अन-नहल · 109/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝١٠٩
Laa jarama annnahum fil Aakhirati humul khassiroon
📖 हिंदी अर्थ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا جَرَمَ: इसमें कोई संदेह नहीं, निश्चित रूप से, यह सत्य है।
  • الْخَاسِرُونَ: घाटे में रहने वाले, नुकसान उठाने वाले, अपने आपको तबाह करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इसमें कोई संदेह नहीं कि ये लोग जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र (अविश्वास) का रास्ता अपनाया और जानबूझकर सत्य को ठुकरा दिया, आख़िरत (परलोक) के दिन वही सबसे बड़े घाटे में होंगे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के बहुमूल्य अवसरों को खो दिया, अपने ईमान को गंवा दिया, और अपने आपको जहन्नम (नरक) की आग का हक़दार बना लिया। उनका नुकसान यह है कि उन्होंने उस जन्नत (स्वर्ग) को खो दिया जो उनके लिए तैयार थी, यदि वे अपने ईमान पर स्थिर रहते। वे अपने आप को धोखे में डालकर ऐसे कामों में लगे रहे जिनका अंजाम सिर्फ़ अज़ाब (यातना) और हलाकत (विनाश) है। यह घाटा कोई साधारण घाटा नहीं, बल्कि ऐसा घाटा है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती—उन्होंने अपनी आत्माओं को बर्बाद कर दिया और हमेशा के लिए अल्लाह की रहमत से महरूम हो गए।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान (विश्वास) सबसे कीमती नेमत (वरदान) है, और इसे खोना सबसे बड़ा नुकसान है। जो व्यक्ति ईमान पाकर उसे छोड़ देता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में असफल रहता है।
  2. यह हमें आगाह करती है कि दुनिया की चमक-दमक और अस्थायी सुखों के लिए अपने दीन (धर्म) को न बेचें, क्योंकि आख़िरत की सफलता ही असली सफलता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को अपने ईमान पर स्थिर रहने की तरग़ीब (प्रेरणा) देती है और उन्हें याद दिलाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है—जो लोग सत्य पर डटे रहेंगे, उनके लिए जन्नत है, और जो उसे ठुकराएँगे, उनके लिए घाटा और अज़ाब है।
  4. यह हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम में ईमान के बाद उस पर क़ायम रहना बहुत ज़रूरी है; ईमान लाना शुरुआत है, और उस पर साबित क़दम रहना ही कामयाबी की कुंजी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 107-111 — अन-नहल

107ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ
ये इस वजह से कि उन लोगों ने दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी और इस वजह से की ख़ुदा काफिरों को हरगिज़ मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
108أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों पर और उनकी ऑंखों पर खुदा ने अलामात मुक़र्रर कर दी है
109لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
110ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُوا مِن بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
111۞ يَوْمَ تَأْتِي كُلُّ نَفْسٍ تُجَادِلُ عَن نَّفْسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (उस दिन को याद) करो जिस दिन हर शख़्श अपनी ज़ात के बारे में झगड़ने को आ मौजूद होगा
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अनुवाद — अन-नहल 109

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Tuesday, August 18, 2026

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