अन-नहल · 114/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
فَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا وَاشْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ ۝١١٤
Fakuloo mimmaa razaqa kumul laahu halaalan taiyibanw washkuroo ni`matal laahi in kuntum iyyaahu ta`budoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर अज़ाब (ख़ुदा) ने उन्हें ले डाला और वह ज़ालिम थे ही तो ख़ुदा ने जो कुछ तुम्हें हलाल तय्यब (ताहिर) रोज़ी दी है उसको (शौक़ से) खाओ और अगर तुम खुदा ही की परसतिश (का दावा करते हो)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَلَالًا طَيِّبًا: जो शरीयत की दृष्टि से वैध हो और स्वभावतः पवित्र एवं उत्तम हो।
  • وَاشْكُرُوا نِعْمَتَ اللهِ: अल्लाह की नेमतों का एहसान मानो, उसकी प्रशंसा करो और उसे उसी के बताए रास्ते पर इस्तेमाल करो।
  • إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ: यदि तुम सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करते हो और उसे अकेला पूजते हो।

तफसीर:

अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को हिदायत देता है कि वे उस रिज़्क़ (जीविका) में से खाएँ जो अल्लाह ने उन्हें दिया है, बशर्ते वह हलाल हो और पाक व साफ हो। यानी खाने-पीने की चीज़ें वैध हों, किसी हराम या नाजायज़ तरीके से कमाई न की गई हों, और वे चीज़ें स्वभावतः अच्छी व पवित्र हों — न अपवित्र, न नुकसानदेह, न नजिस।

इसके साथ ही अल्लाह ने यह भी सिखाया कि इन नेमतों को पाकर अल्लाह का शुक्र अदा करो। शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि दिल से अल्लाह का एहसान मानना, उसकी तारीफ करना, और उसकी दी हुई नेमतों को उसी की इबादत और उसकी रज़ा के कामों में खर्च करना भी शुक्र है। जो व्यक्ति अल्लाह की नेमत को पहचाने और उसे अल्लाह की मरज़ी के मुताबिक इस्तेमाल करे, वही सच्चा शुक्रगुज़ार है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "अगर तुम सचमुच अल्लाह की इबादत करते हो" — यानी अगर तुम्हारा दावा है कि तुम अल्लाह के बंदे हो और उसी की इबादत करते हो, तो इस दावे की सच्चाई का सबूत यही है कि तुम हलाल खाओ, हराम से बचो, और अल्लाह की नेमतों पर शुक्र अदा करो। क्योंकि जो बंदा सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करता है, वह उसके हुक्मों को मानता है और उसकी दी हुई चीज़ों को उसी की बताई हुई विधि के अनुसार इस्तेमाल करता है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से सीख मिलती है कि हलाल कमाई और हलाल खाना ईमान की निशानी है। जो व्यक्ति हराम से बचता है, वह अल्लाह का सच्चा बंदा है।
  2. अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल करना और उसे अल्लाह की रज़ा के कामों में लगाना शुक्र की असली सूरत है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि खाने-पीने में भी दीन का एहतिमाम (ध्यान) होना चाहिए — सिर्फ पेट भरना मकसद नहीं, बल्कि पाक और वैध चीज़ें खाना अल्लाह की इबादत का हिस्सा है।
  4. शुक्र अदा करने से अल्लाह नेमतों में बरकत (वृद्धि) देता है, और यह बंदे को अल्लाह के और करीब लाता है।


📜 आयत 112-116 — सूरा अन-नहल

112وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ آمِنَةً مُّطْمَئِنَّةً يَأْتِيهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِّن كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِأَنْعُمِ اللَّهِ فَأَذَاقَهَا اللَّهُ لِبَاسَ الْجُوعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ
और हर शख़्श को जो कुछ भी उसने किया था उसका पूरा पूरा बदला मिलेगा और उन पर किसी तरह का जुल्म न किया जाएगा ख़ुदा ने एक गाँव की मसल बयान फरमाई जिसके रहने वाले हर तरह के चैन व इत्मेनान में थे हर तरफ से बाफराग़त (बहुत ज्यादा) उनकी रोज़ी उनके पास आई थी फिर उन लोगों ने ख़ुदा की नूअमतों की नाशुक्री की तो ख़ुदा ने उनकी करतूतों की बदौलत उनको मज़ा चखा दिया
113وَلَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مِّنْهُمْ فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ وَهُمْ ظَالِمُونَ
कि भूक और ख़ौफ को ओढ़ना (बिछौना) बना दिया और उन्हीं लोगों में का एक रसूल भी उनके पास आया तो उन्होंने उसे झुठलाया
114فَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا وَاشْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
फिर अज़ाब (ख़ुदा) ने उन्हें ले डाला और वह ज़ालिम थे ही तो ख़ुदा ने जो कुछ तुम्हें हलाल तय्यब (ताहिर) रोज़ी दी है उसको (शौक़ से) खाओ और अगर तुम खुदा ही की परसतिश (का दावा करते हो)
115إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ لِغَيْرِ اللَّهِ بِهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसकी नेअमत का शुक्र अदा किया करो तुम पर उसने मुरदार और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर (ज़बाह के वक्त) ख़ुदा के सिवा (किसी) और का नाम लिया जाए हराम किया है फिर जो शख़्श (मारे भूक के) मजबूर हो ख़ुदा से सरतापी (नाफरमानी) करने वाला हो और न (हद ज़रुरत से) बढ़ने वाला हो और (हराम खाए) तो बेशक ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
116وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ أَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هَٰذَا حَلَالٌ وَهَٰذَا حَرَامٌ لِّتَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ
और झूट मूट जो कुछ तुम्हारी ज़बान पर आए (बे समझे बूझे) न कह बैठा करों कि ये हलाल है और हराम है ताकि इसकी बदौलत ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाँधने लगो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग ख़ुदा पर झूठ बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
114आयत

अनुवाद — अन-नहल 114

सूरा अन-नहल आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर अज़ाब (ख़ुदा) ने उन्हें ले डाला और वह ज़ालिम…

सूरा आयत 114/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए