Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فُتِنُوا: उन्हें परीक्षा में डाला गया, उन्हें सताया गया और धर्म से बहकाने की कोशिश की गई।
- هَاجَرُوا: अपने घर और वतन को छोड़कर अल्लाह के रास्ते में प्रवास किया।
- جَاهَدُوا: अल्लाह के रास्ते में पूरी ताकत से संघर्ष किया।
- صَبَرُوا: कष्टों और मुश्किलों पर धैर्य रखा।
तफसीर:
फिर (ऐ नबी!) आपका रब उन लोगों के लिए, जो परीक्षा में डाले जाने के बाद (अपने वतन से) हिजरत कर गए, फिर (अल्लाह के रास्ते में) जिहाद किया और (हर मुश्किल पर) धैर्य रखा — बेशक आपका रब उस (परीक्षा) के बाद बड़ा क्षमाशील और अत्यंत दयावान है।
यह आयत उन कमज़ोर मुसलमानों के बारे में है जो मक्का में मुशरिकों के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार हुए। उन्हें सताया गया और धर्म से फेरने के लिए बहुत कोशिशें की गईं। कुछ कमज़ोर लोगों से ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा कहलवा लिया गया, हालाँकि उनके दिल ईमान पर जमे हुए थे। जब उन्हें मौका मिला तो वे मक्का छोड़कर मदीना हिजरत कर गए। फिर उन्होंने अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया और उसकी मुश्किलों, भूख-प्यास, युद्ध और तकलीफों पर धैर्य रखा। अल्लाह तआला ने उन्हें माफ़ कर दिया और उन पर रहम फरमाया, क्योंकि उन्होंने कुफ्र का कलिमा केवल मजबूरी में कहा था, दिल से नहीं। यह अल्लाह की बहुत बड़ी कृपा है कि वह अपने बंदों की मजबूरी और विवशता को जानता है और उसके बाद भी उन्हें क्षमा कर देता है।
फायदे:
- अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह उनकी मजबूरियों को समझता है और सच्चे दिल से तौबा करने वालों को माफ कर देता है।
- हिजरत और जिहाद अल्लाह की राह में बड़ी इबादतें हैं — जो व्यक्ति अपने वतन, घर-बार और रिश्तेदारों को अल्लाह की राह में छोड़ देता है, अल्लाह उसे जन्नत और अपनी रहमत से नवाज़ता है।
- धैर्य और सब्र की बहुत बड़ी फज़ीलत है — मुश्किलों पर सब्र करने वालों के लिए अल्लाह की माफ़ी और रहमत का वादा है।
- इस आयत से पता चलता है कि इंसान से गलती हो जाए, यहाँ तक कि ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा भी कहना पड़ जाए, लेकिन अगर उसका दिल ईमान पर साबित रहे और वह सच्ची तौबा करके अल्लाह की राह में निकल पड़े, तो अल्लाह उसे माफ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत की बहुत बड़ी खुशखबरी है।
- इस्लाम में मजबूरी की गुंजाइश है — जो व्यक्ति जान के खतरे के डर से ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा कह दे, लेकिन दिल से मुसलमान रहे, तो उस पर गुनाह नहीं है।
📜 आयत 108-112 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 110
सूरा अन-नहल आयत 110 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को…सूरा आयत 110/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 108–112. हिंदी अर्थ: اردو.
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Friday, October 2, 2026
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