अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمُنُّ – एहसान करता है, विशेष कृपा प्रदान करता है
- سُلْطَانٍ – स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार, खुला हुआ तर्क
- يَتَوَكَّلْ – भरोसा करे, अपने सारे मामले सौंप दे
तफ़सीर:
जब अल्लाह के रसूलों ने अपनी क़ौम से यह सुना कि उन्होंने कहा, "तुम हमारे जैसे ही इंसान हो, हम तुम्हें कैसे मान लें?" तो रसूलों ने बड़ी ही स्पष्टता और विनम्रता के साथ उन्हें जवाब दिया। उन्होंने कहा: "हाँ, यह बिल्कुल सच है कि हम भी तुम्हारे जैसे ही इंसान हैं। हम कोई फ़रिश्ते नहीं हैं और न ही हमारे पास कोई ऐसी ताक़त है जो तुम्हारे पास नहीं। लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी विशेष कृपा से नवाज़ता है और उसे अपना पैग़म्बर बनाकर लोगों की हिदायत के लिए भेजता है।"
यह कोई बड़ाई या ऊँचाई की बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का फ़ज़ल और एहसान है जो वह अपनी इच्छा से जिसे चाहता है देता है। रसूलों ने यह भी साफ़ कहा कि जो चमत्कार और निशानियाँ तुम हमसे माँग रहे हो, वे हमारे बस में नहीं हैं। हम अपनी मर्ज़ी से कोई मो'जिज़ा नहीं दिखा सकते। यह सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म और उसकी इजाज़त से ही होता है। अल्लाह ही है जो अपने हिकमत के मुताबिक़ हर नबी को उस वक़्त और उस जगह के लिए उचित निशानियाँ देता है।
इसके बाद रसूलों ने एक बहुत बड़ी बात कही जो हर मोमिन के लिए नसीहत है। उन्होंने कहा: "और अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।" यानी जो लोग सच्चे मोमिन हैं, वे अपने सारे मामलों में, अपनी हर ज़रूरत में, अपनी हर मुश्किल में सिर्फ़ अल्लाह पर ही भरोसा करते हैं। वे जानते हैं कि सारी ताक़त अल्लाह के हाथ में है, और जिसे अल्लाह चाहे वही होता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि नबी और रसूल भी इंसान ही थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें अपनी कृपा से ख़ास मरतबा दिया। इसलिए हमें उनकी पैरवी करनी चाहिए और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए। साथ ही, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारी कामयाबी और हिदायत का राज़ अल्लाह पर भरोसा करने में है। जो इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता और उसकी हर मुश्किल का हल निकालता है।
यही वह प्यारा पैग़ाम है जो आज भी हर मोमिन के दिल को रोशनी देता है — कि हम इंसान हैं, कमज़ोर हैं, लेकिन जब हम अपने रब पर भरोसा करते हैं, तो हमें एक ऐसी ताक़त मिलती है जो दुनिया की हर ताक़त से बड़ी है।
📜 आयत 9-13 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 11
सूरा इब्राहीम आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके पैग़म्बरों ने उनके जवाब में कहा कि इसमें शक़…सूरा आयत 11/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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