अल-कहफ · 48/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَعُرِضُوا عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًا ۝٤٨
Wa `uridoo `alaa Rabbika saffaa, laqad ji`tumoonaa kamaa khalaqnaakum awala marrah; bal za`amtum allannaj`ala lakum maw`idaa
📖 हिंदी अर्थ
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَعُرِضُوا – और वे पेश किए जाएँगे
  • صَفًّا – कतारों में, पंक्तिबद्ध होकर
  • كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ – जैसे हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था
  • بَلْ زَعَمْتُمْ – बल्कि तुमने यह दावा किया था
  • مَوْعِدًا – वादा किया हुआ समय (पुनरुत्थान का दिन)

तफसीर:

उस दिन सभी लोगों को आपके रब के सामने पंक्तिबद्ध होकर पेश किया जाएगा, और कोई भी उनसे छिपा नहीं रहेगा। तब अल्लाह तआला उनसे फरमाएगा: "तुम हमारे पास उसी तरह अकेले-अकेले आ गए हो, जिस तरह हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था – नंगे पाँव, बिना कपड़ों के, बिना किसी साथी के, न तुम्हारे पास धन है, न औलाद, न कोई सहारा। जो कुछ तुमने दुनिया में कमाया था, वह सब वहीं छूट गया।"

यह वह समय होगा जब हर इंसान अपनी आँखों से देख लेगा कि अल्लाह का वादा सच्चा था, और पुनरुत्थान का दिन निश्चित रूप से आने वाला था। लेकिन अफसोस! दुनिया में रहते हुए तुमने यह दावा किया था कि अल्लाह हमें दोबारा नहीं उठाएगा, और हमारे लिए कोई निर्धारित समय नहीं है जिसमें हमें जवाबदेह ठहराया जाए। तुमने आख़िरत को मानने से इनकार किया और अपने कर्मों का हिसाब देना बिल्कुल भूल गए।

यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया केवल एक परीक्षा का स्थान है। जिस प्रकार हम अकेले इस दुनिया में आए थे, उसी प्रकार हमें अकेले ही अपने रब के सामने खड़ा होना है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ, अपने कर्मों को सुधारें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हमें अपने हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब देना होगा। यह दिन निश्चित रूप से आने वाला है, और अल्लाह का वादा सत्य है। जो लोग इस पर ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो इससे मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए अफसोस और पछतावे के सिवा कुछ नहीं।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अल-कहफ

46الْمَالُ وَالْبَنُونَ زِينَةُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं
47وَيَوْمَ نُسَيِّرُ الْجِبَالَ وَتَرَى الْأَرْضَ بَارِزَةً وَحَشَرْنَاهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ أَحَدًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएँगें और तुम ज़मीन को खुला मैदान (पहाड़ों से) खाली देखोगे और हम इन सभी को इकट्ठा करेगे तो उनमें से एक को न छोड़ेगें
48وَعُرِضُوا عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًا
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
49وَوُضِعَ الْكِتَابُ فَتَرَى الْمُجْرِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا فِيهِ وَيَقُولُونَ يَا وَيْلَتَنَا مَالِ هَٰذَا الْكِتَابِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةً وَلَا كَبِيرَةً إِلَّا أَحْصَاهَا ۚ وَوَجَدُوا مَا عَمِلُوا حَاضِرًا ۗ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ أَحَدًا
और लोगों के आमाल की किताब (सामने) रखी जाएँगी तो तुम गुनेहगारों को देखोगे कि जो कुछ उसमें (लिखा) है (देख देख कर) सहमे हुए हैं और कहते जाते हैं हाए हमारी यामत ये कैसी किताब है कि न छोटे ही गुनाह को बे क़लमबन्द किए छोड़ती है न बड़े गुनाह को और जो कुछ इन लोगों ने (दुनिया में) किया था वह सब (लिखा हुआ) मौजूद पाएँगें और तेरा परवरदिगार किसी पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म न करेगा
50وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ الْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُ وَذُرِّيَّتَهُ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِي وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّ ۚ بِئْسَ لِلظَّالِمِينَ بَدَلًا
और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है
अल-कहफकुरान सूची
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मक्कीRevelation
48आयत

अनुवाद — अल-कहफ 48

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Tuesday, August 18, 2026

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