Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَلَهُ الدِّينُ وَاصِبًا: अल्लाह ही के लिए है दीन (आज्ञाकारिता, इबादत और एकाग्रता), हमेशा और स्थायी रूप से।
- تَتَّقُونَ: तुम डरते हो या उससे बचाव चाहते हो (अर्थात भय और आदर के साथ उसकी पूजा करते हो)।
तफ़सीर:
आकाशों और धरती में जो कुछ भी है—चाहे वह सृष्टि हो, स्वामित्व हो या प्रबंधन—सब कुछ अकेले अल्लाह ही का है। वही इन सबका रचयिता, स्वामी और संचालक है। इसी प्रकार, पूर्ण आज्ञाकारिता, विनम्रता, इबादत और एकाग्रता (दीन) भी अकेले उसी के लिए है, और यह हमेशा और स्थायी रूप से उसी पर लागू होती है—किसी भी समय या परिस्थिति में यह किसी और के लिए उचित नहीं है।
फिर अल्लाह तआला इस पर एक प्रश्नवाचक अंदाज़ में डाँटते हुए फरमाता है: "क्या तुम अल्लाह के अलावा किसी और से डरते हो?" यह एक इन्कारी प्रश्न है, जिसका अर्थ है: यह कैसे संभव है कि जब सब कुछ अल्लाह का है और उसी की आज्ञाकारिता और इबादत स्थायी रूप से उसी के लिए है, तो तुम उसके अलावा किसी और का भय रखते हो और उसकी इबादत करते हो? यह बिल्कुल गलत और अनुचित है। तुम्हें केवल अल्लाह से डरना चाहिए और उसी की इबादत करनी चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ का मालिक है और उसी का दीन (आज्ञाकारिता) हमेशा के लिए है।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की एकता (तौहीद) का अर्थ सिर्फ यह नहीं है कि हम उसे एक मानें, बल्कि यह भी है कि हम उसी की इबादत करें, उसी से डरें और उसी की आज्ञाकारिता को अपने जीवन में स्थायी रूप से अपनाएँ।
- हमें किसी इंसान, ताकत, या वस्तु से उस तरह नहीं डरना चाहिए जैसे अल्लाह से डरते हैं। सारा अधिकार और नियंत्रण अल्लाह के हाथ में है, इसलिए हमारा भय और आशा भी उसी से जुड़ी होनी चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि दीन (धर्म) कोई मौसमी या अस्थायी चीज़ नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का स्थायी हिस्सा होना चाहिए—हर समय, हर हालत में अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी इबादत जारी रहनी चाहिए।
- जब हम यह समझ लेते हैं कि सब कुछ अल्लाह का है और उसी का दीन है, तो हमारा दिल सिर्फ उसी से जुड़ जाता है, और हमें किसी और से डरने या किसी और की उम्मीद रखने की ज़रूरत नहीं रहती। यही सच्ची आज़ादी और सुकून है।
📜 आयत 50-54 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 52
सूरा अन-नहल आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन…सूरा आयत 52/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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