Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَفَرُوا: अल्लाह की एकता और रसूल के सत्य को नकारा, अविश्वास किया।
- صَدُّوا: रोका, बाधा डाली।
- سَبِيلِ اللّهِ: अल्लाह का मार्ग, यानी इस्लाम और सत्य का रास्ता।
- زِدْنَاهُمْ: हमने उन्हें बढ़ा दिया।
- فَوْقَ الْعَذَابِ: यातना के ऊपर, अतिरिक्त यातना।
- يُفْسِدُونَ: वे फसाद करते थे, यानी लोगों को सत्य से भटकाकर समाज में बिगाड़ पैदा करते थे।
तफसीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) और आप (ﷺ) की नबुव्वत को झुठलाया, और साथ ही दूसरे लोगों को भी अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से रोका। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने घोषणा की कि उन्हें उनके कुफ्र (अविश्वास) की सज़ा के रूप में जो यातना मिलेगी, उसके ऊपर एक और अतिरिक्त यातना दी जाएगी। यह अतिरिक्त यातना इसलिए है क्योंकि उन्होंने सिर्फ़ खुद ही गुमराह नहीं हुए, बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग से भटकाने का काम किया। उनका यह कृत्य ज़मीन पर फसाद फैलाने के समान था, क्योंकि उन्होंने लोगों को अल्लाह की इबादत से रोका और उन्हें कुफ्र और नाफ़रमानी की तरफ बुलाया। इसलिए उनकी सज़ा भी दोगुनी होगी — एक उनके अपने कुफ्र की, और दूसरी उनके इस फसाद और गुमराही फैलाने की।
फ़ायदे:
- यह आयत बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल पूर्ण है — जो लोग दूसरों को सत्य के मार्ग से रोकते हैं और उन्हें गुमराह करते हैं, उन्हें सिर्फ़ अपने गुनाह की सज़ा नहीं मिलेगी, बल्कि उन लोगों के गुनाह का हिस्सा भी उन पर डाला जाएगा जिन्हें उन्होंने गुमराह किया। यह एक गंभीर चेतावनी है कि हमें दूसरों को सत्य की ओर बुलाना चाहिए, न कि उन्हें सत्य से दूर करना चाहिए।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों उसके हिक्मत (ज्ञान) पर आधारित हैं। जिसने जितना अच्छा किया, उसे उतना ही अच्छा मिलेगा, और जिसने जितना बुरा फैलाया, उसे उतनी ही सज़ा मिलेगी।
- यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि इस्लाम में सिर्फ़ अपनी निजी नेकी काफ़ी नहीं है, बल्कि दूसरों को भी भलाई की तरफ बुलाना और उन्हें बुराई से रोकना हमारी ज़िम्मेदारी है। जो लोग इस ज़िम्मेदारी को निभाते हैं, वे अल्लाह के यहाँ महान इनाम के हक़दार हैं।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि कुफ्र और गुमराही सिर्फ़ एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि जब कोई व्यक्ति दूसरों को भी गुमराह करता है, तो उसका जुर्म और भी बढ़ जाता है। इसलिए हमें हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए और उसे फैलाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और उसकी यातना से बच सकें।
📜 आयत 86-90 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 88
सूरा अन-नहल आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और लोगों को ख़ुदा…सूरा आयत 88/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
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Friday, October 2, 2026
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