मरियम · 30/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
قَالَ إِنِّي عَبْدُ اللَّهِ آتَانِيَ الْكِتَابَ وَجَعَلَنِي نَبِيًّا ۝٣٠
Qaala innee `abdullaahi aataaniyal Kitaaba wa ja`alanee Nabiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
(इस पर वह बच्चा कुदरते खुदा से) बोल उठा कि मैं बेशक खुदा का बन्दा हूँ मुझ को उसी ने किताब (इन्जील) अता फरमाई है और मुझ को नबी बनाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَبْدُ اللهِ: अल्लाह का बंदा (दास)।
  • آتَانِيَ الْكِتَابَ: मुझे किताब (इंजील) प्रदान की।
  • وَجَعَلَنِي نَبِيًّا: और मुझे नबी बनाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने जब अपनी माँ मरियम (अलैहिस्सलाम) की ओर इशारा करते हुए बोलना शुरू किया, तो उन्होंने सबसे पहले अपनी पहचान स्पष्ट की। वे उस समय मात्र एक शिशु थे, पालने में लेटे हुए, लेकिन अल्लाह की क़ुदरत से वे बोल रहे थे। उन्होंने कहा: "मैं अल्लाह का बंदा हूँ।" यह कहकर उन्होंने उस झूठे आरोप का खंडन किया जो उनकी माँ पर लगाया गया था, और यह भी स्पष्ट किया कि वे अल्लाह की संतान नहीं हैं, बल्कि उसके आज्ञाकारी बंदे हैं। उन्होंने आगे कहा: "अल्लाह ने मुझे किताब (इंजील) प्रदान की है और मुझे नबी बनाया है।" यानी अल्लाह ने उन्हें बचपन में ही ज्ञान और समझ दी, और उन्हें अपने पैग़म्बरों में से एक चुना। यह उनकी महानता और अल्लाह की विशेष कृपा का प्रमाण था कि वे शिशु होते हुए भी इतनी स्पष्ट और सच्ची बातें कर रहे थे, जो उनकी पवित्रता और ईमानदारी की गवाही देती हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई चीज़ असंभव नहीं है। एक नवजात शिशु को बोलने की शक्ति देना अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। साथ ही, हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का अपने आप को "अल्लाह का बंदा" कहना हमें सिखाता है कि सबसे बड़ी इज़्ज़त और शराफ़त अल्लाह की बंदगी में है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के बंदे बनकर रहना चाहिए, उसकी इबादत करनी चाहिए और उसके दिए हुए ज्ञान और नेमतों का सही उपयोग करना चाहिए। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को किसी भी उम्र में विशेष सम्मान और ज्ञान दे सकता है, इसलिए हमें कभी अपनी उम्र या हालात को अपने ईमान और अमल में रुकावट नहीं बनने देना चाहिए।



📜 आयत 28-32 — मरियम

28يَا أُخْتَ هَارُونَ مَا كَانَ أَبُوكِ امْرَأَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا
ऐ हारून की बहन न तो तेरा बाप ही बुरा आदमी था और न तो तेरी माँ ही बदकार थी (ये तूने क्या किया)
29فَأَشَارَتْ إِلَيْهِ ۖ قَالُوا كَيْفَ نُكَلِّمُ مَن كَانَ فِي الْمَهْدِ صَبِيًّا
तो मरियम ने उस लड़के की तरफ इशारा किया ( कि जो कुछ पूछना है इससे पूछ लो) और वह लोग बोले भला हम गोद के बच्चे से क्योंकर बात करें
30قَالَ إِنِّي عَبْدُ اللَّهِ آتَانِيَ الْكِتَابَ وَجَعَلَنِي نَبِيًّا
(इस पर वह बच्चा कुदरते खुदा से) बोल उठा कि मैं बेशक खुदा का बन्दा हूँ मुझ को उसी ने किताब (इन्जील) अता फरमाई है और मुझ को नबी बनाया
31وَجَعَلَنِي مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَانِي بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ مَا دُمْتُ حَيًّا
और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और मुझ को जब तक ज़िन्दा रहूँ नमाज़ पढ़ने ज़कात देने की ताकीद की है और मुझ को अपनी वालेदा का फ़रमाबरदार बनाया
32وَبَرًّا بِوَالِدَتِي وَلَمْ يَجْعَلْنِي جَبَّارًا شَقِيًّا
और (अलहमदोलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
30आयत

अनुवाद — मरियम 30

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Wednesday, August 19, 2026

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