(याद रखो) तुम सब को (आख़िरकार) ख़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
مَرْجِعُكُمْ: तुम्हारी वापसी, तुम्हारा लौटना।
قَدِيرٌ: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला, जिसके लिए कुछ भी असंभव नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम सबको एकत्र होकर अल्लाह की ओर ही लौटना है। यह लौटना अकेले उसी की ओर है, कोई और तुम्हें अपनी ओर नहीं बुला सकता और न ही कोई तुम्हें उसकी पकड़ से बचा सकता है। वही तुम्हारा अंतिम ठिकाना है। और वह अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है — उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है। वह तुम्हें मृत्यु के बाद दोबारा जीवित करने, क़ब्रों से उठाने, हश्र के मैदान में इकट्ठा करने और तुम्हारे अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब लेने पर पूरी तरह क़ादिर है। न तो उसकी शक्ति से कोई चीज़ बाहर है, और न ही उसके फ़ैसले को टालने वाला कोई है। जिस दिन वह फ़ैसला करेगा, उस दिन न तो कोई सिफ़ारिश काम आएगी और न ही कोई बचाव का ज़रिया। वह अपनी इच्छा के अनुसार इनाम और सज़ा देने पर पूर्ण अधिकार रखता है।
फ़ायदे (सीख):
यह आयत हमें याद दिलाती है कि इस दुनिया की ज़िंदगी आख़िरी नहीं है; हमें एक दिन अपने रब के सामने पेश होना है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे बुराई से रोकता है।
अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) पर यक़ीन दिलाती है कि वह मौत के बाद दोबारा ज़िंदगी देने पर पूरी तरह सक्षम है, इसलिए आख़िरत पर विश्वास करना हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है।
यह आयत इंसान को आशा और भय दोनों देती है — अल्लाह की रहमत की उम्मीद और उसके अज़ाब का डर, ताकि वह अपने जीवन को सही दिशा में ढाले।
यह सिखाती है कि अल्लाह के फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती, इसलिए हमें केवल उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ़्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक़ नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के ज़िम्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
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