Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- زُخْرُف (ज़ुख़रुफ़): सोना या सोने की सजावट।
- تَرْقَى (तरक़ा): चढ़ना, ऊपर जाना।
- لِرُقِيِّكَ (लिरुक़िय्यिक): तुम्हारे चढ़ने पर।
- سُبْحَانَ رَبِّي (सुब्हाना रब्बी): मेरा रब पाक है (हर कमी और दोष से मुक्त है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को उन काफ़िरों का जवाब सिखा रहा है, जिन्होंने हठधर्मी और ज़िद की हद पार कर दी थी। उन्होंने कहा था: "हम तुम पर ईमान नहीं लाएँगे जब तक कि तुम्हारे पास सोने का एक घर न हो, या तुम आसमान पर न चढ़ जाओ, और हम तुम्हारे चढ़ने पर भी ईमान नहीं लाएँगे जब तक कि तुम हमारे पास एक लिखी हुई किताब न लाओ जिसे हम पढ़ सकें (जिसमें तुम्हारे रसूल होने की गवाही हो)।"
अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को आदेश दिया कि वे इन हठधर्म लोगों को जवाब दें: "سُبْحَانَ رَبِّي" — मेरा रब पाक है! यह अल्लाह की पाकी बयान करना है, कि अल्लाह इन बातों से पाक है कि कोई उस पर अपनी मनमानी शर्तें थोपे। यह भी उनकी बातों पर तअज्जुब (आश्चर्य) का इज़हार है कि ये लोग कितनी अजीब और नामुमकिन माँगें कर रहे हैं।
फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "हल कुंतु इल्ला बशरन रसूला" — क्या मैं एक इंसान और रसूल के सिवा कुछ हूँ? यानी मैं अल्लाह का भेजा हुआ एक इंसान हूँ, मेरे पास अल्लाह की तरफ से वही (प्रकाशना) आती है, और मैं उसी का पैग़ाम पहुँचाता हूँ। मैं अपनी तरफ से कोई चमत्कार या कारनामा नहीं कर सकता। ये सारी चीज़ें अल्लाह के इख्तियार में हैं। अगर अल्लाह चाहे तो मुझे ये सब कुछ दे सकता है, लेकिन मेरा काम सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है, न कि तुम्हारी मनमानी शर्तें पूरी करना।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का आधार अल्लाह की रहमत और उसकी हिदायत है, न कि जादू या चमत्कारों की दौड़। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को सबसे बड़ा चमत्कार — कुरआन — दिया, जो आज तक क़ायम है और क़यामत तक क़ायम रहेगा। यह किताब हर उस शख्स के लिए काफी है जो सच्चे दिल से हिदायत चाहता है। हमें चाहिए कि हम नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल करें और उनके लाए हुए पैग़ाम को अपनी ज़िंदगी में उतारें। अल्लाह की रहमत और उसका दीन ही हमारी सच्ची कामयाबी है।
📜 आयत 91-95 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 93
सूरा अल-इसरा आयत 93 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तक तुम हम पर ख़ुदा के यहाँ से…सूरा आयत 93/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 91–95. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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