हूद · 57/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَإِن تَوَلَّوْا فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّي قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْئًا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ ۝٥٧
Fa in tawallaw faqad ablaghtukum maaa ursiltu biheee ilaikum; wa yastakhlifu Rabbee qawman ghairakum wa laa tadur roonahoo shai`aa; inna Rabbee `alaa kulli shai`in Hafeez
📖 हिंदी अर्थ
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّوْا: मुँह मोड़ो, विमुख हो जाओ।
  • أَبْلَغْتُكُم: मैंने तुम्हें पहुँचा दिया।
  • يَسْتَخْلِفُ: दूसरों को तुम्हारा उत्तराधिकारी बनाएगा।
  • حَفِيظ: हर चीज़ की रक्षा करने वाला, देखभाल करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप कहें कि यदि ये लोग आपके संदेश से मुँह मोड़ लें और उसे स्वीकार न करें, तो आप पर कोई दोष नहीं है। आपने उन्हें वह सब कुछ पहुँचा दिया जो अल्लाह ने आपको सौंपा था और जिसे पहुँचाने का आदेश दिया था। इस प्रकार आपने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर दी और उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो गई। अब यदि वे ईमान नहीं लाते, तो उनका यह इनकार अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता, क्योंकि अल्लाह उनसे बेनियाज़ (बेपरवाह) है। वह उन्हें हलाक करके उनकी जगह दूसरी क़ौम लाएगा जो उसकी इबादत करेगी, उसे एक मानेगी और उसके आगे सिर झुकाएगी। ये लोग अपने कुफ़्र और इनकार से न तो अल्लाह को कोई नुक़सान पहुँचा सकते हैं और न ही उसके दीन को। अल्लाह हर चीज़ पर निगरानी रखने वाला और हर चीज़ की रक्षा करने वाला है। वह अपने नबी की रक्षा उनके बुरे इरादों और साज़िशों से करता है, और वही उनके कर्मों का हिसाब लेने वाला है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. दावत और पैग़ाम पहुँचाने के बाद नबी की ज़िम्मेदारी ख़त्म हो जाती है; हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए, नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
  2. अल्लाह की शक्ति असीम है; वह किसी पर निर्भर नहीं है। जब एक क़ौम उसकी नाफ़रमानी करती है, तो वह उसके स्थान पर दूसरी क़ौम ला सकता है। यह हमें अल्लाह के सामने विनम्रता और आज्ञाकारिता सिखाता है।
  3. अल्लाह अपने नेक बंदों की रक्षा करता है और उन्हें दुश्मनों की बुराइयों से बचाता है। यह मोमिन के दिल में अल्लाह पर भरोसे की मज़बूती पैदा करता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में किसी क़ौम या व्यक्ति की अहमियत अल्लाह की आज्ञाकारिता पर निर्भर है; जो उसकी इबादत से मुँह मोड़ेगा, उसे बदला जा सकता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की राह पर क़ायम रहना चाहिए और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 55-59 — हूद

55مِن دُونِهِ ۖ فَكِيدُونِي جَمِيعًا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ
इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे साथ मक्कारी करो और मुझे (दम मारने की) मोहलत भी न दो तो मुझे परवाह नहीं
56إِنِّي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَابَّةٍ إِلَّا هُوَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
मै तो सिर्फ ख़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा भी परवरदिगार है और तुम्हारा भी परवरदिगार है और रुए ज़मीन पर जितने चलने वाले हैं सबकी चोटी उसी के साथ है इसमें तो शक़ ही नहीं कि मेरा परवरदिगार (इन्साफ की) सीधी राह पर है
57فَإِن تَوَلَّوْا فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّي قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْئًا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है
58وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَنَجَّيْنَاهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख्त अज़ाब से बचा लिया
59وَتِلْكَ عَادٌ ۖ جَحَدُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا رُسُلَهُ وَاتَّبَعُوا أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मने ख़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें
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अनुवाद — हूद 57

सूरा हूद आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे…

सूरा आयत 57/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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