अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- इलाह (إِلَٰهِ): अर्थात पूजा के योग्य, सच्चा माबूद (معبود)।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला की तीन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है, और यह उनमें से दूसरी विशेषता है। पहली विशेषता "रब्बिन-नास" (लोगों का पालनहार) थी, और अब कहा जा रहा है कि वह "इलाहिन-नास" (लोगों का सच्चा पूज्य) है। यानी वही अकेला है जो सच्ची पूजा का हकदार है, उसके अलावा कोई भी पूजा के योग्य नहीं है। चाहे लोग अपनी इच्छाओं, अपनी कल्पनाओं, या अपनी परंपराओं के आधार पर कितने ही देवी-देवता, मूर्तियाँ, या अन्य चीज़ों की पूजा क्यों न कर लें, सच्चाई यही है कि पूजा का अधिकार केवल और केवल अल्लाह को है। वही सृष्टिकर्ता है, वही पालनहार है, और वही पूजा का एकमात्र हकदार है।
यहाँ "इलाह" शब्द का प्रयोग बताता है कि अल्लाह ही वह सत्ता है जिसकी ओर सभी प्राणियों का दिल स्वाभाविक रूप से झुकता है, और जिसकी पूजा करना हर इंसान की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) में है। जब कोई इंसान किसी और की पूजा करता है, तो वह अपनी फ़ितरत से भटक जाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी पूजा, अपनी इबादत, अपनी दुआएँ, अपनी आशाएँ और अपने डर — सब कुछ केवल अल्लाह के लिए ही रखना चाहिए।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यहाँ "रब्ब" (पालनहार) और "इलाह" (पूज्य) दोनों को "नास" (लोगों) के साथ जोड़ा गया है। यह अल्लाह की असीम दया और करुणा को दर्शाता है कि वह इंसानों का पालनहार भी है और उनका पूज्य भी। वह उनकी सभी ज़रूरतों को पूरा करता है, उन्हें पालता-पोसता है, और फिर भी वह चाहता है कि लोग उसी की पूजा करें, क्योंकि यही उनके लिए बेहतर है।
इस आयत में एक गहरा संदेश है: जिस तरह अल्लाह ने हमें पैदा किया, हमारा पालन-पोषण किया, हमें खाना-पीना दिया, हमें सुरक्षा दी, उसी तरह हमें चाहिए कि हम केवल उसी की इबादत करें। जब हम किसी और से डरते हैं या किसी और से उम्मीद रखते हैं, तो हम अपने असली माबूद को भूल जाते हैं। यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारी सारी ज़रूरतें अल्लाह के हाथ में हैं, और वही हमारी हर मुश्किल को हल कर सकता है।
इसलिए, एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने जीवन के हर पल में अल्लाह को अपना इलाह (पूज्य) माने, उसी से मदद माँगे, उसी से डरे, उसी से प्यार करे, और उसी की राह पर चले। यही सच्ची मुसलमानी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 1-5 — अन-नास
अनुवाद — अन-नास 3
सूरा अन-नास आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों के माबूद की (शैतानी)सूरा आयत 3/6 — अन-नास الناس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नास सुनें, अन-नास अनुवाद, अन-नास mp3, अन-नास pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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