Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَتَّخِذُوا: न बनाओ, न पकड़ो
- إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ: दो पूजनीय (दो खुदा)
- إِنَّمَا: केवल, बस
- فَإِيَّايَ: तो मुझ ही से
- فَارْهَبُونِ: डरो, भय रखो
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने सभी बंदों को स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि वे दो पूजनीय न बनाएँ। यानी किसी को अल्लाह का साझी या सह-पूज्य न ठहराएँ। यह बात किसी भी रूप में ईश्वर के एक होने के विरुद्ध है। अल्लाह तआला की आज्ञा है कि सच्चा पूजनीय केवल एक ही है, जो सारे जहान का पालनहार और रब है। उसका कोई साझी नहीं, न कोई उसके बराबर है और न ही कोई उसका सहायक। जब स्थिति यह है कि पूजा के योग्य केवल एक ही ईश्वर है, तो फिर उसी से डरना चाहिए और उसी का भय रखना चाहिए। किसी और से नहीं। डर का अर्थ है उसकी नाराज़गी और अज़ाब से बचना, उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से रुकना। यह भय प्रेम और सम्मान के साथ होता है, जो बंदे को अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से तौहीद (एकेश्वरवाद) की स्पष्ट शिक्षा मिलती है — अल्लाह एक है, उसका कोई साझी नहीं। यही इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है।
- अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे सीधे रास्ते पर चलाती है। यह डर इंसान के दिल को पाक करता है और उसे अच्छे कर्मों की तरफ प्रेरित करता है।
- जब इंसान केवल अल्लाह से डरता है, तो वह किसी इंसान, किसी ताकत या किसी हालात से नहीं घबराता। उसे यकीन होता है कि अल्लाह ही सब कुछ कर सकता है, इसलिए उसका भरोसा और सहारा केवल अल्लाह पर होता है।
- यह आयत मुशरिकों (बहुदेववादियों) के उस गलत विश्वास का खंडन करती है जिसमें वे अल्लाह के साथ दूसरे देवी-देवताओं की पूजा करते थे। यह स्पष्ट करती है कि यह विश्वास पूरी तरह गलत और नुकसानदेह है।
- इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि जीवन में सबसे बड़ी सच्चाई अल्लाह की एकता है। जिस इंसान को यह सच्चाई समझ आ जाए, उसकी ज़िंदगी में सुकून और शांति आ जाती है, क्योंकि वह जानता है कि उसका रब एक है, जो सुनता है, देखता है और हर चीज़ पर क़ादिर है।
📜 आयत 49-53 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 51
सूरा अन-नहल आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न…सूरा आयत 51/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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