अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَأَلْقَوْا إِلَى اللَّهِ السَّلَمَ: अर्थात उन्होंने अल्लाह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, पूर्ण रूप से उसके प्रति विनम्र और आज्ञाकारी हो गए।
- السَّلَمَ: आत्मसमर्पण, आज्ञाकारिता, समर्पण।
- ضَلَّ عَنْهُم: उनसे खो गया, गायब हो गया, नष्ट हो गया।
- يَفْتَرُونَ: जो वे झूठ-मूठ गढ़ते थे, अर्थात मिथ्या आरोप और झूठी बातें।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उस भयानक दिन (क़ियामत) का चित्रण कर रहे हैं जब मुशरिकीन (बहुदेववादी) अपनी सारी घमंड और अकड़ खो देंगे। दुनिया में वे अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ते थे, उसके आगे सिर नहीं झुकाते थे, और अपनी मनगढ़ंत देवी-देवताओं को अल्लाह का साझी ठहराते थे। लेकिन जब क़ियामत का दिन आएगा और वे अल्लाह की महानता और शक्ति को प्रत्यक्ष देखेंगे, तो उनका सारा घमंड चूर-चूर हो जाएगा। वे पूर्ण रूप से अल्लाह के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे, बिल्कुल उसी तरह जैसे कोई कैदी अपने विजेता के सामने हथियार डाल देता है।
उस दिन उनके वे सारे झूठे दावे और मिथ्या विश्वास धूल में मिल जाएँगे। वे जो कहा करते थे कि हमारे ये देवता हमारे लिए अल्लाह के पास सिफ़ारिश करेंगे, हमें उसके करीब लाएँगे, ये सब बातें झूठी साबित होंगी। उनके वे देवता न तो उनकी मदद कर सकेंगे और न ही उनकी सिफ़ारिश। वे सब उनसे गायब हो जाएँगे, जैसे कोई धोखा देने वाला साथी मुसीबत के समय भाग जाता है। उन्हें अपनी ग़लती का एहसास तो होगा, लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होगी।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह के आगे विनम्रता: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सामने आत्मसमर्पण और विनम्रता ही सच्ची सफलता है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे सिर नहीं झुकाते, उन्हें आख़िरत में मजबूरन झुकना पड़ेगा, लेकिन तब यह झुकना उनके किसी काम नहीं आएगा।
- झूठे आश्रयों से बचाव: यह आयत हमें चेतावनी देती है कि अल्लाह के अलावा किसी और पर भरोसा करना, चाहे वह इंसान हो, देवता हो या कोई और चीज़, एक धोखा है। क़ियामत के दिन सभी झूठे सहारे नष्ट हो जाएँगे।
- सच्चाई की विजय: यह आयत हमें बताती है कि सच्चाई हमेशा जीतती है और झूठ मिट जाता है। इस्लाम का संदेश यही है कि जीवन में केवल सच्चाई और एकेश्वरवाद (तौहीद) ही स्थायी है।
- पश्चाताप का समय: यह आयत हमें याद दिलाती है कि पश्चाताप और अल्लाह की ओर लौटने का सही समय यही दुनिया की ज़िंदगी है। क़ियामत के दिन पश्चाताप करने का कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए आज ही अपने जीवन को सुधारें और अल्लाह की इबादत की ओर लौटें।
📜 आयत 85-89 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 87
सूरा अन-नहल आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उस दिन ख़ुदा के सामने सर झुका देंगे और…सूरा आयत 87/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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