अन-नहल · 111/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
۞ يَوْمَ تَأْتِي كُلُّ نَفْسٍ تُجَادِلُ عَن نَّفْسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ۝١١١
Yawma taatee kullu nafsin tujaadilu `an nafsihaa wa tuwaffaa kullu nafsim maa `amilat wa hum laa yuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
और (उस दिन को याद) करो जिस दिन हर शख़्श अपनी ज़ात के बारे में झगड़ने को आ मौजूद होगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُجَادِلُ: झगड़ा करना, बहस करना, अपनी सफाई पेश करना।
  • عَن نَّفْسِهَا: अपनी जान (स्वयं) की ओर से।
  • وَتُوَفَّىٰ: पूरा-पूरा दिया जाएगा, बदला चुका दिया जाएगा।
  • لَا يُظْلَمُونَ: उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप लोगों को उस दिन की याद दिलाइए जब हर व्यक्ति (क़यामत के दिन) आएगा और केवल अपनी ही रक्षा के लिए बहस करेगा। उस दिन हर इंसान अपनी ही फ़िक्र में होगा, वह किसी और की मदद नहीं कर सकेगा, न ही किसी और के लिए सिफ़ारिश करने की उसे फ़ुर्सत होगी। हर कोई अपने ही बचाव के लिए दलीलें पेश करेगा, चाहे वह दलीलें झूठी ही क्यों न हों।

उस दिन हर व्यक्ति को उसके किए हुए अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा। जिसने नेकी की होगी, उसे उसका पूरा सवाब मिलेगा, और जिसने गुनाह किए होंगे, उसे उसकी पूरी सज़ा मिलेगी। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा — न किसी की नेकियों में कमी की जाएगी, न किसी के गुनाहों में ज़्यादती की जाएगी। हर किस्म का इंसाफ़ उस दिन पूरी तरह से होगा।


फ़ायदे (सबक):

  1. आत्म-जवाबदेही: यह आयत हमें सिखाती है कि क़यामत के दिन हर इंसान अकेला होगा और उसे अपने ही कर्मों का हिसाब देना होगा। इसलिए हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए।
  2. अल्लाह का पूर्ण न्याय: अल्लाह तआला बिल्कुल न्यायपूर्ण है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। यह हमारे दिलों को तसल्ली देता है कि दुनिया में चाहे कितना भी ज़ुल्म हो, आख़िरत में हर इंसान को उसका सही हक़ मिलेगा।
  3. दुनिया की फ़िक्र से ऊपर उठना: जब हमें याद होगा कि एक दिन हमें अकेले अपने कर्मों का हिसाब देना है, तो हम दुनिया के झूठे झगड़ों, लालच और बेईमानी से बचेंगे और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाने की कोशिश करेंगे।
  4. रहमत की उम्मीद: यह आयत यह भी बताती है कि अल्लाह रहीम और करीम है — वह नेकियों का पूरा बदला देगा और गुनाहों में ज़्यादती नहीं करेगा। यह हमें तौबा करने और अल्लाह की रहमत से निराश न होने की तरग़ीब देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 109-113 — अन-नहल

109لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
110ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُوا مِن بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
111۞ يَوْمَ تَأْتِي كُلُّ نَفْسٍ تُجَادِلُ عَن نَّفْسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (उस दिन को याद) करो जिस दिन हर शख़्श अपनी ज़ात के बारे में झगड़ने को आ मौजूद होगा
112وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ آمِنَةً مُّطْمَئِنَّةً يَأْتِيهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِّن كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِأَنْعُمِ اللَّهِ فَأَذَاقَهَا اللَّهُ لِبَاسَ الْجُوعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
और हर शख़्श को जो कुछ भी उसने किया था उसका पूरा पूरा बदला मिलेगा और उन पर किसी तरह का जुल्म न किया जाएगा ख़ुदा ने एक गाँव की मसल बयान फरमाई जिसके रहने वाले हर तरह के चैन व इत्मेनान में थे हर तरफ से बाफराग़त (बहुत ज्यादा) उनकी रोज़ी उनके पास आई थी फिर उन लोगों ने ख़ुदा की नूअमतों की नाशुक्री की तो ख़ुदा ने उनकी करतूतों की बदौलत उनको मज़ा चखा दिया
113وَلَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مِّنْهُمْ فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
कि भूक और ख़ौफ को ओढ़ना (बिछौना) बना दिया और उन्हीं लोगों में का एक रसूल भी उनके पास आया तो उन्होंने उसे झुठलाया
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Tuesday, August 18, 2026

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