अन-नहल · 51/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
۞ وَقَالَ اللَّهُ لَا تَتَّخِذُوا إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ ۝٥١
Wa qaalal laahu laa tatta khizooo ilaahainis naini innamaa Huwa Ilaahunw Waahid; fa iyyaaya farhaboon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न बनाओ माबूद तो बस वही यकता ख़ुदा है सिर्फ मुझी से डरते रहो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تَتَّخِذُوا: न बनाओ, न पकड़ो
  • إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ: दो पूजनीय (दो खुदा)
  • إِنَّمَا: केवल, बस
  • فَإِيَّايَ: तो मुझ ही से
  • فَارْهَبُونِ: डरो, भय रखो

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने सभी बंदों को स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि वे दो पूजनीय न बनाएँ। यानी किसी को अल्लाह का साझी या सह-पूज्य न ठहराएँ। यह बात किसी भी रूप में ईश्वर के एक होने के विरुद्ध है। अल्लाह तआला की आज्ञा है कि सच्चा पूजनीय केवल एक ही है, जो सारे जहान का पालनहार और रब है। उसका कोई साझी नहीं, न कोई उसके बराबर है और न ही कोई उसका सहायक। जब स्थिति यह है कि पूजा के योग्य केवल एक ही ईश्वर है, तो फिर उसी से डरना चाहिए और उसी का भय रखना चाहिए। किसी और से नहीं। डर का अर्थ है उसकी नाराज़गी और अज़ाब से बचना, उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से रुकना। यह भय प्रेम और सम्मान के साथ होता है, जो बंदे को अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से तौहीद (एकेश्वरवाद) की स्पष्ट शिक्षा मिलती है — अल्लाह एक है, उसका कोई साझी नहीं। यही इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है।
  2. अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे सीधे रास्ते पर चलाती है। यह डर इंसान के दिल को पाक करता है और उसे अच्छे कर्मों की तरफ प्रेरित करता है।
  3. जब इंसान केवल अल्लाह से डरता है, तो वह किसी इंसान, किसी ताकत या किसी हालात से नहीं घबराता। उसे यकीन होता है कि अल्लाह ही सब कुछ कर सकता है, इसलिए उसका भरोसा और सहारा केवल अल्लाह पर होता है।
  4. यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) के उस गलत विश्वास का खंडन करती है जिसमें वे अल्लाह के साथ दूसरे देवी-देवताओं की पूजा करते थे। यह स्पष्ट करती है कि यह विश्वास पूरी तरह गलत और नुकसानदेह है।
  5. इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि जीवन में सबसे बड़ी सच्चाई अल्लाह की एकता है। जिस इंसान को यह सच्चाई समझ आ जाए, उसकी ज़िंदगी में सुकून और शांति आ जाती है, क्योंकि वह जानता है कि उसका रब एक है, जो सुनता है, देखता है और हर चीज़ पर क़ादिर है।


📜 आयत 49-53 — अन-नहल

49وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مِن دَابَّةٍ وَالْمَلَائِكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ
और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करते (49) (सजदा)
50يَخَافُونَ رَبَّهُم مِّن فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ ۩
और अपने परवरदिगार से जो उनसे (कहीं) बरतर (बड़ा) व आला है डरते हैं और जो हुक्में दिया जाता है फौरन बजा लाते हैं
51۞ وَقَالَ اللَّهُ لَا تَتَّخِذُوا إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ
और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न बनाओ माबूद तो बस वही यकता ख़ुदा है सिर्फ मुझी से डरते रहो
52وَلَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَهُ الدِّينُ وَاصِبًا ۚ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَتَّقُونَ
और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं (ग़रज़) सब कुछ उसी का है और ख़ालिस फरमाबरदारी हमेशा उसी को लाज़िम (जरूरी) है तो क्या तुम लोग ख़ुदा के सिवा (किसी और से भी) डरते हो
53وَمَا بِكُم مِّن نِّعْمَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَإِلَيْهِ تَجْأَرُونَ
और जितनी नेअमतें तुम्हारे साथ हैं (सब ही की तरफ से हैं) फिर जब तुमको तकलीफ छू भी गई तो तुम उसी के आगे फरियाद करने लगते हो
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
51आयत

अनुवाद — अन-नहल 51

सूरा अन-नहल आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न…

सूरा आयत 51/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए