अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- निअ़मत: वह हर भलाई और सुख-सुविधा जो इंसान को प्राप्त हो, चाहे वह धार्मिक हो या सांसारिक।
- अज़-ज़ुर्र: कष्ट, बीमारी, गरीबी, सूखा या कोई भी मुसीबत।
- तज्अरून: तुम चीख-पुकार करते हो, गिड़गिड़ाते हो, और अत्यंत विनम्रता के साथ प्रार्थना करते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! तुम्हारे पास जो भी भलाई और नेमत है—चाहे वह ईमान और हिदायत की नेमत हो, या शारीरिक स्वास्थ्य, धन-दौलत, संतान, सुरक्षा, या कोई और सुख-साधन—वह सब अकेले अल्लाह ही की ओर से है। कोई दूसरा न तो उसे दे सकता है और न ही रोक सकता है। यह अल्लाह की दया और कृपा है जो उसने अपने बंदों पर की है।
फिर जब तुम पर कोई मुसीबत आती है—जैसे बीमारी, गरीबी, सूखा, भय या कोई और कष्ट—तो तुम स्वाभाविक रूप से अल्लाह ही की ओर रुख करते हो, उसी से फरियाद करते हो, उसी से दुआ माँगते हो और उसी से राहत की उम्मीद रखते हो। यहाँ तक कि वे लोग भी जो आम दिनों में अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाते हैं, मुसीबत के समय अपने उन झूठे माबूदों को भूलकर सीधे अल्लाह ही को पुकारते हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सच्चा मददगार और नेमत देने वाला केवल अल्लाह ही है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- हर नेमत अल्लाह की ओर से है, इसलिए उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसे अल्लाह की राह में इस्तेमाल करना चाहिए। नेमतें अल्लाह की तरफ से इम्तिहान भी हैं कि हम उनका सही उपयोग करते हैं या नहीं।
- मुसीबत के समय अल्लाह ही की ओर रुख करना चाहिए, क्योंकि वही कष्ट को दूर करने की शक्ति रखता है। यह हमें सिखाता है कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी से मदद माँगें।
- यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की सबसे बड़ी दलील है—जब इंसान मुसीबत में होता है तो उसकी फितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) उसे अल्लाह की ओर ही खींचती है, चाहे वह कितना ही गुमराह क्यों न हो। इससे साबित होता है कि सच्चा माबूद सिर्फ अल्लाह है।
- अल्लाह की नेमतों को गिनना असंभव है, इसलिए हमें हर पल उसका शुक्रगुज़ार रहना चाहिए और अपनी ज़ुबान से अल्हम्दुलिल्लाह कहते रहना चाहिए। शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं, जैसा कि क़ुरआन में वादा किया गया है।
- यह आयत इंसान को अल्लाह की तरफ लौटने की तरग़ीब देती है—जिस तरह मुसीबत में हम उसे पुकारते हैं, उसी तरह सुख-चैन के समय भी उसे याद रखें और उसकी इबादत करें, ताकि हमारा रिश्ता अल्लाह से हर हाल में जुड़ा रहे।
📜 आयत 51-55 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 53
सूरा अन-नहल आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जितनी नेअमतें तुम्हारे साथ हैं (सब ही की तरफ…सूरा आयत 53/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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