अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَنَّ: एहसान किया, कृपा की।
- يَتَّقِ: अल्लाह का भय रखे, उसके आदेशों का पालन करे और उसकी मनाही से बचे।
- يَصْبِرْ: धैर्य रखे, मुसीबतों और कठिनाइयों पर सब्र करे।
- أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वालों का बदला, भलाई करने वालों का प्रतिफल।
तफसीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों के सामने अपनी पहचान प्रकट की, तो वे अत्यधिक आश्चर्य और शर्मिंदगी में डूब गए। उन्होंने हैरानी से पूछा: "क्या सच में तुम ही यूसुफ़ हो?" यह प्रश्न उनके विस्मय और अपने किए पर पछतावे को दर्शाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने स्पष्ट और दृढ़ता से उत्तर दिया: "हाँ, मैं यूसुफ़ हूँ, और यह मेरा भाई (बिन्यामीन) है।" उन्होंने इस अवसर पर सारा श्रेय अल्लाह को दिया और कहा कि अल्लाह ने हम पर बड़ी कृपा की है—हमें अलगाव के बाद फिर से मिला दिया, हमारी मुश्किलें दूर कीं और हमें ऊँचा स्थान प्रदान किया।
फिर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने एक महत्वपूर्ण शिक्षा दी: जो व्यक्ति अल्लाह का भय रखता है (उसके आदेशों का पालन करता है और उसकी मनाही से बचता है) और मुसीबतों पर धैर्य रखता है, तो अल्लाह उसके अच्छे कर्मों का बदला कभी व्यर्थ नहीं करता। अल्लाह नेकी करने वालों को उनका पूरा प्रतिफल अवश्य देता है, चाहे उन्हें कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े। यहाँ "मुहसिन" (नेकी करने वाला) से वह व्यक्ति मुराद है जो अल्लाह की इबादत इस तरह करे जैसे वह उसे देख रहा है, और अपने सभी कार्यों में भलाई और सुंदरता का ध्यान रखे।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- धैर्य और तक़वा (अल्लाह का भय) सफलता की कुंजी है: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की कहानी हमें सिखाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर इंसान अल्लाह से डरे और सब्र करे, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। उन्होंने कुएँ में डाले जाने, गुलामी, और जेल की कठिनाइयाँ सहन कीं, और अंत में अल्लाह ने उन्हें सर्वोच्च पद दिया।
- अल्लाह की कृपा पर भरोसा: जब इंसान अपनी सारी स्थितियों में अल्लाह की मदद और कृपा को याद रखता है, तो उसका दिल सुकून पाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी चतुराई को नहीं, बल्कि अल्लाह की मेहरबानी को दिया।
- क्षमा और उदारता: इस आयत से पहले यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाइयों को क्षमा कर दिया था। यह सिखाता है कि मुसलमान को दूसरों की गलतियों को माफ करना चाहिए और बदला नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अल्लाह क्षमा करने वालों से प्रेम करता है।
- अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते: यह आयत मुसलमानों को आश्वस्त करती है कि उनकी नेकियाँ और अच्छे काम अल्लाह की नज़र में हैं। चाहे दुनिया में उन्हें पहचान न मिले, लेकिन अल्लाह उन्हें पूरा बदला देगा—इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
- परिवार और रिश्तों की अहमियत: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को पहचानते हुए उसे अपने साथ बिठाया और उसका सम्मान किया। यह सिखाता है कि रिश्तों को निभाना और परिवार के साथ प्रेम करना इस्लाम का हिस्सा है, चाहे पहले कितनी भी दूरियाँ क्यों न रही हों।
📜 आयत 88-92 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 90
सूरा यूसुफ आयत 90 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस पर वह लोग चौके) और कहने लगे (हाए) क्या…सूरा आयत 90/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 88–92. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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