अन-नहल · 24/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَإِذَا قِيلَ لَهُم مَّاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۙ قَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ ۝٢٤
Wa izaa qeela lahum maazaaa anzala Rabbukum qaaloo asaateerul awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
और जब उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो वह कहते हैं कि (अजी कुछ भी नहीं बस) अगलो के किस्से हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسَاطِيرُ: यह "أُسْطُورَة" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है काल्पनिक कहानियाँ, झूठी बातें और मनगढ़ंत किस्से।
  • الْأَوَّلِينَ: पिछले लोग, पुरानी उम्मतों के लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) से पूछा जाता है कि तुम्हारे रब ने अपने पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर क्या चीज़ उतारी है, तो वे झूठ बोलते हुए और मज़ाक उड़ाते हुए जवाब देते हैं कि यह तो बस पुराने लोगों की कहानियाँ और झूठी रिवायतें हैं, जिन्हें मुहम्मद ने खुद जमा कर लिया है। वे इस तरह कहते हैं जैसे क़ुरआन कोई आसमानी किताब नहीं, बल्कि गुज़रे हुए लोगों की बेकार की बातें हैं, जिन्हें बाद में दोहराया जा रहा है। उनका यह कहना सिर्फ़ हठधर्मिता और सच्चाई से मुँह मोड़ने की वजह से था, क्योंकि वे जानते थे कि यह कलाम (वाणी) इंसानी कलाम से बिल्कुल अलग है, लेकिन फिर भी वे इसे जादू और पुरानी कहानियाँ कहकर टाल देते थे। उनका उद्देश्य लोगों को रास्ते से भटकाना और सच्चाई को छिपाना था।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से पता चलता है कि मुनकिरीन (इनकार करने वाले) हमेशा से सच्चाई को बदनाम करने के लिए झूठे बहाने और लच्छेदार शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं, चाहे सच्चाई कितनी भी स्पष्ट क्यों न हो।
  2. क़ुरआन जैसी अज़ीमुश्शान किताब को "पुरानी कहानियाँ" कहना उनकी ज़िद और अंधी दुश्मनी की सबसे बड़ी निशानी है, क्योंकि जब इंसान के पास कोई दलील नहीं होती तो वह ऐसी ही बेहूदा बातें करता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को झुठलाने वालों की बातों से दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने काम पर यक़ीन रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का कलाम हर झूठ और बदनामी से बरतर है।
  4. इससे मुसलमानों को यह सबक मिलता है कि वे अपने दीन की हिफ़ाज़त करें और क़ुरआन की आयात को ग़ौर से पढ़ें, ताकि वे ऐसे इल्ज़ामात का सही जवाब दे सकें।


📜 आयत 22-26 — अन-नहल

22إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٌ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
(फिर क्या काम आएंगीं)तुम्हारा परवरदिगार यकता खुदा है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल ही (इस वजह के हैं कि हर बात का) इन्कार करते हैं और वह बड़े मग़रुर हैं
23لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ
ये लोग जो कुछ छिपा कर करते हैं और जो कुछ ज़ाहिर बज़ाहिर करते हैं (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ज़रुर जानता है वह हरगिज़ तकब्बुर करने वालों को पसन्द नहीं करता
24وَإِذَا قِيلَ لَهُم مَّاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۙ قَالُوا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और जब उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या नाज़िल किया है तो वह कहते हैं कि (अजी कुछ भी नहीं बस) अगलो के किस्से हैं
25لِيَحْمِلُوا أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ
(उनको बकने दो ताकि क़यामत के दिन) अपने (गुनाहों) के पूरे बोझ और जिन लोगों को उन्होंने बे समझे बूझे गुमराह किया है उनके (गुनाहों के) बोझ भी उन्हीं को उठाने पड़ेगें ज़रा देखो तो कि ये लोग कैसा बुरा बोझ अपने ऊपर लादे चले जा रहें हैं
26قَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَى اللَّهُ بُنْيَانَهُم مِّنَ الْقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيْهِمُ السَّقْفُ مِن فَوْقِهِمْ وَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
बेशक जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी मक्कारियाँ की थीं तो (ख़ुदा का हुक्म) उनके ख्यालात की इमारत की जड़ की तरफ से आ पड़ा (पस फिर क्या था) इस ख्याली इमारत की छत उन पर उनके ऊपर से धम से गिर पड़ी (और सब ख्याल हवा हो गए) और जिधर से उन पर अज़ाब आ पहुँचा उसकी उनको ख़बर तक न थी
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अनुवाद — अन-नहल 24

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Tuesday, August 18, 2026

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