अन-नहल · 88/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ ۝٨٨
Allazeena kafaroo wa saddoo `an sabeelil laahi zidnaahum `azaaban fawqal `azaabi bimaa kaanoo yufsidoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका उनके फ़साद वाले कामों के बदले में उनके लिए हम अज़ाब पर अज़ाब बढ़ाते जाएँगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह की एकता और रसूल के सत्य को नकारा, अविश्वास किया।
  • صَدُّوا: रोका, बाधा डाली।
  • سَبِيلِ اللّهِ: अल्लाह का मार्ग, यानी इस्लाम और सत्य का रास्ता।
  • زِدْنَاهُمْ: हमने उन्हें बढ़ा दिया।
  • فَوْقَ الْعَذَابِ: यातना के ऊपर, अतिरिक्त यातना।
  • يُفْسِدُونَ: वे फसाद करते थे, यानी लोगों को सत्य से भटकाकर समाज में बिगाड़ पैदा करते थे।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) और आप (ﷺ) की नबुव्वत को झुठलाया, और साथ ही दूसरे लोगों को भी अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से रोका। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने घोषणा की कि उन्हें उनके कुफ्र (अविश्वास) की सज़ा के रूप में जो यातना मिलेगी, उसके ऊपर एक और अतिरिक्त यातना दी जाएगी। यह अतिरिक्त यातना इसलिए है क्योंकि उन्होंने सिर्फ़ खुद ही गुमराह नहीं हुए, बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग से भटकाने का काम किया। उनका यह कृत्य ज़मीन पर फसाद फैलाने के समान था, क्योंकि उन्होंने लोगों को अल्लाह की इबादत से रोका और उन्हें कुफ्र और नाफ़रमानी की तरफ बुलाया। इसलिए उनकी सज़ा भी दोगुनी होगी — एक उनके अपने कुफ्र की, और दूसरी उनके इस फसाद और गुमराही फैलाने की।

फ़ायदे:

  1. यह आयत बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल पूर्ण है — जो लोग दूसरों को सत्य के मार्ग से रोकते हैं और उन्हें गुमराह करते हैं, उन्हें सिर्फ़ अपने गुनाह की सज़ा नहीं मिलेगी, बल्कि उन लोगों के गुनाह का हिस्सा भी उन पर डाला जाएगा जिन्हें उन्होंने गुमराह किया। यह एक गंभीर चेतावनी है कि हमें दूसरों को सत्य की ओर बुलाना चाहिए, न कि उन्हें सत्य से दूर करना चाहिए।
  2. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों उसके हिक्मत (ज्ञान) पर आधारित हैं। जिसने जितना अच्छा किया, उसे उतना ही अच्छा मिलेगा, और जिसने जितना बुरा फैलाया, उसे उतनी ही सज़ा मिलेगी।
  3. यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि इस्लाम में सिर्फ़ अपनी निजी नेकी काफ़ी नहीं है, बल्कि दूसरों को भी भलाई की तरफ बुलाना और उन्हें बुराई से रोकना हमारी ज़िम्मेदारी है। जो लोग इस ज़िम्मेदारी को निभाते हैं, वे अल्लाह के यहाँ महान इनाम के हक़दार हैं।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि कुफ्र और गुमराही सिर्फ़ एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि जब कोई व्यक्ति दूसरों को भी गुमराह करता है, तो उसका जुर्म और भी बढ़ जाता है। इसलिए हमें हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए और उसे फैलाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और उसकी यातना से बच सकें।
🎧 सुनें

📜 आयत 86-90 — अन-नहल

86وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ أَشْرَكُوا شُرَكَاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ شُرَكَاؤُنَا الَّذِينَ كُنَّا نَدْعُو مِن دُونِكَ ۖ فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ إِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَ
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो
87وَأَلْقَوْا إِلَى اللَّهِ يَوْمَئِذٍ السَّلَمَ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और उस दिन ख़ुदा के सामने सर झुका देंगे और जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ दुनिया में किया करते थे उनसे गायब हो जाएँगें
88الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ
जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका उनके फ़साद वाले कामों के बदले में उनके लिए हम अज़ाब पर अज़ाब बढ़ाते जाएँगें
89وَيَوْمَ نَبْعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا عَلَيْهِم مِّنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَجِئْنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ ۚ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ تِبْيَانًا لِّكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً وَبُشْرَىٰ لِلْمُسْلِمِينَ
और वह दिन याद करो जिस दिन हम हर एक गिरोह में से उन्हीं में का एक गवाह उनके मुक़ाबिल ला खड़ा करेगें और (ऐ रसूल) तुम को उन लोगों पर (उनके) सामने गवाह बनाकर ला खड़ा करेंगें और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की जिसमें हर चीज़ का (शाफी) बयान है और मुसलमानों के लिए (सरमापा) हिदायत और रहमत और खुशख़बरी है
90۞ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْإِحْسَانِ وَإِيتَاءِ ذِي الْقُرْبَىٰ وَيَنْهَىٰ عَنِ الْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ وَالْبَغْيِ ۚ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा इन्साफ और (लोगों के साथ) नेकी करने और क़राबतदारों को (कुछ) देने का हुक्म करता है और बदकारी और नाशाएस्ता हरकतों और सरकशी करने को मना करता है (और) तुम्हें नसीहत करता है ताकि तुम नसीहत हासिल करो
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अनुवाद — अन-नहल 88

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Tuesday, August 18, 2026

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