यूसुफ · 102/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۖ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ أَجْمَعُوا أَمْرَهُمْ وَهُمْ يَمْكُرُونَ ۝١٠٢
Zaalika min ambaaa`il ghaibi nooheehi ilaika wa maa kunta ladaihim iz ajma`ooo amrahum wa hum yamkuroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये किस्सा ग़ैब की ख़बरों में से है जिसे हम तुम्हारे पास वही के ज़रिए भेजते हैं (और तुम्हें मालूम होता है वरना जिस वक्त यूसुफ के भाई बाहम अपने काम का मशवरा कर रहे थे और (हलाक की) तदबीरे कर रहे थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنبَاء الْغَيْبِ (अन्बा उल-ग़ैब): ग़ैब (परोक्ष) की ख़बरें, वे बातें जो किसी इंसान को बिना वह्य (प्रकाशना) के नहीं मालूम हो सकतीं।
  • نُوحِيهِ (नूहीहि): हम तुम्हारी ओर वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं।
  • أَجْمَعُوا أَمْرَهُمْ (अज्मऊ अम्रहुम): उन्होंने अपना मामला पक्का कर लिया, यानी यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के ख़िलाफ़ साज़िश का पूरा इरादा कर लिया।
  • يَمْكُرُونَ (यम्कुरून): वे चालें चल रहे थे, धोखा और साज़िश कर रहे थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! यह क़िस्सा जो आपको सुनाया गया है—हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का पूरा वाक़िया, उनके भाइयों की साज़िशें, उनका कुएँ में डाला जाना, मिस्र में उनका उठना, और आख़िरकार उनका अपने परिवार से मिलना—यह सब ग़ैब की ख़बरें हैं। यानी ऐसी बातें जो किसी इंसान को अपने ज्ञान या तजुर्बे से हासिल नहीं हो सकतीं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उस वक़्त मौजूद नहीं थे जब यूसुफ़ के भाइयों ने अपना मामला पक्का किया, यानी उन्होंने आपस में मशविरा करके तय किया कि यूसुफ़ को कुएँ में डाल देंगे, और वे उस वक़्त अपनी चालें चल रहे थे—कभी अपने बाप से झूठ बोलते, कभी यूसुफ़ को धोखा देते, कभी अपने किए पर पछतावे का नाटक करते।

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) न तो उनके पास थे, न किसी किताब में यह क़िस्सा पढ़ा था, न किसी से सुना था। फिर भी आपको यह सब कुछ ऐसे बताया गया जैसे आपने अपनी आँखों से देखा हो। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि आप अल्लाह के सच्चे रसूल हैं, और यह क़ुरआन अल्लाह ही की भेजी हुई किताब है। क्योंकि यह ज्ञान किसी इंसान को नहीं दिया जा सकता, सिवाय उसके जो अल्लाह की तरफ़ से वह्य (प्रकाशना) पाए।


दावत और नसीहत (उपदेश):

ऐ अल्लाह के बंदो! ज़रा सोचो—अल्लाह तआला ने अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वो ख़बरें दीं जो किसी को नहीं मालूम थीं। यही अल्लाह का तरीक़ा है—वह अपने चुने हुए बंदों को ग़ैब की बातें सिखाता है। और आज यही क़ुरआन हमारे पास मौजूद है, जिसमें हर क़िस्सा, हर नसीहत, हर हिदायत मौजूद है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की किताब पर भरोसा रखें, क्योंकि यह सिर्फ़ इंसानी कलाम नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। और जिस तरह यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की साज़िशों के बावजूद अल्लाह ने उन्हें बुलंदी दी, उसी तरह अगर हम अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी किताब पर अमल करें, तो अल्लाह हमारे हालात भी बदल सकता है।

याद रखिए—अल्लाह हर चाल को जानता है, हर साज़िश को देखता है, और वह अपने नेक बंदों की मदद ज़रूर करता है। यह क़िस्सा हमें सब्र और भरोसे की तालीम देता है—जब सब कुछ उल्टा लगे, तो समझ लीजिए कि अल्लाह की योजना कुछ और ही है, और वही सबसे बेहतर है।



📜 आयत 100-104 — यूसुफ

100وَرَفَعَ أَبَوَيْهِ عَلَى الْعَرْشِ وَخَرُّوا لَهُ سُجَّدًا ۖ وَقَالَ يَا أَبَتِ هَٰذَا تَأْوِيلُ رُؤْيَايَ مِن قَبْلُ قَدْ جَعَلَهَا رَبِّي حَقًّا ۖ وَقَدْ أَحْسَنَ بِي إِذْ أَخْرَجَنِي مِنَ السِّجْنِ وَجَاءَ بِكُم مِّنَ الْبَدْوِ مِن بَعْدِ أَن نَّزَغَ الشَّيْطَانُ بَيْنِي وَبَيْنَ إِخْوَتِي ۚ إِنَّ رَبِّي لَطِيفٌ لِّمَا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ
(ग़रज़) पहुँचकर यूसुफ ने अपने माँ बाप को तख्त पर बिठाया और सब के सब यूसुफ की ताज़ीम के वास्ते उनके सामने सजदे में गिर पड़े (उस वक्त) यूसुफ ने कहा ऐ अब्बा ये ताबीर है मेरे उस पहले ख्वाब की कि मेरे परवरदिगार ने उसे सच कर दिखाया बेशक उसने मेरे साथ एहसान किया जब उसने मुझे क़ैद ख़ाने से निकाला और बावजूद कि मुझ में और मेरे भाईयों में शैतान ने फसाद डाल दिया था उसके बाद भी आप लोगों को गाँव से (शहर में) ले आया (और मुझसे मिला दिया) बेशक मेरा परवरदिगार जो कुछ करता है उसकी तद्बीर खूब जानता है बेशक वह बड़ा वाकिफकार हकीम है
101۞ رَبِّ قَدْ آتَيْتَنِي مِنَ الْمُلْكِ وَعَلَّمْتَنِي مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ ۚ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَنتَ وَلِيِّي فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ تَوَفَّنِي مُسْلِمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ
(उसके बाद यूसुफ ने दुआ की ऐ परवरदिगार तूने मुझे मुल्क भी अता फरमाया और मुझे ख्वाब की बातों की ताबीर भी सिखाई ऐ आसमान और ज़मीन के पैदा करने वाले तू ही मेरा मालिक सरपरस्त है दुनिया में भी और आख़िरत में भी तू मुझे (दुनिया से) मुसलमान उठाये और मुझे नेको कारों में शामिल फरमा
102ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۖ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ أَجْمَعُوا أَمْرَهُمْ وَهُمْ يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) ये किस्सा ग़ैब की ख़बरों में से है जिसे हम तुम्हारे पास वही के ज़रिए भेजते हैं (और तुम्हें मालूम होता है वरना जिस वक्त यूसुफ के भाई बाहम अपने काम का मशवरा कर रहे थे और (हलाक की) तदबीरे कर रहे थे
103وَمَا أَكْثَرُ النَّاسِ وَلَوْ حَرَصْتَ بِمُؤْمِنِينَ
तुम उनके पास मौजूद न थे और कितने ही चाहो मगर बहुतेरे लोग ईमान लाने वाले नहीं हैं
104وَمَا تَسْأَلُهُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
हालॉकि तुम उनसे (तबलीगे रिसालत का) कोई सिला नहीं मॉगते और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन के वास्ते नसीहत (ही नसीहत) है
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
102आयत

अनुवाद — यूसुफ 102

सूरा यूसुफ आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ये किस्सा ग़ैब की ख़बरों में से है…

सूरा आयत 102/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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