अल-कहफ · 100/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِّلْكَافِرِينَ عَرْضًا ۝١٠٠
Wa `aradnaa jahannama Yawma`izil lilkaafireena `ardaa
📖 हिंदी अर्थ
और उसी दिन जहन्नुम को उन काफिरों के सामने खुल्लम खुल्ला पेश करेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَرَضْنَا (हम पेश करेंगे): दिखाना, सामने लाना, प्रस्तुत करना।
  • جَهَنَّمَ (जहन्नम): नरक, दोज़ख़।
  • يَوْمَئِذٍ (उस दिन): क़ियामत के दिन।
  • لِلْكَافِرِينَ (काफ़िरों के लिए): जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को नकारा।
  • عَرْضًا (पेश करना): स्पष्ट रूप से दिखाना, बिल्कुल सामने लाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़ियामत के दिन हम जहन्नम को काफ़िरों के सामने इस तरह पेश करेंगे कि वे उसे अपनी आँखों से साफ़ देख लेंगे। यह पेश करना कोई छिपा हुआ या अस्पष्ट नहीं होगा, बल्कि बिल्कुल ज़ाहिर और साफ़ होगा, ताकि उन्हें अपने किए की सज़ा का अंदाज़ा हो जाए और उनके लिए कोई बहाना न बचे।

यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने अमल का नतीजा देखेगा। काफ़िरों के लिए यह मंज़र बेहद खौफ़नाक होगा, क्योंकि वे जहन्नम को अपनी आँखों से देखेंगे और समझ जाएँगे कि यही उनका ठिकाना है। यह अल्लाह की तरफ से एक तरह का इंतिहान और डरावना इशारा होगा, ताकि वे अपनी ग़लती का एहसास करें, लेकिन उस वक़्त पछतावा किसी काम न आएगा।

यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हम पर अपनी रहमत से इस दुनिया में ईमान और नेक अमल की तौफ़ीक़ दी है। हमें चाहिए कि हम उस दिन से पहले अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों को मानें और उसकी नाफ़रमानी से बचें। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उनके लिए उस दिन खुशख़बरी है, जबकि काफ़िरों के लिए यही मंज़र अज़ाब का ज़रिया बनेगा।

अल्लाह हमें उस दिन के खौफ़ से बचाए और हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 98-102 — सूरा अल-कहफ

98قَالَ هَٰذَا رَحْمَةٌ مِّن رَّبِّي ۖ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ رَبِّي جَعَلَهُ دَكَّاءَ ۖ وَكَانَ وَعْدُ رَبِّي حَقًّا
जुलक़रनैन ने (दीवार को देखकर) कहा ये मेरे परवरदिगार की मेहरबानी है मगर जब मेरे परवरदिगार का वायदा (क़यामत) आयेगा तो इसे ढहा कर हमवार कर देगा और मेरे परवरदिगार का वायदा सच्चा है
99۞ وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ فِي بَعْضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا
और हम उस दिन (उन्हें उनकी हालत पर) छोड़ देंगे कि एक दूसरे में (टकरा के दरिया की) लहरों की तरह गुड़मुड़ हो जाएँ और सूर फूँका जाएगा तो हम सब को इकट्ठा करेंगे
100وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِّلْكَافِرِينَ عَرْضًا
और उसी दिन जहन्नुम को उन काफिरों के सामने खुल्लम खुल्ला पेश करेंगे
101الَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِي غِطَاءٍ عَن ذِكْرِي وَكَانُوا لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا
और उसी (रसूल की दुश्मनी की सच्ची बात) कुछ भी सुन ही न सकते थे
102أَفَحَسِبَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَن يَتَّخِذُوا عِبَادِي مِن دُونِي أَوْلِيَاءَ ۚ إِنَّا أَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِرِينَ نُزُلًا
तो क्या जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया इस ख्याल में हैं कि हमको छोड़कर हमारे बन्दों को अपना सरपरस्त बना लें (कुछ पूछगछ न होगी) (अच्छा सुनो) हमने काफिरों की मेहमानदारी के लिए जहन्नुम तैयार कर रखी है
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
100आयत

अनुवाद — अल-कहफ 100

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Friday, October 2, 2026

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