अन-नहल · 110/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُوا مِن بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١١٠
Summa inna Rabbaka lillazeena haajaroo mim ba`dimaa futinoo summma jaahadoo wa sabaroo inna Rabbaka mim ba`dihaa la Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فُتِنُوا: उन्हें परीक्षा में डाला गया, उन्हें सताया गया और धर्म से बहकाने की कोशिश की गई।
  • هَاجَرُوا: अपने घर और वतन को छोड़कर अल्लाह के रास्ते में प्रवास किया।
  • جَاهَدُوا: अल्लाह के रास्ते में पूरी ताकत से संघर्ष किया।
  • صَبَرُوا: कष्टों और मुश्किलों पर धैर्य रखा।

तफसीर:

फिर (ऐ नबी!) आपका रब उन लोगों के लिए, जो परीक्षा में डाले जाने के बाद (अपने वतन से) हिजरत कर गए, फिर (अल्लाह के रास्ते में) जिहाद किया और (हर मुश्किल पर) धैर्य रखा — बेशक आपका रब उस (परीक्षा) के बाद बड़ा क्षमाशील और अत्यंत दयावान है।

यह आयत उन कमज़ोर मुसलमानों के बारे में है जो मक्का में मुशरिकों के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार हुए। उन्हें सताया गया और धर्म से फेरने के लिए बहुत कोशिशें की गईं। कुछ कमज़ोर लोगों से ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा कहलवा लिया गया, हालाँकि उनके दिल ईमान पर जमे हुए थे। जब उन्हें मौका मिला तो वे मक्का छोड़कर मदीना हिजरत कर गए। फिर उन्होंने अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया और उसकी मुश्किलों, भूख-प्यास, युद्ध और तकलीफों पर धैर्य रखा। अल्लाह तआला ने उन्हें माफ़ कर दिया और उन पर रहम फरमाया, क्योंकि उन्होंने कुफ्र का कलिमा केवल मजबूरी में कहा था, दिल से नहीं। यह अल्लाह की बहुत बड़ी कृपा है कि वह अपने बंदों की मजबूरी और विवशता को जानता है और उसके बाद भी उन्हें क्षमा कर देता है।

फायदे:

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह उनकी मजबूरियों को समझता है और सच्चे दिल से तौबा करने वालों को माफ कर देता है।
  2. हिजरत और जिहाद अल्लाह की राह में बड़ी इबादतें हैं — जो व्यक्ति अपने वतन, घर-बार और रिश्तेदारों को अल्लाह की राह में छोड़ देता है, अल्लाह उसे जन्नत और अपनी रहमत से नवाज़ता है।
  3. धैर्य और सब्र की बहुत बड़ी फज़ीलत है — मुश्किलों पर सब्र करने वालों के लिए अल्लाह की माफ़ी और रहमत का वादा है।
  4. इस आयत से पता चलता है कि इंसान से गलती हो जाए, यहाँ तक कि ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा भी कहना पड़ जाए, लेकिन अगर उसका दिल ईमान पर साबित रहे और वह सच्ची तौबा करके अल्लाह की राह में निकल पड़े, तो अल्लाह उसे माफ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत की बहुत बड़ी खुशखबरी है।
  5. इस्लाम में मजबूरी की गुंजाइश है — जो व्यक्ति जान के खतरे के डर से ज़बरदस्ती कुफ्र का कलिमा कह दे, लेकिन दिल से मुसलमान रहे, तो उस पर गुनाह नहीं है।


📜 आयत 108-112 — अन-नहल

108أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों पर और उनकी ऑंखों पर खुदा ने अलामात मुक़र्रर कर दी है
109لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
110ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُوا مِن بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
111۞ يَوْمَ تَأْتِي كُلُّ نَفْسٍ تُجَادِلُ عَن نَّفْسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (उस दिन को याद) करो जिस दिन हर शख़्श अपनी ज़ात के बारे में झगड़ने को आ मौजूद होगा
112وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ آمِنَةً مُّطْمَئِنَّةً يَأْتِيهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِّن كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِأَنْعُمِ اللَّهِ فَأَذَاقَهَا اللَّهُ لِبَاسَ الْجُوعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
और हर शख़्श को जो कुछ भी उसने किया था उसका पूरा पूरा बदला मिलेगा और उन पर किसी तरह का जुल्म न किया जाएगा ख़ुदा ने एक गाँव की मसल बयान फरमाई जिसके रहने वाले हर तरह के चैन व इत्मेनान में थे हर तरफ से बाफराग़त (बहुत ज्यादा) उनकी रोज़ी उनके पास आई थी फिर उन लोगों ने ख़ुदा की नूअमतों की नाशुक्री की तो ख़ुदा ने उनकी करतूतों की बदौलत उनको मज़ा चखा दिया
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अनुवाद — अन-नहल 110

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Tuesday, August 18, 2026

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