अन-नास · 4/6
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नास
مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ۝٤
Min sharril was waasil khannaas
📖 हिंदी अर्थ
वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْوَسْوَاسِ (वस्वास): वह शैतान जो लोगों के दिलों में बुरे ख़यालात डालता है। यहाँ यह शब्द शैतान के लिए प्रयोग हुआ है।
  • الْخَنَّاسِ (ख़न्नास): बहुत पीछे हटने वाला, छिप जाने वाला। यह शैतान की एक विशेषता है कि जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो वह पीछे हट जाता है और छिप जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें उस शैतान के शर से पनाह माँगने का तरीक़ा सिखा रहे हैं जो इंसान के दिल में वस्वसे (बुरे ख़यालात) डालता है। यह वही शैतान है जो इंसान के ग़ाफ़िल होने पर उसके पास आता है और उसके दिल में बुरे ख़यालात, शक और ग़लत बातें डालता है। लेकिन जैसे ही इंसान अल्लाह को याद करता है, यह शैतान पीछे हट जाता है और छिप जाता है। इसीलिए उसे "ख़न्नास" कहा गया है, यानी बहुत पीछे हटने वाला।

यह शैतान इंसान के दिल में तरह-तरह के वस्वसे डालता है — कभी उसे अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल करता है, कभी उसके दिल में बुरे ख़यालात पैदा करता है, कभी उसे गुनाह की तरफ़ उकसाता है, और कभी उसे अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद करता है। यह शैतान बहुत चालाक है और इंसान के कमज़ोर पहलुओं से उस पर हमला करता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि शैतान के वस्वसों से बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा अल्लाह का ज़िक्र है। जब भी दिल में बुरे ख़यालात आएँ, तो तुरंत अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए और "आज़ू बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम" पढ़ना चाहिए। शैतान अल्लाह के ज़िक्र से बहुत डरता है और भाग जाता है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि शैतान हमारा खुला दुश्मन है और वह हमें हर समय बहकाने की कोशिश में लगा रहता है। इसलिए हमें हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अल्लाह की पनाह माँगते रहना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें यह सूरह सिखाकर बहुत बड़ी नेमत दी है — यह सूरह हमारे लिए ढाल की तरह है जो शैतान के हमलों से हमारी हिफ़ाज़त करती है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम इस सूरह को पढ़ते रहें, ख़ासकर सोने से पहले, और अल्लाह से शैतान के शर से पनाह माँगते रहें। यह सूरह हमारे लिए रहमत और हिफ़ाज़त का ज़रिया है। अल्लाह हम सबको शैतान के वस्वसों से महफ़ूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 2-6 — सूरा अन-नास

2مَلِكِ النَّاسِ
लोगों के बादशाह
3إِلَٰهِ النَّاسِ
लोगों के माबूद की (शैतानी)
4مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ
वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ
5الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ
जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है
6مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से
अन-नासकुरान सूची
6आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अन-नास 4

सूरा अन-नास आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ

सूरा आयत 4/6 — सूरा अन-नास الناس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नास सुनें, सूरा अन-नास अनुवाद, सूरा अन-नास mp3, सूरा अन-नास pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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