अन-नहल · 25/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
لِيَحْمِلُوا أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ ۝٢٥
Liyahmilooo awzaarahum kaamilatany Yawmal Qiyaamati wa min awzaaril lazeena yudilloonahum bighairi `ilm; alaa saaa`a maa yaziroon
📖 हिंदी अर्थ
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوْزَارَهُمْ: उनके पापों और गुनाहों को।
  • كَامِلَةً: पूर्ण रूप से, बिना किसी कमी के।
  • يُضِلُّونَهُم: जिन्हें वे गुमराह करते हैं।
  • بِغَيْرِ عِلْمٍ: बिना किसी प्रमाण या ज्ञान के (अर्थात अज्ञानता और अंधानुकरण के कारण)।
  • سَاءَ مَا يَزِرُونَ: बहुत बुरा है वह बोझ जो वे उठा रहे हैं।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के अंजाम को बयान करती है जो दूसरों को इस्लाम के रास्ते से रोकते हैं और झूठे विचार फैलाते हैं। उनका यह कृत्य केवल दुनिया में ही नहीं रुकेगा, बल्कि क़ियामत के दिन उन्हें अपने पूरे पापों का बोझ उठाना होगा — उनमें से कोई भी पाप कम नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, वे उन लोगों के पापों का भी बोझ उठाएँगे जिन्हें उन्होंने गुमराह किया, बिना इसके कि उन गुमराह किए गए लोगों के पापों में कोई कमी हो। यह इसलिए है क्योंकि उन्होंने लोगों को अज्ञानता और बिना किसी प्रमाण के इस्लाम से दूर किया। आयत के अंत में अल्लाह तआला इस बोझ की भयावहता को स्पष्ट करते हुए कहता है: "सुन लो! बहुत बुरा है वह बोझ जो वे उठा रहे हैं।" यानी उनका यह कृत्य और उसका परिणाम अत्यंत घृणित और विनाशकारी है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि दूसरों को गुमराह करना या उन्हें सत्य के मार्ग से रोकना कितना बड़ा गुनाह है — इतना बड़ा कि गुमराह करने वाला क़ियामत के दिन अपने पापों के साथ-साथ उन लोगों के पापों का भी बोझ उठाएगा।
  2. यहाँ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा सत्य का प्रचार करना चाहिए और लोगों को अच्छाई की ओर बुलाना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति किसी को सत्य का मार्ग दिखाता है, उसे उसके अच्छे कर्मों का भी उतना ही सवाब मिलता है।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है — कोई भी पाप बिना हिसाब के नहीं छोड़ा जाएगा, और हर व्यक्ति को अपने कर्मों का पूरा फल मिलेगा।
  4. अंत में, यह हमें दुनिया के धोखे से सावधान करती है और आख़िरत की याद दिलाती है, ताकि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ और दूसरों को भी इसी ओर बुलाएँ।


📜 आयत 23-27 — अन-नहल

23لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता
24وَإِذَا قِيلَ لَهُم مَّاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۙ قَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जब उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो वह कहते हैं कि (अजी कुछ भी नहीं बस) अगलो के किस्से हैं
25لِيَحْمِلُوا أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं
26قَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَى اللَّهُ بُنْيَانَهُم مِّنَ الْقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيْهِمُ السَّقْفُ مِن فَوْقِهِمْ وَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
बेशक जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी मक्कारियाँ की थीं तो (ख़ुदा का हुक्म) उनके ख्यालात की इमारत की जड़ की तरफ से आ पड़ा (पस फिर क्या था) इस ख्याली इमारत की छत उन पर उनके ऊपर से धम से गिर पड़ी (और सब ख्याल हवा हो गए) और जिधर से उन पर अज़ाब आ पहुँचा उसकी उनको ख़बर तक न थी
27ثُمَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُخْزِيهِمْ وَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَائِيَ الَّذِينَ كُنتُمْ تُشَاقُّونَ فِيهِمْ ۚ قَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ إِنَّ الْخِزْيَ الْيَوْمَ وَالسُّوءَ عَلَى الْكَافِرِينَ
(फिर उसी पर इकतिफा नहीं) उसके बाद क़यामत के दिन ख़ुदा उनको रुसवा करेगा और फरमाएगा कि (अब बताओ) जिसको तुमने मेरा यशरीक बना रखा था और जिनके बारे में तुम (ईमानदारों से) झगड़ते थे कहाँ हैं (वह तो कुछ जवाब देगें नहीं मगर) जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म दिया गया है कहेगें कि आज के दिन रुसवाई और ख़राबी (सब कुछ) काफिरों पर ही है
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अनुवाद — अन-नहल 25

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Tuesday, August 18, 2026

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