हूद · 5/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ ۚ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ ۝٥
Alaa innahum yasnoona sudoorahum liyastakhfoo minh; alaa heena yastaghshoona siyaabahum ya`lamu maa yusiroona wa maa yu`linoon; innahoo `aleemum bizaatis sudoor
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ़्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक़ नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ: अपने सीने झुकाते हैं या अपने दिलों में कुछ छिपाते हैं।
  • لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ: ताकि वे अल्लाह से अपनी बातें छिपा सकें।
  • يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ: अपने कपड़ों से अपने आप को ढक लेते हैं (सिर ढक लेते हैं)।
  • ذَاتِ الصُّدُورِ: वह चीज़ें जो दिलों में होती हैं, यानी भेद और राज़।

तफ़सीर:

सुनो! ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) अपने सीनों को झुकाते हैं और अपने दिलों में कुफ़्र और शक छिपाते हैं, ताकि वे अल्लाह से अपनी बातें छिपा सकें। उन्हें लगता है कि अल्लाह उनके दिलों के भेद नहीं जानता। लेकिन अल्लाह उन्हें बता रहा है कि जिस वक़्त वे अपने कपड़ों से अपने आप को ढक लेते हैं, और सिर से पाँव तक छिप जाते हैं, उस वक़्त भी अल्लाह जानता है कि वे क्या छिपाते हैं और क्या ज़ाहिर करते हैं। वह उनकी छिपी और खुली हर बात से पूरी तरह वाक़िफ़ है। बेशक अल्लाह उन सब चीज़ों का जानने वाला है जो दिलों में पनाह लेती हैं, चाहे वो नीयतें हों, इरादे हों या छिपे हुए राज़।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह दिलों के राज़ तक जानता है, इसलिए हमें अपने दिलों को ईमान और अच्छी नीयतों से साफ़ रखना चाहिए।
  2. इंसान चाहे कितना भी छिपाने की कोशिश करे, अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है — ये हक़ीक़त हमें अल्लाह से डरने और उसकी निगरानी का एहसास दिलाती है।
  3. ये आयत हमें सिखाती है कि हमारा रिश्ता अल्लाह से सिर्फ़ ज़ाहिरी इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे दिलों की हालत भी उसके सामने है — इसलिए दिल को अच्छाई और ईमान से भरना चाहिए।
  4. ये बात हमें तसल्ली देती है कि अल्लाह हमारी छिपी हुई मेहनत, नीयत और ज़रूरतों को जानता है, और वह हर अच्छे काम का अच्छा बदला देने वाला है।
🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — हूद

3وَأَنِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَاعًا حَسَنًا إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِي فَضْلٍ فَضْلَهُ ۖ وَإِن تَوَلَّوْا فَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَبِيرٍ
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है
4إِلَى اللَّهِ مَرْجِعُكُمْ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(याद रखो) तुम सब को (आख़िरकार) ख़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है
5أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ ۚ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ़्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक़ नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है
6۞ وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ إِلَّا عَلَى اللَّهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَا ۚ كُلٌّ فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के ज़िम्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
7وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَكَانَ عَرْشُهُ عَلَى الْمَاءِ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۗ وَلَئِن قُلْتَ إِنَّكُم مَّبْعُوثُونَ مِن بَعْدِ الْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और वह तो वही (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफ़िर लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
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अनुवाद — हूद 5

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Tuesday, August 18, 2026

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