Wallaahu ja`ala lakum mimmaa khalaqa zilaalanw wa ja`ala lakum minal jibaali aknaananw wa ja`ala lakum saraabeela taqeekumul harra wa saraabeela taqeekum baasakum; kazaalika yutimmu ni`matahoo alaikum la`allakum tuslimoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور خدا ہی نے تمہارے (آرام کے) لیے اپنی پیدا کی ہوئی چیزوں کے سائے بنائے اور پہاڑوں میں غاریں بنائیں اور کُرتے بنائے جو تم کو گرمی سے بچائیں۔ اور (ایسے) کُرتے (بھی) جو تم کو اسلحہ جنگ (کے ضرر) سے محفوظ رکھیں۔ اسی طرح خدا اپنا احسان تم پر پورا کرتا ہے تاکہ تم فرمانبردار بنو
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
ظِلَالًا: छायाएँ, वह चीज़ें जिनसे छाया मिलती है (जैसे पेड़, इमारतें)।
أَكْنَانًا: पहाड़ों में बनी गुफ़ाएँ, कंदराएँ और छिपने के स्थान।
سَرَابِيلَ: कपड़े, वस्त्र (जैसे क़मीज़, चादर)।
تَقِيكُمُ الْحَرَّ: जो तुम्हें गर्मी से बचाते हैं।
بَأْسَكُمْ: तुम्हारी लड़ाई, युद्ध में होने वाला नुक़सान (हथियारों का वार)।
تُسْلِمُونَ: आत्मसमर्पण करना, अल्लाह के आगे पूरी तरह झुक जाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी असीम कृपा से तुम्हारे लिए कई चीज़ें पैदा की हैं जो तुम्हारे काम आती हैं। उसने पेड़ों, इमारतों और अन्य चीज़ों को तुम्हारे लिए छाया का ज़रिया बनाया, ताकि तुम धूप और गर्मी से बच सको। उसने पहाड़ों में गुफ़ाएँ, कंदराएँ और छिपने के स्थान बनाए, जहाँ तुम सर्दी, गर्मी और दुश्मन के ख़तरे से पनाह ले सको। उसने तुम्हारे लिए कपास, ऊन और अन्य चीज़ों से बने वस्त्र बनाए, जो तुम्हें गर्मी और सर्दी से बचाते हैं। इसके अलावा, उसने लोहे से बने कवच (ज़िरह) भी तुम्हारे लिए बनाए, जो युद्ध के समय तुम्हारे शरीर को हथियारों के वार और तीरों से बचाते हैं। ये सब नेमतें अल्लाह की तरफ़ से हैं, और वह इसी तरह अपनी नेमतें पूरी करता है, ताकि तुम उसकी इबादत में उसे अकेला मानो, उसके साथ किसी को साझी न बनाओ, और पूरी तरह उसी के आगे झुक जाओ।
फ़ायदे (सबक़):
अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं और वह हर पल अपने बंदों पर कृपा बरसाता है। जब हम इन नेमतों पर ग़ौर करते हैं, तो हमारा दिल अल्लाह की मोहब्बत और शुक्र से भर जाता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हमारी हर ज़रूरत का इंतज़ाम किया है—चाहे वह छाया हो, सुरक्षा हो, या कपड़े। यह उसकी रहमत और हिकमत की निशानी है।
अल्लाह की नेमतों का सही शुक्र यह है कि हम उसकी इबादत में उसे अकेला मानें और अपनी ज़िंदगी को उसकी बताई हुई राह पर चलाएँ। इस्लाम का पैग़ाम ही यही है—अल्लाह के आगे पूरी तरह सर झुका देना।
यह आयत हमें प्रकृति और अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है, ताकि हम उसकी कुदरत और एहसान को पहचानें और अपने रब के करीब आएँ।
क्या उन लोगों ने परिन्दों की तरफ ग़ौर नहीं किया जो आसमान के नीचे हवा में घिरे हुए (उड़ते रहते हैं) उनको तो बस ख़ुदा ही (गिरने से ) रोकता है बेशक इसमें भी (कुदरते ख़ुदा की) ईमानदारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे घरों को तुम्हारा ठिकाना क़रार दिया और उसी ने तुम्हारे वास्ते चौपायों की खालों से तुम्हारे लिए (हलके फुलके) डेरे (ख़ेमे) बना जिन्हें तुम हलका पाकर अपने सफर और हजर (ठहरने) में काम लाते हो और इन चारपायों की ऊन और रुई और बालो से एक वक्त ख़ास (क़यामत तक) के लिए तुम्हारे बहुत से असबाब और अबकार आमद (काम की) चीज़े बनाई
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
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