Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْكِتَابَ (अल-किताब): यहाँ इससे अभिप्राय तौरात (तोराह) है, जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई।
- هُدًى (हुदन): मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता दिखाने वाली।
- لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ (लिबनी इस्राईल): बनी इस्राईल (हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम की संतान) के लिए।
- وَكِيلًا (वकील): वह संरक्षक और कार्य-साधक जिसे अपने मामले सौंपे जाएँ; यहाँ अर्थ है कोई और पूज्य या भरोसे का सहारा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जिस तरह अल्लाह ने अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को इस्रा (रात की यात्रा) के माध्यम से सम्मानित किया, उसी तरह उसने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को भी सम्मानित किया और उन्हें तौरात नामक किताब प्रदान की। इस किताब को अल्लाह ने बनी इस्राईल के लिए मार्गदर्शन और सत्य का स्पष्ट प्रमाण बनाया, ताकि वे अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर आएँ। इस किताब में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि बनी इस्राईल अल्लाह के अलावा किसी और को अपना संरक्षक, सहारा या पूज्य न बनाएँ, और न ही अपने मामलों को किसी और को सौंपें। उन्हें चाहिए कि वे अपने सारे कार्य केवल अल्लाह पर ही छोड़ें और उसी पर भरोसा रखें, क्योंकि वही सच्चा वकील और कार्य-साधक है। यह निर्देश केवल बनी इस्राईल के लिए नहीं था, बल्कि यह एक सार्वभौमिक शिक्षा है कि मनुष्य को अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह को ही अपना एकमात्र सहारा और संरक्षक बनाना चाहिए।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह अपने नबियों को विशेष किताबें और मार्गदर्शन देकर सम्मानित करता है, और यह उसकी रहमत का प्रमाण है।
- हमें सीखना चाहिए कि जीवन के हर मामले में अल्लाह को ही अपना एकमात्र भरोसा और सहारा बनाएँ। किसी इंसान, धन, या सांसारिक शक्ति पर पूर्ण निर्भरता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सच्चा संरक्षक केवल अल्लाह है।
- यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की महत्ता को दर्शाती है — कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना या किसी और को अपने मामलों का स्वामी बनाना निषिद्ध है। यही इस्लाम का मूल संदेश है।
- जब हम अपने सारे काम अल्लाह पर छोड़ देते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है और हमें किसी और की मोहताजी नहीं रहती। यह आज़ादी और आत्मिक शांति का रास्ता है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की किताबें मानवता के मार्गदर्शन के लिए उतारी गईं, और हमें उन पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को सही दिशा देनी चाहिए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 2
सूरा अल-इसरा आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उस…सूरा आयत 2/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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