अल-कहफ · 101/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
الَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِي غِطَاءٍ عَن ذِكْرِي وَكَانُوا لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا ۝١٠١
Allazeena kaanat a`yunuhum fee ghitaaa`in `an zikree wa kaanoo la yastatee`oona sam`aa
📖 हिंदी अर्थ
और उसी (रसूल की दुश्मनी की सच्ची बात) कुछ भी सुन ही न सकते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अ'युनुहुम (उनकी आँखें): यहाँ आँखों से मुराद सिर्फ़ देखने वाली आँखें नहीं, बल्कि दिल की आँखें (बसीरत) हैं, यानी समझने और सोचने की शक्ति।
  • ग़िता (पर्दा/आवरण): ऐसा पर्दा जो हक़ को देखने से रोक दे।
  • ज़िक्री (मेरी याद): यहाँ मुराद क़ुरआन और ईमान की दावत है।
  • ला यस्तती'ऊन साम'आ (वे सुनने की ताक़त नहीं रखते): यानी हक़ की बात को क़बूल करने के लिए सुनना भी उनके लिए नामुमकिन था।

तफ़सीर:

यह आयत उन काफ़िरों का हाल बयान कर रही है जिन्हें क़यामत के दिन जहन्नम के सामने पेश किया जाएगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये वो लोग हैं जिनकी आँखों पर दुनिया में हक़ की निशानियाँ देखने का पर्दा पड़ा हुआ था। वे अल्लाह की आयतों और निशानियों को देखते हुए भी नहीं देखते थे, क्योंकि उनके दिल अंधे थे। उनकी आँखें खुली थीं, मगर बसीरत (दिल की आँख) बंद थी। वे क़ुरआन और अल्लाह की याद से इतना दूर हो गए थे कि जब उन्हें हक़ की दावत दी जाती तो वे उसे सुनना ही गवारा नहीं करते थे। उनके कान काम करते थे, मगर दिल के कान बहरे थे — वे सुनते थे, लेकिन क़बूल करने के लिए नहीं, बल्कि झुठलाने और मज़ाक उड़ाने के लिए।

यह आयत हमें बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की याद और उसके कलाम (क़ुरआन) से दूर रहने वाला इंसान धीरे-धीरे ऐसा हो जाता है कि हक़ उसके सामने आए तो भी वह उसे देख नहीं पाता और सच्ची बात उसके कानों में पड़े तो भी वह उसे सुन नहीं पाता। यह अल्लाह की तरफ़ से एक सज़ा है जो इंसान को उसके अपने अंदाज़े से मिलती है — जो हक़ से मुँह मोड़ता है, उसका दिल हक़ के लिए बंद कर दिया जाता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने दिलों को क़ुरआन और ज़िक्र से जोड़े रखें। जो इंसान रोज़ क़ुरआन पढ़ता है, उस पर अमल करता है और अल्लाह को याद करता है, उसकी आँखें हक़ को देखने लगती हैं और उसके कान हिदायत की आवाज़ सुनने लगते हैं। अल्लाह तआला हम सबको हिदायत की रौशनी दे और हमारे दिलों को क़ुरआन से जोड़े। आमीन।



📜 आयत 99-103 — अल-कहफ

99۞ وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ فِي بَعْضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا
और हम उस दिन (उन्हें उनकी हालत पर) छोड़ देंगे कि एक दूसरे में (टकरा के दरिया की) लहरों की तरह गुड़मुड़ हो जाएँ और सूर फूँका जाएगा तो हम सब को इकट्ठा करेंगे
100وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِّلْكَافِرِينَ عَرْضًا
और उसी दिन जहन्नुम को उन काफिरों के सामने खुल्लम खुल्ला पेश करेंगे
101الَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِي غِطَاءٍ عَن ذِكْرِي وَكَانُوا لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا
और उसी (रसूल की दुश्मनी की सच्ची बात) कुछ भी सुन ही न सकते थे
102أَفَحَسِبَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَن يَتَّخِذُوا عِبَادِي مِن دُونِي أَوْلِيَاءَ ۚ إِنَّا أَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِرِينَ نُزُلًا
तो क्या जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया इस ख्याल में हैं कि हमको छोड़कर हमारे बन्दों को अपना सरपरस्त बना लें (कुछ पूछगछ न होगी) (अच्छा सुनो) हमने काफिरों की मेहमानदारी के लिए जहन्नुम तैयार कर रखी है
103قُلْ هَلْ نُنَبِّئُكُم بِالْأَخْسَرِينَ أَعْمَالًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या हम उन लोगों का पता बता दें जो लोग आमाल की हैसियत से बहुत घाटे में हैं
अल-कहफकुरान सूची
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101आयत

अनुवाद — अल-कहफ 101

सूरा अल-कहफ आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी (रसूल की दुश्मनी की सच्ची बात) कुछ भी…

सूरा आयत 101/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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