अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا أَغْنَىٰ: कुछ भी काम न आया, कोई फ़ायदा नहीं पहुँचाया।
- عَنْهُ: उससे (अबू लहब से) दूर करने में।
- مَالُهُ: उसका धन-दौलत।
- وَمَا كَسَبَ: और जो कुछ उसने कमाया (जिसमें उसकी औलाद और दूसरी दुनियावी चीज़ें शामिल हैं)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अबू लहब का माल और उसकी कमाई — चाहे वह दौलत हो, ज़मीन-जायदाद हो, या उसकी औलाद और बेटे हों — उसके किसी काम न आएँगे। जब अल्लाह का अज़ाब आएगा, तो न उसका माल उसे बचा सकेगा और न उसकी औलाद। ये सारी चीज़ें न तो उससे अल्लाह की सज़ा को टाल सकेंगी और न ही उसके लिए कोई रहमत ला सकेंगी।
दरअसल, अबू लहब ने सोचा था कि उसका माल और उसकी औलाद उसे हर मुसीबत से बचा लेंगे, लेकिन अल्लाह तआला साफ़ फ़रमा रहा है कि ये सब बिल्कुल बेकार साबित होंगे। दुनिया में जो इंसान अपने माल और औलाद पर इतराता है और उसे अपनी ताक़त समझता है, वह भूल जाता है कि असली ताक़त तो सिर्फ़ अल्लाह के पास है।
यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है — हमें अपने माल, अपनी औलाद और अपनी दुनियावी कमाई पर घमंड नहीं करना चाहिए। ये सब चीज़ें अल्लाह की दी हुई अमानत हैं और इनका सही इस्तेमाल अल्लाह की राह में करना चाहिए। जो इंसान इन्हें अल्लाह की नाफ़रमानी में खर्च करता है, वह आख़िरत में सिर्फ़ नुक़सान उठाएगा।
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि सच्ची कामयाबी उसी की है जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाए और नेक अमल करे। माल और औलाद तो बस दुनिया की रौनक़ हैं, लेकिन आख़िरत की कामयाबी उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी राह में अपना माल खर्च करते हैं। अल्लाह हम सबको इस समझ की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-4 — अल-मसद
अनुवाद — अल-मसद 2
सूरा अल-मसद आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (आख़िर) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न)…सूरा आयत 2/5 — अल-मसद المسد (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मसद सुनें, अल-मसद अनुवाद, अल-मसद mp3, अल-मसद pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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