Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मुल्क: राज्य, बादशाहत
- तावील अहादीस: सपनों की व्याख्या, रूया की ताबीर
- फ़ातिर: पैदा करने वाला, अस्तित्व में लाने वाला
- वली: संरक्षक, मालिक, कामों को संभालने वाला
- तवफ्फ़नी: मुझे (दुनिया से) उठा ले, मेरी आत्मा को क़ब्ज़ कर ले
- मुस्लिमन: आज्ञाकारी, अल्लाह के सामने सिर झुकाने वाला
- इलहिक़नी: मुझे मिला दे, शामिल कर ले
तफ़सीर:
हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने जब देखा कि अल्लाह तआला ने उन्हें मिस्र का बादशाह बना दिया है, और उन्हें सपनों की व्याख्या का ऐसा इल्म अता किया है जिसके ज़रिए उन्होंने लोगों को सूखे और क़हत के दौर में राहत पहुँचाई, तो उन्होंने ये महसूस किया कि दुनिया का ये मुक़ाम और ये नेअमतें हमेशा रहने वाली नहीं हैं। इसलिए उन्होंने अपने रब की तरफ़ रुजू किया और एक ऐसी दुआ की जो हर मोमिन के लिए नमूना है।
उन्होंने कहा: "ऐ मेरे रब! तूने मुझे मिस्र का राज्य अता किया और मुझे सपनों की ताबीर और दूसरे इल्म सिखाए। ये सब तेरा फ़ज़ल और करम है।" फिर उन्होंने अल्लाह की उस सिफ़त का ज़िक्र किया जो उनके दिल को सुकून देती है: "ऐ आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले! तू ही इस कायनात का ख़ालिक़ है, तू ही मेरा वली है, मेरा संरक्षक और मेरे सारे मामलों को संभालने वाला है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।"
फिर उन्होंने सबसे अहम चीज़ माँगी—जो दुनिया के राज्य से कहीं बेहतर है: "ऐ मेरे रब! मुझे इस हालत में दुनिया से उठा कि मैं तेरा मुस्लिम (आज्ञाकारी) हूँ, और मुझे अपने नेक बंदों में शामिल कर ले—उन पैग़म्बरों और सिद्दीक़ों के साथ जो तेरी रज़ा पर चले।"
ये दुआ सिखाती है कि दुनिया की कामयाबी, बड़े से बड़ा मंसब और इल्म का ख़ज़ाना भी अगर आख़िरत की भलाई के साथ न हो, तो बेकार है। हज़रत यूसुफ़ ने ये नहीं कहा कि "मुझे और राज्य दे" या "मेरी उम्र लंबी कर", बल्कि उन्होंने सबसे पहले ईमान पर ख़ातमा (अच्छा अंजाम) माँगा। यही उनकी बुलंद हिम्मत थी।
इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि हमें चाहिए कि हम दुनिया की नेअमतों में मग़रूर न हों, बल्कि हर वक़्त अल्लाह से अच्छे अंजाम की दुआ करें। हज़रत यूसुफ़ की ये दुआ हमारे लिए एक बेहतरीन नमूना है—कि हम भी अल्लाह से ये माँगें कि "ऐ रब! हमें इस्लाम पर जीना और इस्लाम पर ही मरना नसीब फ़रमा, और हमें अपने नेक बंदों के साथ मिला दे।" ये दुआ जिस्म की लंबी उम्र से बेहतर है, क्योंकि असली कामयाबी यही है कि इंसान अपने रब के सामने सर झुकाए हुए इस दुनिया से रुख़सत हो और उसकी मुलाक़ात उन लोगों से हो जो अल्लाह के प्यारे बंदे हैं।
📜 आयत 99-103 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 101
सूरा यूसुफ आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसके बाद यूसुफ ने दुआ की ऐ परवरदिगार तूने मुझे…सूरा आयत 101/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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