हूद · 59/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَتِلْكَ عَادٌ ۖ جَحَدُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا رُسُلَهُ وَاتَّبَعُوا أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ ۝٥٩
Wa tilka `aad, jahadoo bi Aayaati Rabbihim wa `asaw Rusulahoo wattaba`ooo amra kulli jabbaarin `aneed
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मने ख़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَحَدُوا: उन्होंने इनकार किया, न माना।
  • آيَاتِ رَبِّهِمْ: अपने रब की निशानियाँ और प्रमाण।
  • عَصَوْا: उन्होंने अवज्ञा की, नाफ़रमानी की।
  • جَبَّارٍ: सरकश, अत्याचारी, जो दूसरों पर ज़ुल्म करे।
  • عَنِيدٍ: हठी, जो सत्य को जानकर भी उसे स्वीकार न करे और उसका विरोध करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये थी 'आद' की क़ौम — वही क़ौम जिसने अपने रब की आयतों और निशानियों को जानबूझकर झुठलाया और उनका इनकार किया। उन्होंने अपने नबी हूद (अलैहिस्सलाम) की नाफ़रमानी की, और चूँकि उन्होंने एक रसूल को नहीं माना, तो गोया उन्होंने सभी रसूलों को नहीं माना — क्योंकि सभी नबी एक ही सत्य की ओर बुलाते हैं। फिर उन्होंने अपने बड़ों और सरदारों की बात मानी, जो अत्याचारी और हठी थे, जो सत्य को जानते हुए भी उसके आगे झुकना नहीं चाहते थे। उन्होंने अल्लाह की राह छोड़कर उन्हीं सरकश लोगों के आदेशों का अनुसरण किया, और यही उनकी तबाही का कारण बना।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की आयतों का इनकार करना और उन्हें झुठलाना किसी भी क़ौम के विनाश का सबसे बड़ा कारण है।
  2. एक नबी की अवज्ञा दरअसल सभी नबियों की अवज्ञा है, क्योंकि सभी नबी एक ही सत्य की ओर बुलाते हैं।
  3. हमें अपने नेताओं और बड़ों की बात आँख बंद करके नहीं माननी चाहिए, बल्कि हर बात को कुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना चाहिए। जो लोग सत्य के विरोधी हों, उनकी बात मानना हमें अल्लाह की राह से भटका सकता है।
  4. यह आयत हमें चेतावनी देती है कि अत्याचारी और हठी लोगों की پیروی करना हमें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल कर सकता है, इसलिए हमें हमेशा सत्य और न्याय का साथ देना चाहिए।
  5. इस क़िस्से से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह की याद और उसके रसूल की बात मानना ही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में सफल बनाता है।


📜 आयत 57-61 — सूरा हूद

57فَإِن تَوَلَّوْا فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّا أُرْسِلْتُ بِهِ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّي قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُ شَيْئًا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है
58وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَنَجَّيْنَاهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख्त अज़ाब से बचा लिया
59وَتِلْكَ عَادٌ ۖ جَحَدُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا رُسُلَهُ وَاتَّبَعُوا أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ
(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मने ख़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें
60وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا إِنَّ عَادًا كَفَرُوا رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّعَادٍ قَوْمِ هُودٍ
और इस दुनिया में भी लानत उनके पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) देख क़ौमे आद ने अपने परवरदिगार का इन्कार किया देखो हूद की क़ौमे आद (हमारी बारगाह से) धुत्कारी पड़ी है
61۞ وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ هُوَ أَنشَأَكُم مِّنَ الْأَرْضِ وَاسْتَعْمَرَكُمْ فِيهَا فَاسْتَغْفِرُوهُ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ ۚ إِنَّ رَبِّي قَرِيبٌ مُّجِيبٌ
और (हमने) क़ौमे समूद के पास उनके भाई सालेह को (पैग़म्बर बनाकर भेजा) तो उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की परसतिश करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं उसी ने तुमको ज़मीन (की मिट्टी) से पैदा किया और तुमको उसमें बसाया तो उससे मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में तौबा करो (बेशक मेरा परवरदिगार (हर शख़्श के) क़रीब और सबकी सुनता और दुआ क़ुबूल करता है
हूदकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — हूद 59

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Friday, October 2, 2026

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