अन-नहल · 83/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
يَعْرِفُونَ نِعْمَتَ اللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكْثَرُهُمُ الْكَافِرُونَ ۝٨٣
Ya`rifoona ni`matal laahi summa yunkiroonahaa wa aksaruhumul kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
(बस) ये लोग ख़ुदा की नेअमतों को पहचानते हैं फिर (जानबुझ कर) उनसे मुकर जाते हैं और इन्हीं में से बहुतेरे नाशुक्रे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعْرِفُونَ (वे पहचानते हैं) — वे जानते और समझते हैं।
  • نِعْمَتَ اللَّهِ (अल्लाह की नेमत) — अल्लाह की वह भलाई और कृपा जो उसने उन पर की।
  • يُنكِرُونَهَا (वे उसका इनकार करते हैं) — वे उसे जुटाते हैं और स्वीकार नहीं करते।
  • الْكَافِرُونَ (काफ़िर) — इनकार करने वाले, झुठलाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मुशरिक लोग अल्लाह की उन नेमतों को भली-भाँति पहचानते हैं जो उसने उन्हें प्रदान की हैं — जैसे बारिश, खेती, फल, पशु, सुरक्षा, और सबसे बड़ी नेमत यह कि उनके पास अल्लाह का रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आया, जो उन्हें सीधा रास्ता दिखाने वाला और उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर लाने वाला है। वे इन नेमतों को जानते हैं, फिर भी इनका इनकार करते हैं — वे अल्लाह की इबादत छोड़कर दूसरों की इबादत करते हैं, और रसूल को झुठलाते हैं। उनमें से अधिकतर लोग कृतघ्न और इनकार करने वाले हैं, जो अल्लाह की नेमतों को स्वीकार नहीं करते और न ही उनका शुक्र अदा करते हैं। यह उनकी अज्ञानता और हठधर्मिता की पराकाष्ठा है कि वे नेमत को पहचानते हुए भी उसका इनकार करते हैं।


फ़ायदे (लाभ):

  1. शुक्र अदा करने की तालीम: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेमत को पहचानना और उसका शुक्र अदा करना ईमान की निशानी है। जो नेमत पाकर भी इनकार करता है, वह अल्लाह की नज़र में नापसंदीदा है।
  2. नेमतों का सही उपयोग: अल्लाह की नेमतें हमें उसकी इबादत और उसके रसूल की पैरवी के लिए मिली हैं। इनका सही उपयोग यह है कि हम उन्हें अल्लाह की राह में खर्च करें और उसके हुक्मों पर अमल करें।
  3. इनकार का अंजाम: जो लोग अल्लाह की नेमतों का इनकार करते हैं, वे अपने लिए बुरा अंजाम तैयार करते हैं। अल्लाह नेमतें देने वाला है, लेकिन वह कृतघ्नों को सज़ा भी दे सकता है।
  4. रसूल की महानता: इस आयत से पता चलता है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का आना सबसे बड़ी नेमत है। इस नेमत की क़द्र करना और उसे स्वीकार करना ईमान की शर्त है।
  5. हठधर्मिता से बचाव: यह आयत हमें हठधर्मी और अहंकार से बचाती है। सच्चाई सामने आने के बाद भी उसे न मानना बड़ी भूल है। हमें हमेशा सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए।


📜 आयत 81-85 — सूरा अन-नहल

81وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ الْجِبَالِ أَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَابِيلَ تَقِيكُمُ الْحَرَّ وَسَرَابِيلَ تَقِيكُم بَأْسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे आराम के लिए अपनी पैदा की हुईचीज़ों के साए बनाए और उसी ने तुम्हारे (छिपने बैठने) के वास्ते पहाड़ों में घरौन्दे (ग़ार वग़ैरह) बनाए और उसी ने तुम्हारे लिए कपड़े बनाए जो तुम्हें (सर्दी) गर्मी से महफूज़ रखें और (लोहे) के कुर्ते जो तुम्हें हाथियों की ज़द (मार) से बचा लंग़ यूँ ख़ुदा अपनी नेअमत तुम पर पूरी करता है
82فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
तुम उसकी फरमाबरदारी करो उस पर भी अगर ये लोग (ईमान से) मुँह फेरे तो तुम्हारा फर्ज सिर्फ (एहकाम का) साफ पहुँचा देना है
83يَعْرِفُونَ نِعْمَتَ اللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكْثَرُهُمُ الْكَافِرُونَ
(बस) ये लोग ख़ुदा की नेअमतों को पहचानते हैं फिर (जानबुझ कर) उनसे मुकर जाते हैं और इन्हीं में से बहुतेरे नाशुक्रे हैं
84وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
85وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ ظَلَمُوا الْعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और जिन लोगों ने (दुनिया में) शरारतें की थी जब वह अज़ाब को देख लेगें तो उनके अज़ाब ही में तख़फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत ही दी जाएगी
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
83आयत

अनुवाद — अन-नहल 83

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सूरा आयत 83/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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