अल-इसरा · 92/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
أَوْ تُسْقِطَ السَّمَاءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا أَوْ تَأْتِيَ بِاللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ قَبِيلًا ۝٩٢
Aw tusqitas samaaa`a kamaa za`amta `alainaa kisafan aw taatiya billaahi walma laaa`ikati qabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
या जैसा तुम गुमान रखते थे हम पर आसमान ही को टुकड़े (टुकड़े) करके गिराओ या ख़ुदा और फरिश्तों को (अपने क़ौल की तस्दीक़) में हमारे सामने (गवाही में ला खड़ा कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • किसफ़न (كِسَفًا): टुकड़े, टुकड़ों में।
  • क़बीलन (قَبِيلًا): आमने-सामने, प्रत्यक्ष रूप से, समूह के रूप में।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन अविश्वासियों की हालत बयान कर रही है, जिन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अजीब-ओ-ग़रीब माँगें कीं। उन्होंने कहा कि हम तुम पर तब तक ईमान नहीं लाएँगे, जब तक तुम आसमान को हमारे ऊपर टुकड़ों में गिराकर न दिखा दो, जैसा कि तुम दावा करते हो कि अल्लाह तुम्हें रसूल बनाकर भेजा है। यानी वे चाहते थे कि उन पर अज़ाब ही आ जाए, ताकि वे देख लें! यह उनकी हठधर्मिता और ज़िद की अत्यधिक स्थिति थी।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि तुम अल्लाह और उसके फ़रिश्तों को हमारे सामने ले आओ, ताकि हम उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देख सकें और वे तुम्हारे सच्चे होने की गवाही दें। यह माँग भी उनकी अज्ञानता और सरकशी की पराकाष्ठा थी, क्योंकि यह दुनिया इस बात की बरदाश्त नहीं कर सकती कि कोई अल्लाह को आँखों से देख ले। अल्लाह तआला ने दुनिया में अपनी आयतें (निशानियाँ) भेजीं, लेकिन वे उन्हें देखकर भी अंधे बने रहे।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि ईमान दिल की बात है, जो अल्लाह के भेजे हुए संकेतों और नबियों की शिक्षाओं पर यक़ीन करने से आता है। अल्लाह ने हमें अक़्ल और समझ दी है, और क़ुरआन में हज़ारों निशानियाँ बयान की हैं। हमें चमत्कारों की माँग करने के बजाय अल्लाह की रहमत और उसकी हिदायत पर भरोसा करना चाहिए। याद रखिए, अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है, और जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करता है, उसे वह कभी निराश नहीं करता। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 90-94 — अल-इसरा

90وَقَالُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْأَرْضِ يَنبُوعًا
(ऐ रसूल कुफ्फार मक्के ने) तुमसे कहा कि जब तक तुम हमारे वास्ते ज़मीन से चश्मा (न) बहा निकालोगे हम तो तुम पर हरगिज़ ईमान न लाएँगें
91أَوْ تَكُونَ لَكَ جَنَّةٌ مِّن نَّخِيلٍ وَعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْأَنْهَارَ خِلَالَهَا تَفْجِيرًا
या (ये नहीं तो) खजूरों और अंगूरों का तुम्हारा कोई बाग़ हो उसमें तुम बीच बीच में नहरे जारी करके दिखा दो
92أَوْ تُسْقِطَ السَّمَاءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا أَوْ تَأْتِيَ بِاللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ قَبِيلًا
या जैसा तुम गुमान रखते थे हम पर आसमान ही को टुकड़े (टुकड़े) करके गिराओ या ख़ुदा और फरिश्तों को (अपने क़ौल की तस्दीक़) में हमारे सामने (गवाही में ला खड़ा कर दिया
93أَوْ يَكُونَ لَكَ بَيْتٌ مِّن زُخْرُفٍ أَوْ تَرْقَىٰ فِي السَّمَاءِ وَلَن نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتَّىٰ تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتَابًا نَّقْرَؤُهُ ۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّي هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَرًا رَّسُولًا
और जब तक तुम हम पर ख़ुदा के यहाँ से एक किताब न नाज़िल करोगे कि हम उसे खुद पढ़ भी लें उस वक्त तक हम तुम्हारे (आसमान पर चढ़ने के भी) क़ायल न होगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सुबहान अल्लाह मै एक आदमी (ख़ुदा के) रसूल के सिवा आख़िर और क्या हूँ
94وَمَا مَنَعَ النَّاسَ أَن يُؤْمِنُوا إِذْ جَاءَهُمُ الْهُدَىٰ إِلَّا أَن قَالُوا أَبَعَثَ اللَّهُ بَشَرًا رَّسُولًا
(जो ये बेहूदा बातें करते हो) और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो उनको ईमान लाने से इसके सिवा किसी चीज़ ने न रोका कि वह कहने लगे कि क्या ख़ुदा ने आदमी को रसूल बनाकर भेजा है
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अनुवाद — अल-इसरा 92

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Tuesday, August 18, 2026

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