीं थी कि अल्लाह का वादा सिर्फ उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए हैं, न कि हर उस व्यक्ति के लिए जो ख़ून के रिश्ते से परिवार का सदस्य हो। यहाँ नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह की तरफ़ पूरा भरोसा और आशा के साथ रुजू किया, और उनके अंदाज़े में यह बात थी कि अल्लाह का वादा हर हाल में पूरा होगा।

फ़ायदे और सबक:

  1. अल्लाह से दुआ में आशा और भरोसा: नूह (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें हर हाल में अल्लाह की रहमत और उसके वादे पर भरोसा रखना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
  2. अल्लाह का वादा सच्चा है: यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का हर वादा सच्चा और पक्का है, उसमें कभी कोई कमी या बदलाव नहीं होता।
  3. न्याय में अल्लाह की पूर्णता: अल्लाह सबसे बड़ा न्याय करने वाला है, उसका फ़ैसला हमेशा सही और हिकमत पर आधारित होता है, भले ही हमें उसकी हिकमत समझ न आए।
  4. मोहब्बत और अल्लाह की मर्ज़ी में तालमेल: हमें अपनी पैदाइशी मोहब्बतों को अल्लाह की मर्ज़ी और उसके हुक्म के आगे पेश करना चाहिए, और याद रखना चाहिए कि अल्लाह की मर्ज़ी ही सबसे ऊपर है।
  5. दुआ में अदब और तरीक़ा: नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी दुआ में अल्लाह की तारीफ़ और उसकी सिफ़ात का ज़िक्र किया, जो हमें सिखाता है कि दुआ करते वक़्त अल्लाह की तारीफ़ और उसकी बुज़ुर्गी का ज़िक्र करना चाहिए।


📜 आयत 43-47 — हूद

43قَالَ سَآوِي إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِي مِنَ الْمَاءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ الْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا الْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ الْمُغْرَقِينَ
(मुझे माफ कीजिए) मै तो अभी किसी पहाड़ का सहारा पकड़ता हूँ जो मुझे पानी (में डूबने) से बचा लेगा नूह ने (उससे) कहा (अरे कम्बख्त) आज ख़ुदा के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर ख़ुदा ही जिस पर रहम फरमाएगा और (ये बात हो रही थी कि) यकायक दोनो बाप बेटे के दरमियान एक मौज हाएल हो गई और वह डूब कर रह गया
44وَقِيلَ يَا أَرْضُ ابْلَعِي مَاءَكِ وَيَا سَمَاءُ أَقْلِعِي وَغِيضَ الْمَاءُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ وَاسْتَوَتْ عَلَى الْجُودِيِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और (ग़ैब ख़ुदा की तरफ से) हुक्म दिया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी जज्ब (शोख) करे और ऐ आसमान (बरसने से) थम जा और पानी घट गया और (लोगों का) काम तमाम कर दिया गया और कश्ती जो वही (पहाड़) पर जा ठहरी और (चारो तरफ) पुकार दिया गया कि ज़ालिम लोगों को (ख़ुदा की रहमत से) दूरी हो
45وَنَادَىٰ نُوحٌ رَّبَّهُ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ابْنِي مِنْ أَهْلِي وَإِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَأَنتَ أَحْكَمُ الْحَاكِمِينَ
और (जिस वक्त नूह का बेटा ग़रक (डूब) हो रहा था तो नूह ने अपने परवरदिगार को पुकारा और अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार इसमें तो शक़ नहीं कि मेरा बेटा मेरे अहल (घर वालों) में शामिल है और तूने वायदा किया था कि तेरे अहल को बचा लूँगा) और इसमें शक़ नहीं कि तेरा वायदा सच्चा है और तू सारे (जहान) के हाकिमों से बड़ा हाकिम है
46قَالَ يَا نُوحُ إِنَّهُ لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ ۖ إِنَّهُ عَمَلٌ غَيْرُ صَالِحٍ ۖ فَلَا تَسْأَلْنِ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ ۖ إِنِّي أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
(तू मेरे बेटे को नजात दे) ख़ुदा ने फरमाया ऐ नूह तुम (ये क्या कह रहे हो) हरगिज़ वह तुम्हारे अहल में शामिल नहीं वह बेशक बदचलन है (देखो जिसका तुम्हें इल्म नहीं है मुझसे उसके बारे में (दरख्वास्त न किया करो और नादानों की सी बातें न करो) नूह ने अर्ज़ की ऐ मेरे परवरदिगार मै तुझ ही से पनाह मागँता हूँ कि जिस चीज़ का मुझे इल्म न हो मै उसकी दरख्वास्त करुँ
47قَالَ رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُن مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और अगर तु मुझे (मेरे कसूर न बख्श देगा और मुझ पर रहम न खाएगा तो मैं सख्त घाटा उठाने वालों में हो जाऊँगा (जब तूफान जाता रहा तो) हुक्म दिया गया ऐ नूह हमारी तरफ से सलामती और उन बरकतों के साथ कश्ती से उतरो
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अनुवाद — हूद 45

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Wednesday, August 19, 2026

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