अल-इसरा · 4/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَقَضَيْنَا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ فِي الْكِتَابِ لَتُفْسِدُنَّ فِي الْأَرْضِ مَرَّتَيْنِ وَلَتَعْلُنَّ عُلُوًّا كَبِيرًا ۝٤
Wa qadainaaa ilaa Baneee Israaa`eela fil Kitaabi latufsidunna fil ardi marratain; wa lata`lunna`uluwwan kabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने बनी इसराईल से इसी किताब (तौरैत) में साफ साफ बयान कर दिया था कि तुम लोग रुए ज़मीन पर दो मरतबा ज़रुर फसाद फैलाओगे और बड़ी सरकशी करोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقَضَيْنَا: हमने निर्णय सुना दिया, अर्थात हमने यह बात निश्चित रूप से बता दी।
  • إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ: बनी इस्राईल (इस्राईल की संतान) की ओर।
  • فِي الْكِتَابِ: तौरात (पुस्तक) में।
  • لَتُفْسِدُنَّ: तुम अवश्य फ़साद (बिगाड़) फैलाओगे।
  • مَرَّتَيْنِ: दो बार।
  • وَلَتَعْلُنَّ: और तुम अवश्य बड़ा उत्पात/अत्याचार करोगे।
  • عُلُوًّا كَبِيرًا: बहुत बड़ी सरकशी और घमंड।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने बनी इस्राईल को तौरात में पहले ही सूचित कर दिया था कि उनसे दो बार ज़मीन (शाम और बैतुल मुक़द्दस के इलाक़े) में बड़ा फ़साद होगा। यह फ़साद उनके अत्याचार, नाफ़रमानी, नबियों के क़त्ल और सरकशी की वजह से होगा। पहली बार वे अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़कर ज़ुल्म और बग़ावत पर उतर आएँगे, और दूसरी बार भी वे इसी तरह की ज़्यादतियाँ करेंगे। साथ ही उन्हें बताया गया कि वे लोगों पर बड़ा घमंड और अत्याचार करेंगे, हद से बढ़कर सरकशी दिखाएँगे। यह उनके अंजाम की पेशीनगोई थी, जो बाद में पूरी हुई। इस आयत में अल्लाह ने यह भी बताया कि यह सब कुछ उसके लिखे हुए फ़ैसले के अनुसार हुआ, ताकि लोग सबक़ लें।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ पर हावी है, वह पहले से जानता है कि कौन क्या करेगा, और यह उसकी किताब में दर्ज है।
  2. ज़मीन पर फ़साद फैलाना, ज़ुल्म करना और सरकशी करना अल्लाह की नाराज़गी का कारण है, चाहे कोई भी क़ौम हो।
  3. अल्लाह की दी हुई नेअमतों (बरकतों) का शुक्र न करना और नाफ़रमानी करना इंसान को तबाही की तरफ ले जाता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की तरफ से आने वाली हर बात सच है, और उसके वादे और चेतावनियाँ पूरी होकर रहती हैं।
  5. हमें चाहिए कि हम बनी इस्राईल के हालात से सबक़ लें और अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पैरवी में जुटे रहें, ताकि हम फ़साद और सरकशी से बचे रहें।
🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अल-इसरा

2وَآتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ أَلَّا تَتَّخِذُوا مِن دُونِي وَكِيلًا
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उस को बनी इसराईल की रहनुमा क़रार दिया (और हुक्म दे दिया) कि ऐ उन लोगों की औलाद जिन्हें हम ने नूह के साथ कश्ती में सवार किया था
3ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَبْدًا شَكُورًا
मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ न बनाना बेशक नूह बड़ा शुक्र गुज़ार बन्दा था
4وَقَضَيْنَا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ فِي الْكِتَابِ لَتُفْسِدُنَّ فِي الْأَرْضِ مَرَّتَيْنِ وَلَتَعْلُنَّ عُلُوًّا كَبِيرًا
और हमने बनी इसराईल से इसी किताब (तौरैत) में साफ साफ बयान कर दिया था कि तुम लोग रुए ज़मीन पर दो मरतबा ज़रुर फसाद फैलाओगे और बड़ी सरकशी करोगे
5فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ أُولَاهُمَا بَعَثْنَا عَلَيْكُمْ عِبَادًا لَّنَا أُولِي بَأْسٍ شَدِيدٍ فَجَاسُوا خِلَالَ الدِّيَارِ ۚ وَكَانَ وَعْدًا مَّفْعُولًا
फिर जब उन दो फसादों में पहले का वक्त अा पहुँचा तो हमने तुम पर कुछ अपने बन्दों (नजतुलनस्र) और उसकी फौज को मुसल्लत (ग़ालिब) कर दिया जो बड़े सख्त लड़ने वाले थे तो वह लोग तुम्हारे घरों के अन्दर घुसे (और खूब क़त्ल व ग़ारत किया) और ख़ुदा के अज़ाब का वायदा जो पूरा होकर रहा
6ثُمَّ رَدَدْنَا لَكُمُ الْكَرَّةَ عَلَيْهِمْ وَأَمْدَدْنَاكُم بِأَمْوَالٍ وَبَنِينَ وَجَعَلْنَاكُمْ أَكْثَرَ نَفِيرًا
फिर हमने तुमको दोबारा उन पर ग़लबा देकर तुम्हारे दिन फेरे और माल से और बेटों से तुम्हारी मदद की और तुमको बड़े जत्थे वाला बना दिया
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अनुवाद — अल-इसरा 4

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Tuesday, August 18, 2026

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