हूद · 58/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَنَجَّيْنَاهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍ ۝٥٨
Wa lammaa jaaa`a amrunaa najainaa Hoodanw wallazeena aamanoo ma`ahoo birahmatim minnaa wa najainaahum min `azaabin ghaleez
📖 हिंदी अर्थ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख्त अज़ाब से बचा लिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْرُنَا (हमारा आदेश/अम्र): यहाँ अल्लाह का वह आदेश है जो आद के क़ौम पर अज़ाब की शक्ल में नाज़िल हुआ।
  • نَجَّيْنَا (हमने नजात दी): बचा लिया, मुक्त कर दिया।
  • بِرَحْمَةٍ (रहमत के साथ): अल्लाह की विशेष दया और कृपा से।
  • غَلِيظٍ (सख्त/कठोर): बहुत भारी और दर्दनाक अज़ाब।

तफसीर (व्याख्या):

जब हमारा फ़ैसला आ गया और आद की क़ौम पर अज़ाब का वक़्त आ पहुँचा, तो अल्लाह तआला ने अपनी ख़ास रहमत और फ़ज़ल से हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) को और उन लोगों को जो उन पर ईमान लाए थे, उस सख्त अज़ाब से महफ़ूज़ रखा। यह अज़ाब इतना भयानक था कि उसने पूरी क़ौम को तबाह कर दिया, लेकिन अल्लाह की रहमत ने हूद और उनके साथियों को उससे बचा लिया। यह नजात सिर्फ़ दुनिया के अज़ाब से नहीं थी, बल्कि आख़िरत के सख्त अज़ाब से भी महफ़ूज़ी थी, क्योंकि ईमानवालों को दोनों जहान में अल्लाह की पनाह हासिल होती है। जब अज़ाब आया तो काफ़िरों का कोई निशान नहीं बचा, सिवाय उनके खाली घरों के, जबकि हूद और उनके साथी सही-सलामत बच निकले।


फ़ायदे (सबक और रहनुमाई):

  1. रहमत-ए-इलाही का दरवाज़ा हमेशा खुला है: अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों के साथ होती है, चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यों न आए। ईमानवालों के लिए अल्लाह की पनाह सबसे बड़ी ताक़त है।
  2. ईमान ही नजात का ज़रिया है: इस आयत से साबित होता है कि सिर्फ़ ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत के अज़ाब से बचाती है। नेक अमल के साथ सच्चा ईमान ही कामयाबी की कुंजी है।
  3. अल्लाह की मदद का वक़्त: जब अज़ाब आता है तो अल्लाह अपने नबियों और ईमानवालों को ज़रूर नजात देता है। यह अल्लाह का वायदा है जो कभी नहीं टूटता।
  4. गुनाह से बचने की तरग़ीब: यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम तबाही है, और उसकी इताअत (आज्ञाकारिता) ही सुरक्षा का रास्ता है। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह के हुक्मों का पालन करना चाहिए।
  5. नबियों की मुहब्बत: हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उन्हें झुठलाया, लेकिन अल्लाह ने उन्हें इज़्ज़त दी। इससे हमें सबक मिलता है कि हक़ पर क़ायम रहने वालों को आख़िर में कामयाबी ज़रूर मिलती है, चाहे दुनिया में कितनी भी मुख़ालिफ़त क्यों न हो।


📜 आयत 56-60 — हूद

56إِنِّي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَابَّةٍ إِلَّا هُوَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
मै तो सिर्फ ख़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा भी परवरदिगार है और तुम्हारा भी परवरदिगार है और रुए ज़मीन पर जितने चलने वाले हैं सबकी चोटी उसी के साथ है इसमें तो शक़ ही नहीं कि मेरा परवरदिगार (इन्साफ की) सीधी राह पर है
57فَإِن تَوَلَّوْا فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّي قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْئًا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है
58وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَنَجَّيْنَاهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख्त अज़ाब से बचा लिया
59وَتِلْكَ عَادٌ ۖ جَحَدُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا رُسُلَهُ وَاتَّبَعُوا أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मने ख़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें
60وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا إِنَّ عَادًا كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّعَادٍ قَوْمِ هُودٍ
और इस दुनिया में भी लानत उनके पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) देख क़ौमे आद ने अपने परवरदिगार का इन्कार किया देखो हूद की क़ौमे आद (हमारी बारगाह से) धुत्कारी पड़ी है
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अनुवाद — हूद 58

सूरा हूद आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने…

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Tuesday, August 18, 2026

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