अल-इसरा · 93/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
أَوْ يَكُونَ لَكَ بَيْتٌ مِّن زُخْرُفٍ أَوْ تَرْقَىٰ فِي السَّمَاءِ وَلَن نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتَّىٰ تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتَابًا نَّقْرَؤُهُ ۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّي هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَرًا رَّسُولًا ۝٩٣
Aw yakoona laka baitum min zukhrufin aw tarqaa fis samaaa`i wa lan nu`mina liruqiyyika hatta tunazzila `alainaa kitaaban naqra`uh; qul Subhaana Rabbee hal kuntu illaa basharar Rasoolaa
📖 हिंदी अर्थ
और जब तक तुम हम पर ख़ुदा के यहाँ से एक किताब न नाज़िल करोगे कि हम उसे खुद पढ़ भी लें उस वक्त तक हम तुम्हारे (आसमान पर चढ़ने के भी) क़ायल न होगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सुबहान अल्लाह मै एक आदमी (ख़ुदा के) रसूल के सिवा आख़िर और क्या हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زُخْرُف (ज़ुख़रुफ़): सोना या सोने की सजावट।
  • تَرْقَى (तरक़ा): चढ़ना, ऊपर जाना।
  • لِرُقِيِّكَ (लिरुक़िय्यिक): तुम्हारे चढ़ने पर।
  • سُبْحَانَ رَبِّي (सुब्हाना रब्बी): मेरा रब पाक है (हर कमी और दोष से मुक्त है)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को उन काफ़िरों का जवाब सिखा रहा है, जिन्होंने हठधर्मी और ज़िद की हद पार कर दी थी। उन्होंने कहा था: "हम तुम पर ईमान नहीं लाएँगे जब तक कि तुम्हारे पास सोने का एक घर न हो, या तुम आसमान पर न चढ़ जाओ, और हम तुम्हारे चढ़ने पर भी ईमान नहीं लाएँगे जब तक कि तुम हमारे पास एक लिखी हुई किताब न लाओ जिसे हम पढ़ सकें (जिसमें तुम्हारे रसूल होने की गवाही हो)।"

अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को आदेश दिया कि वे इन हठधर्म लोगों को जवाब दें: "سُبْحَانَ رَبِّي" — मेरा रब पाक है! यह अल्लाह की पाकी बयान करना है, कि अल्लाह इन बातों से पाक है कि कोई उस पर अपनी मनमानी शर्तें थोपे। यह भी उनकी बातों पर तअज्जुब (आश्चर्य) का इज़हार है कि ये लोग कितनी अजीब और नामुमकिन माँगें कर रहे हैं।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "हल कुंतु इल्ला बशरन रसूला" — क्या मैं एक इंसान और रसूल के सिवा कुछ हूँ? यानी मैं अल्लाह का भेजा हुआ एक इंसान हूँ, मेरे पास अल्लाह की तरफ से वही (प्रकाशना) आती है, और मैं उसी का पैग़ाम पहुँचाता हूँ। मैं अपनी तरफ से कोई चमत्कार या कारनामा नहीं कर सकता। ये सारी चीज़ें अल्लाह के इख्तियार में हैं। अगर अल्लाह चाहे तो मुझे ये सब कुछ दे सकता है, लेकिन मेरा काम सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है, न कि तुम्हारी मनमानी शर्तें पूरी करना।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का आधार अल्लाह की रहमत और उसकी हिदायत है, न कि जादू या चमत्कारों की दौड़। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को सबसे बड़ा चमत्कार — कुरआन — दिया, जो आज तक क़ायम है और क़यामत तक क़ायम रहेगा। यह किताब हर उस शख्स के लिए काफी है जो सच्चे दिल से हिदायत चाहता है। हमें चाहिए कि हम नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल करें और उनके लाए हुए पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में उतारें। अल्लाह की रहमत और उसका दीन ही हमारी सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 91-95 — अल-इसरा

91أَوْ تَكُونَ لَكَ جَنَّةٌ مِّن نَّخِيلٍ وَعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْأَنْهَارَ خِلَالَهَا تَفْجِيرًا
या (ये नहीं तो) खजूरों और अंगूरों का तुम्हारा कोई बाग़ हो उसमें तुम बीच बीच में नहरे जारी करके दिखा दो
92أَوْ تُسْقِطَ السَّمَاءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا أَوْ تَأْتِيَ بِاللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ قَبِيلًا
या जैसा तुम गुमान रखते थे हम पर आसमान ही को टुकड़े (टुकड़े) करके गिराओ या ख़ुदा और फरिश्तों को (अपने क़ौल की तस्दीक़) में हमारे सामने (गवाही में ला खड़ा कर दिया
93أَوْ يَكُونَ لَكَ بَيْتٌ مِّن زُخْرُفٍ أَوْ تَرْقَىٰ فِي السَّمَاءِ وَلَن نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتَّىٰ تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتَابًا نَّقْرَؤُهُ ۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّي هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَرًا رَّسُولًا
और जब तक तुम हम पर ख़ुदा के यहाँ से एक किताब न नाज़िल करोगे कि हम उसे खुद पढ़ भी लें उस वक्त तक हम तुम्हारे (आसमान पर चढ़ने के भी) क़ायल न होगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सुबहान अल्लाह मै एक आदमी (ख़ुदा के) रसूल के सिवा आख़िर और क्या हूँ
94وَمَا مَنَعَ النَّاسَ أَن يُؤْمِنُوا إِذْ جَاءَهُمُ الْهُدَىٰ إِلَّا أَن قَالُوا أَبَعَثَ اللَّهُ بَشَرًا رَّسُولًا
(जो ये बेहूदा बातें करते हो) और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो उनको ईमान लाने से इसके सिवा किसी चीज़ ने न रोका कि वह कहने लगे कि क्या ख़ुदा ने आदमी को रसूल बनाकर भेजा है
95قُل لَّوْ كَانَ فِي الْأَرْضِ مَلَائِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ज़मीन पर फ़रिश्ते (बसे हुये) होते कि इत्मेनान से चलते फिरते तो हम उन लोगों के पास फ़रिश्ते ही को रसूल बनाकर नाज़िल करते
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अनुवाद — अल-इसरा 93

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Tuesday, August 18, 2026

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