अल-इसरा · 3/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَبْدًا شَكُورًا ۝٣
Zurriyyata man hamalnaa ma`a Nooh innahoo kaana `abdan shakooraa
📖 हिंदी अर्थ
मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ न बनाना बेशक नूह बड़ा शुक्र गुज़ार बन्दा था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذُرِّيَّةَ: संतान, वंशज।
  • مَنْ حَمَلْنَا: जिन्हें हमने (नौका पर) सवार किया।
  • مَعَ نُوحٍ: नूह (अलैहिस्सलाम) के साथ।
  • شَكُورًا: बहुत अधिक शुक्र अदा करने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बनी इस्राईल को सम्बोधित करते हुए उन्हें उनके पूर्वजों की याद दिलाते हैं, और साथ ही सभी इंसानों को नसीहत देते हैं। अल्लाह फरमाता है: "ऐ उन लोगों की संतानो, जिन्हें हमने नूह (अलैहिस्सलाम) के साथ नौका में सवार करके बचा लिया था!" यानी जब तूफान आया और सब कुछ डूब गया, तो हमने नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को नौका में सवार करके बचा लिया। तुम सब उन्हीं की नस्ल से हो, इसलिए यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि उसने तुम्हारे पूर्वजों को बचाकर तुम्हें ज़िन्दगी दी।

फिर अल्लाह उन्हें नसीहत करता है कि इस नेमत को याद करो और अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक न करो। केवल उसी की इबादत करो और उसके आगे झुको। और नूह (अलैहिस्सलाम) की तरह शुक्रगुज़ार बनो, क्योंकि वे अल्लाह के बहुत शुक्र अदा करने वाले बंदे थे। वे अपने दिल से, अपनी ज़ुबान से और अपने अंगों से अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। उन्होंने अल्लाह की इबादत में कोई कमी नहीं की और हर हाल में अल्लाह के शुक्रगुज़ार रहे।

इस आयत में अल्लाह ने नूह (अलैहिस्सलाम) की तारीफ़ करते हुए उन्हें "शकूर" (बहुत शुक्र करने वाला) कहा, ताकि लोग उनकी पैरवी करें और अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें। यह भी बताया गया है कि जो लोग अल्लाह के शुक्रगुज़ार होते हैं, अल्लाह उन्हें और नेमतें देता है और उनकी तारीफ़ करता है।

फायदे और सबक:

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना और उन पर शुक्र अदा करना इंसान का सबसे बड़ा कर्तव्य है, क्योंकि नेमत की याद दिलाने से इंसान का दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाता है।
  2. नूह (अलैहिस्सलाम) की तरह हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए — दिल से, ज़ुबान से और अमल से।
  3. अल्लाह उन लोगों की मदद करता है जो उसके शुक्रगुज़ार होते हैं, और उन्हें मुसीबतों से बचाता है, जैसे उसने नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को तूफान से बचाया।
  4. शुक्र अदा करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक न किया जाए और उसके हुक्मों पर अमल किया जाए।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे लोगों की संतान को चाहिए कि वे अपने बुज़ुर्गों के नेक रास्ते पर चलें, क्योंकि यही उनकी असली पहचान है।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-इसरा

1سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرَىٰ بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آيَاتِنَا ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
वह ख़ुदा (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है जिसने अपने बन्दों को रातों रात मस्जिदुल हराम (ख़ान ऐ काबा) से मस्जिदुल अक़सा (आसमानी मस्जिद) तक की सैर कराई जिसके चौगिर्द हमने हर किस्म की बरकत मुहय्या कर रखी हैं ताकि हम उसको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाए इसमें शक़ नहीं कि (वह सब कुछ) सुनता (और) देखता है
2وَآتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ أَلَّا تَتَّخِذُوا مِن دُونِي وَكِيلًا
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उस को बनी इसराईल की रहनुमा क़रार दिया (और हुक्म दे दिया) कि ऐ उन लोगों की औलाद जिन्हें हम ने नूह के साथ कश्ती में सवार किया था
3ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَبْدًا شَكُورًا
मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ न बनाना बेशक नूह बड़ा शुक्र गुज़ार बन्दा था
4وَقَضَيْنَا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ فِي الْكِتَابِ لَتُفْسِدُنَّ فِي الْأَرْضِ مَرَّتَيْنِ وَلَتَعْلُنَّ عُلُوًّا كَبِيرًا
और हमने बनी इसराईल से इसी किताब (तौरैत) में साफ साफ बयान कर दिया था कि तुम लोग रुए ज़मीन पर दो मरतबा ज़रुर फसाद फैलाओगे और बड़ी सरकशी करोगे
5فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ أُولَاهُمَا بَعَثْنَا عَلَيْكُمْ عِبَادًا لَّنَا أُولِي بَأْسٍ شَدِيدٍ فَجَاسُوا خِلَالَ الدِّيَارِ ۚ وَكَانَ وَعْدًا مَّفْعُولًا
फिर जब उन दो फसादों में पहले का वक्त अा पहुँचा तो हमने तुम पर कुछ अपने बन्दों (नजतुलनस्र) और उसकी फौज को मुसल्लत (ग़ालिब) कर दिया जो बड़े सख्त लड़ने वाले थे तो वह लोग तुम्हारे घरों के अन्दर घुसे (और खूब क़त्ल व ग़ारत किया) और ख़ुदा के अज़ाब का वायदा जो पूरा होकर रहा
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
3आयत

अनुवाद — अल-इसरा 3

सूरा अल-इसरा आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ न बनाना बेशक नूह…

सूरा आयत 3/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए