मरियम · 31/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَجَعَلَنِي مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَانِي بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ مَا دُمْتُ حَيًّا ۝٣١
Wa ja`alanee mubaarakan aina maa kuntu wa awsaanee bis Salaati waz Zakaati maa dumtu haiyaa
📖 हिंदी अर्थ
और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और मुझ को जब तक ज़िन्दा रहूँ नमाज़ पढ़ने ज़कात देने की ताकीद की है और मुझ को अपनी वालेदा का फ़रमाबरदार बनाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُبَارَكًا (मुबारकन): अत्यंत भलाई और लाभ वाला, जिससे लोगों को खूब नेकी और फायदा पहुंचे।
  • أَوْصَانِي (औसानी): मुझे आदेश दिया, मुझे नसीहत की।
  • مَا دُمْتُ حَيًّا (मा दुम्तु हय्यन): जब तक मैं जीवित रहूं।

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) अपनी पैदाइश के बाद पालने में बोलते हुए अपनी नबुव्वत की घोषणा कर रहे थे। वे बताते हैं कि अल्लाह ने उन्हें कितनी बड़ी नेमतों से नवाज़ा है। उन्होंने कहा: "अल्लाह ने मुझे मुबारक बनाया है, यानी मुझे हर जगह और हर हाल में लोगों के लिए भलाई, हिदायत और रहमत का ज़रिया बनाया है। मैं जहां भी रहूं, जिन लोगों से भी मिलूं, उनके लिए नेकी और बरकत का सबब बनूं। मेरी ज़िंदगी, मेरी तालीम, मेरी दुआएं — सब कुछ लोगों के लिए रहमत और फायदे का ज़रिया हो।"

फिर उन्होंने कहा: "अल्लाह ने मुझे नमाज़ और ज़कात का पाबंद रहने का हुक्म दिया है, जब तक मैं ज़िंदा रहूं। यानी मेरी पूरी ज़िंदगी इबादत और बंदों के हक़ अदा करने में गुज़रेगी। नमाज़ अल्लाह से रिश्ता जोड़ती है और ज़कात लोगों से रिश्ता जोड़ती है। ये दोनों चीज़ें मिलकर इंसान को दुनिया और आख़िरत में कामयाब बनाती हैं।"

ये बातें सिर्फ हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के लिए नहीं थीं, बल्कि हर मुसलमान के लिए सबक हैं। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को दूसरों के लिए बरकत और भलाई का ज़रिया बनाएं। जहां भी रहें, लोगों को फायदा पहुंचाएं, उनकी मदद करें, उन्हें नेकी की तरफ बुलाएं। और साथ ही नमाज़ की पाबंदी और ज़कात की अदायगी को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं। याद रखें, ये दोनों इबादतें हमें अल्लाह के करीब लाती हैं और हमारे दिलों को साफ करती हैं। जो इंसान इन पर अमल करता है, वही सच्चा मुबारक और कामयाब इंसान है। अल्लाह हमें भी इन आदेशों पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 29-33 — मरियम

29فَأَشَارَتْ إِلَيْهِ ۖ قَالُوا كَيْفَ نُكَلِّمُ مَن كَانَ فِي الْمَهْدِ صَبِيًّا
तो मरियम ने उस लड़के की तरफ इशारा किया ( कि जो कुछ पूछना है इससे पूछ लो) और वह लोग बोले भला हम गोद के बच्चे से क्योंकर बात करें
30قَالَ إِنِّي عَبْدُ اللَّهِ آتَانِيَ الْكِتَابَ وَجَعَلَنِي نَبِيًّا
(इस पर वह बच्चा कुदरते खुदा से) बोल उठा कि मैं बेशक खुदा का बन्दा हूँ मुझ को उसी ने किताब (इन्जील) अता फरमाई है और मुझ को नबी बनाया
31وَجَعَلَنِي مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَانِي بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ مَا دُمْتُ حَيًّا
और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और मुझ को जब तक ज़िन्दा रहूँ नमाज़ पढ़ने ज़कात देने की ताकीद की है और मुझ को अपनी वालेदा का फ़रमाबरदार बनाया
32وَبَرًّا بِوَالِدَتِي وَلَمْ يَجْعَلْنِي جَبَّارًا شَقِيًّا
और (अलहमदोलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया
33وَالسَّلَامُ عَلَيَّ يَوْمَ وُلِدتُّ وَيَوْمَ أَمُوتُ وَيَوْمَ أُبْعَثُ حَيًّا
और (खुदा की तरफ़ से) जिस दिन मैं पैदा हुआ हूँ और जिस दिन मरूँगा मुझ पर सलाम है और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा कर खड़ा किया जाऊँगा
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
31आयत

अनुवाद — मरियम 31

सूरा मरियम आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और…

सूरा आयत 31/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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