Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَسُولٌ مِّنْهُمْ: उन्हीं में से एक रसूल (जो उन्हीं की क़ौम से ताल्लुक़ रखता हो)
- فَكَذَّبُوهُ: उन्होंने उसे झुठला दिया
- فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ: तो उन्हें अज़ाब ने आ पकड़ा
- وَهُمْ ظَالِمُونَ: हालाँकि वे ज़ालिम थे (अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने मक्का के लोगों की ओर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो हज़रत मुहम्मद ﷺ थे। वे उनके नसब, सच्चाई और अमानतदारी को अच्छी तरह जानते थे, क्योंकि वे उन्हीं के बीच पले-बढ़े थे। उन्हें "अमीन" (अमानतदार) कहते थे। लेकिन जब वे उनके पास अल्लाह का पैग़ाम लेकर आए, तो उन्होंने उसे झुठला दिया और उनकी दावत को क़बूल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा — क़हत (सूखा), डर, और बद्र के मैदान में उनके सरदारों की हार और क़त्ल। यह अज़ाब उस वक़्त आया जब वे ज़ुल्म पर क़ायम थे — शिर्क कर रहे थे, अल्लाह के रास्ते से रोक रहे थे, और अपने रसूल को झुठला रहे थे। यानी यह अज़ाब उनके ज़ुल्म का ही नतीजा था, अल्लाह की तरफ़ से कोई बेइंसाफ़ी नहीं थी।
फ़ायदे:
- अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है कि उन्हीं में से रसूल भेजता है, ताकि वे उसकी बात आसानी से समझ सकें और उस पर ईमान ला सकें। यह अल्लाह की रहमत की सबसे बड़ी दलील है।
- रसूल की पहचान और उसकी सच्चाई उसके अच्छे अख़लाक़ और अमानतदारी से होती है — यही वजह है कि अल्लाह ने रसूल को उन्हीं में से चुना।
- जब इंसान हक़ को झुठलाता है और ज़ुल्म पर अड़ा रहता है, तो अल्लाह का अज़ाब देर से ही सही, ज़रूर आता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह हक़ को क़बूल करे और अपनी ज़िद से बाज़ आए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए और उसके रसूल की पैरवी करनी चाहिए, वरना नेमतें अज़ाब में बदल सकती हैं।
- इस आयत से मुसलमानों को यह सबक़ मिलता है कि वे अपने नबी ﷺ की मुहब्बत और इताअत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, क्योंकि उनकी रिसालत सबसे बड़ी रहमत है, और उसे ठुकराने वालों का अंजाम बहुत बुरा होता है।
📜 आयत 111-115 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 113
सूरा अन-नहल आयत 113 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि भूक और ख़ौफ को ओढ़ना (बिछौना) बना दिया और…सूरा आयत 113/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 111–115. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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