इब्राहीम · 12/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा इब्राहीम
وَمَا لَنَا أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اللَّهِ وَقَدْ هَدَانَا سُبُلَنَا ۚ وَلَنَصْبِرَنَّ عَلَىٰ مَا آذَيْتُمُونَا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُونَ ۝١٢
Wa maa lanaa allaa natawakkala `alal laahi wa qad hadaanaa subulanaa; wa lanasbiranna `alaa maaa aazaitumoonaa; wa `alal laahi falyatawakkalil mutawakkiloon
📖 हिंदी अर्थ
और हमें (आख़िर) क्या है कि हम उस पर भरोसा न करें हालॉकि हमे (निजात की) आसान राहें दिखाई और जो तूने अज़ियतें हमें पहुँचाइ (उन पर हमने सब्र किया और आइन्दा भी सब्र करेगें और तवक्कल भरोसा करने वालो को ख़ुदा ही पर तवक्कल करना चाहिए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَتَوَكَّلَ (हम भरोसा करें): अल्लाह पर पूर्ण भरोसा और एतिमाद करना, उसी पर अपने सारे मामलों को सौंप देना।
  • سُبُلَنَا (हमारे रास्ते): हिदायत के रास्ते, यानी नेकी और नजात (मुक्ति) के स्पष्ट मार्ग।
  • آذَيْتُمُونَا (तुमने हमें सताया): तकलीफ़ देना, बुरा कहना, मज़ाक उड़ाना, या शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों का क़ौल (कथन) है जिन्होंने अल्लाह के दीन को क़बूल किया और उसके रसूलों पर ईमान लाए। वे कह रहे हैं: "हमें कौन-सी रुकावट या बहाना है कि हम अल्लाह पर भरोसा न करें? जबकि उसी ने हमें सीधा रास्ता दिखाया है, हमें ज़ुल्म और गुमराही से निकालकर नजात और हिदायत के रास्ते पर चलाया है। जिसने हमें यह रास्ता दिखाया, क्या हम उस पर भरोसा न करें? बिल्कुल करें!"

फिर वे आगे कहते हैं: "और हम तुम्हारे द्वारा पहुँचाई जाने वाली तकलीफ़ों पर ज़रूर सब्र करेंगे। तुम चाहे हमें बुरा कहो, हमारा मज़ाक उड़ाओ, हमें शारीरिक या मानसिक रूप से सताओ, हम अपने दीन पर क़ायम रहेंगे और सब्र का दामन नहीं छोड़ेंगे। क्योंकि हमें यक़ीन है कि अल्लाह हमारे साथ है और वही हमारी मदद करेगा।"

आख़िर में वे यह घोषणा करते हैं: "और अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए उन लोगों को जो सच्चे मोमिन हैं। जो लोग सच्चे मुतवक्किल (भरोसा करने वाले) हैं, उनका भरोसा सिर्फ अल्लाह पर होता है, किसी इंसान, किसी ताक़त या किसी सामान्य वजह पर नहीं। वे जानते हैं कि जीत और कामयाबी अल्लाह के हाथ में है, इसलिए वे उसी पर टिके रहते हैं।"


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह हमें हिदायत देता है, तो हमें उस पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जीवन में मुश्किलें और तकलीफ़ें आएँगी, लेकिन मोमिन वही है जो सब्र करे और अल्लाह पर टिका रहे। याद रखिए, जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उनके दुश्मनों के मुक़ाबले में उनकी मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। आज हमें भी उसी भरोसे की ज़रूरत है — अपने कामों में, अपने रिश्तों में, अपनी पढ़ाई में, हर जगह अल्लाह पर भरोसा करें और सब्र के साथ आगे बढ़ें। यही सच्चे मोमिन की पहचान है, और यही रास्ता हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 10-14 — सूरा इब्राहीम

10۞ قَالَتْ رُسُلُهُمْ أَفِي اللَّهِ شَكٌّ فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ يَدْعُوكُمْ لِيَغْفِرَ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرَكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ قَالُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا تُرِيدُونَ أَن تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُنَا فَأْتُونَا بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
(तब) उनके पैग़म्बरों ने (उनसे) कहा क्या तुम को ख़ुदा के बारे में शक़ है जो सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (और) वह तुमको अपनी तरफ बुलाता भी है तो इसलिए कि तुम्हारे गुनाह माफ कर दे और एक वक्त मुक़र्रर तक तुमको (दुनिया में चैन से) रहने दे वह लोग बोल उठे कि तुम भी बस हमारे ही से आदमी हो (अच्छा) अब समझे तुम ये चाहते हो कि जिन माबूदों की हमारे बाप दादा परसतिश करते थे तुम हमको उनसे बाज़ रखो अच्छा अगर तुम सच्चे हो तो कोई साफ खुला हुआ सरीही मौजिज़ा हमे ला दिखाओ
11قَالَتْ لَهُمْ رُسُلُهُمْ إِن نَّحْنُ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۖ وَمَا كَانَ لَنَا أَن نَّأْتِيَكُم بِسُلْطَانٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
उनके पैग़म्बरों ने उनके जवाब में कहा कि इसमें शक़ नहीं कि हम भी तुम्हारे ही से आदमी हैं मगर ख़ुदा अपने बन्दों में जिस पर चाहता है अपना फज़ल (व करम) करता है (और) रिसालत अता करता है और हमारे एख्तियार मे ये बात नही कि बे हुक्मे ख़ुदा (तुम्हारी फरमाइश के मुवाफिक़) हम कोई मौजिज़ा तुम्हारे सामने ला सकें और ख़ुदा ही पर सब ईमानदारों को भरोसा रखना चाहिए
12وَمَا لَنَا أَلَّا نَتَوَكَّلَ عَلَى اللَّهِ وَقَدْ هَدَانَا سُبُلَنَا ۚ وَلَنَصْبِرَنَّ عَلَىٰ مَا آذَيْتُمُونَا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُتَوَكِّلُونَ
और हमें (आख़िर) क्या है कि हम उस पर भरोसा न करें हालॉकि हमे (निजात की) आसान राहें दिखाई और जो तूने अज़ियतें हमें पहुँचाइ (उन पर हमने सब्र किया और आइन्दा भी सब्र करेगें और तवक्कल भरोसा करने वालो को ख़ुदा ही पर तवक्कल करना चाहिए
13وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُم مِّنْ أَرْضِنَا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَا ۖ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों नें कुफ्र एख्तियार किया था अपने (वक्त क़े) पैग़म्बरों से कहने लगे हम तो तुमको अपनी सरज़मीन से ज़रुर निकाल बाहर कर देगें यहाँ तक कि तुम फिर हमारे मज़हब की तरफ पलट आओ-तो उनके परवरदिगार ने उनकी तरफ वही भेजी कि तुम घबराओं नहीं हम उन सरकश लोगों को ज़रुर बर्बाद करेगें
14وَلَنُسْكِنَنَّكُمُ الْأَرْضَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِي وَخَافَ وَعِيدِ
और उनकी हलाकत के बाद ज़रुर तुम्ही को इस सरज़मीन में बसाएगें ये (वायदा) महज़ उस शख़्श से जो हमारी बारगाह में (आमाल की जवाब देही में) खड़े होने से डरे
इब्राहीमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — इब्राहीम 12

सूरा इब्राहीम आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमें (आख़िर) क्या है कि हम उस पर भरोसा…

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Saturday, October 3, 2026

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