यूसुफ · 89/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالَ هَلْ عَلِمْتُم مَّا فَعَلْتُم بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ إِذْ أَنتُمْ جَاهِلُونَ ۝٨٩
Qaala hal `alimtum maa fa`altum bi Yoosufa wa akheehi iz antum jaahiloon
📖 हिंदी अर्थ
(अब तो यूसुफ से न रहा गया) कहा तुम्हें कुछ मालूम है कि जब तुम जाहिल हो रहे थे तो तुम ने यूसुफ और उसके भाई के साथ क्या क्या सुलूक किए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • هَلْ عَلِمْتُمْ: क्या तुम जानते हो / क्या तुम्हें पता है
  • مَا فَعَلْتُم: जो कुछ तुमने किया
  • بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ: यूसुफ़ और उसके भाई के साथ
  • إِذْ أَنتُمْ جَاهِلُونَ: जब तुम अज्ञानी थे (अर्थात् तुम्हें अपने किए की बुराई का ज्ञान नहीं था)

तफ़सीर:

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों की यह बात सुनी कि वे अपने छोटे भाई (बिन्यामीन) के लिए कितने दुखी और व्याकुल हैं, और वे कह रहे हैं कि हमें उसके बिना रहा नहीं जाता, तो उनका दिल पिघल गया और उन्होंने अपने भाइयों पर दया की। उन्होंने अपनी पहचान प्रकट करने का निर्णय लिया और उनसे कहा: "क्या तुम्हें याद है कि तुमने यूसुफ़ और उसके भाई के साथ क्या किया था?" उन्होंने उन्हें उस समय की याद दिलाई जब उन्होंने यूसुफ़ को कुएँ में डाला था और उसके भाई को उससे अलग कर दिया था, और यह सब उन्होंने उस समय किया जब वे अज्ञानता में थे — अर्थात् उन्हें अपने इस कृत्य की बुराई और उसके दुष्परिणाम का ज्ञान नहीं था। यह कहकर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें उनके अतीत के कुकर्म की याद दिलाई, लेकिन उन्हें बुरा भला नहीं कहा, बल्कि उनकी अज्ञानता का हवाला देकर उनके बहाने को स्वीकार किया और उन्हें उनके किए पर शर्मिंदा किया, ताकि वे स्वयं अपनी गलती का एहसास करें और तौबा करें।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि क्षमा और दया का भाव रखना चाहिए। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के साथ हुए अत्याचार के बावजूद उन्हें अपमानित नहीं किया, बल्कि नर्मी और दया से उन्हें उनकी गलती का एहसास कराया।
  2. अज्ञानता को एक बहाना बनाया जा सकता है, और यह सिखाता है कि इंसान को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और दूसरों की गलतियों पर विचार करते समय उनकी परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी को उसकी गलती याद दिलाएँ, तो उसे शर्मिंदा करने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुधारने और उसकी भलाई के लिए याद दिलाएँ।
  4. इस्लाम में रिश्तों की अहमियत है — चाहे कितनी ही बड़ी नाराज़गी क्यों न हो, रिश्तों को जोड़ने और माफ़ करने की कोशिश करनी चाहिए। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों को माफ़ कर दिया और उनके साथ भलाई की, जो हमारे लिए एक आदर्श है।
  5. यह आयत यह भी बताती है कि अल्लाह तआला अपने नबी को ऐसा उच्च चरित्र प्रदान करता है जो दुश्मनों के साथ भी नेकी करता है, और यही इस्लाम की रूह है — माफ़ करना, दया करना और भलाई करना।
🎧 सुनें

📜 आयत 87-91 — यूसुफ

87يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ
ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद न हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता
88فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَيْهِ قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ مَسَّنَا وَأَهْلَنَا الضُّرُّ وَجِئْنَا بِبِضَاعَةٍ مُّزْجَاةٍ فَأَوْفِ لَنَا الْكَيْلَ وَتَصَدَّقْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّ اللَّهَ يَجْزِي الْمُتَصَدِّقِينَ
फिर जब ये लोग यूसुफ के पास गए तो (बहुत गिड़गिड़ाकर) अर्ज़ की कि ऐ अज़ीज़ हमको और हमारे (सारे) कुनबे को कहत की वजह से बड़ी तकलीफ हो रही है और हम कुछ थोड़ी सी पूंजी लेकर आए हैं तो हम को (उसके ऐवज़ पर पूरा ग़ल्ला दिलवा दीजिए और (क़ीमत ही पर नहीं) हम को (अपना) सदक़ा खैरात दीजिए इसमें तो शक़ नहीं कि ख़ुदा सदक़ा ख़ैरात देने वालों को जजाए ख़ैर देता है
89قَالَ هَلْ عَلِمْتُم مَّا فَعَلْتُم بِيُوسُفَ وَأَخِيهِ إِذْ أَنتُمْ جَاهِلُونَ
(अब तो यूसुफ से न रहा गया) कहा तुम्हें कुछ मालूम है कि जब तुम जाहिल हो रहे थे तो तुम ने यूसुफ और उसके भाई के साथ क्या क्या सुलूक किए
90قَالُوا أَإِنَّكَ لَأَنتَ يُوسُفُ ۖ قَالَ أَنَا يُوسُفُ وَهَٰذَا أَخِي ۖ قَدْ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا ۖ إِنَّهُ مَن يَتَّقِ وَيَصْبِرْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
(उस पर वह लोग चौके) और कहने लगे (हाए) क्या तुम ही यूसुफ हो, यूसुफ ने कहा हाँ मै ही यूसुफ हूँ और यह मेरा भाई है बेशक ख़ुदा ने मुझ पर अपना फज़ल व (करम) किया है क्या इसमें शक़ नहीं कि जो शख़्श (उससे) डरता है (और मुसीबत में) सब्र करे तो ख़ुदा हरगिज़ (ऐसे नेको कारों का) अज्र बरबाद नहीं करता
91قَالُوا تَاللَّهِ لَقَدْ آثَرَكَ اللَّهُ عَلَيْنَا وَإِن كُنَّا لَخَاطِئِينَ
वह लोग कहने लगे ख़ुदा की क़सम तुम्हें ख़ुदा ने यक़ीनन हम पर फज़ीलत दी है और बेशक हम ही यक़ीनन (अज़सरतापा) ख़तावार थे
यूसुफकुरान सूची
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अनुवाद — यूसुफ 89

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Tuesday, August 18, 2026

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