अन-नहल · 82/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُبِينُ ۝٨٢
Fa in tawallaw fa innamaa `alaikal balaaghul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग (ईमान से) मुँह फेरे तो तुम्हारा फर्ज सिर्फ (एहकाम का) साफ पहुँचा देना है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّوْا: मुँह मोड़ लें, ईमान लाने से इन्कार कर दें।
  • الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट और खुला संदेश पहुँचाना, जिसमें कोई अस्पष्टता या छिपाव न हो।

व्याख्या:

ऐ न रसूल! यदि ये लोग आपके द्वारा लाए गए स्पष्ट प्रमाणों और आयतों को देखने के बाद भी ईमान लाने से मुँह मोड़ लें और आपकी बात स्वीकार करने से इन्कार कर दें, तो आपको किसी प्रकार का दुःख या पश्चाताप नहीं करना चाहिए। आपका काम केवल यह है कि आप अल्लाह का संदेश उन तक स्पष्ट रूप से पहुँचा दें, जिसमें कोई अस्पष्टता न हो। आपने यह काम पूरी तरह से कर दिया है। उन्हें हिदायत देने की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है, बल्कि हिदायत देना केवल अल्लाह के हाथ में है। वही जिसे चाहता है, अपनी कृपा से हिदायत देता है। इसलिए आपको केवल संदेश पहुँचाने का कर्तव्य निभाना है, और उनके मुँह मोड़ने से आप पर कोई दोष या पकड़ नहीं है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दीन के प्रचार-प्रसार का काम बहुत स्पष्ट और सरल होना चाहिए, बिना किसी जटिलता के। हमारा कर्तव्य केवल संदेश पहुँचाना है, परिणाम अल्लाह के हाथ में है।
  2. एक दावत देने वाले को कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे लोग कितना भी मुँह मोड़ लें। उसका इनाम अल्लाह के पास सुरक्षित है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने कर्तव्य का पालन पूरी ईमानदारी और स्पष्टता से करना चाहिए, और परिणाम की चिंता अल्लाह पर छोड़ देनी चाहिए। यही एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि हिदायत पाना या न पाना अल्लाह के हाथ में है, इसलिए हमें लोगों के ईमान लाने या न लाने पर अपनी खुशी या दुःख को आधारित नहीं बनाना चाहिए, बल्कि अपने फ़र्ज़ को अदा करने पर ध्यान देना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 80-84 — अन-नहल

80وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّن بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُم مِّن جُلُودِ الْأَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ إِقَامَتِكُمْ ۙ وَمِنْ أَصْوَافِهَا وَأَوْبَارِهَا وَأَشْعَارِهَا أَثَاثًا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
81وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْجِبَالِ أَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَابِيلَ تَقِيكُمُ الْحَرَّ وَسَرَابِيلَ تَقِيكُم بَأْسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
82فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग (ईमान से) मुँह फेरे तो तुम्हारा फर्ज सिर्फ (एहकाम का) साफ पहुँचा देना है
83يَعْرِفُونَ نِعْمَتَ اللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكْثَرُهُمُ الْكَافِرُونَ
(बस) ये लोग ख़ुदा की नेअमतों को पहचानते हैं फिर (जानबुझ कर) उनसे मुकर जाते हैं और इन्हीं में से बहुतेरे नाशुक्रे हैं
84وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
82आयत

अनुवाद — अन-नहल 82

सूरा अन-नहल आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग…

सूरा आयत 82/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए