मरियम · 98/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًا ۝٩٨
Wa kam ahlaknaa qabla hum min qarnin hal tuhissu minhum min ahadin aw tasma`u lahum rikzaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला भला तुम उनमें से किसी को (कहीं देखते हो) उसकी कुछ भनक भी सुनते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَرْنٍ (क़र्न): उम्मत, समुदाय या युग के लोग।
  • تُحِسُّ (तुहिस्सु): तुम महसूस करते हो, देखते हो या पहचानते हो।
  • رِكْزًا (रिक्ज़न): हल्की आवाज़, धीमी आहट, या कोई भी आवाज़।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपकी क़ौम से पहले कितनी ही उम्मतों को हलाक (नष्ट) कर दिया। वे अपनी ताक़त, अपनी आबादी और अपनी तमद्दुन (सभ्यता) पर इतराती थीं, लेकिन जब उन्होंने हमारे पैग़म्बरों को झुठलाया और हक़ (सत्य) को क़बूल करने से इनकार किया, तो हमारा अज़ाब (प्रकोप) उन पर आ पड़ा। आज आप उनमें से किसी एक को भी देख सकते हैं? या उनकी कोई हल्की सी आवाज़ भी सुन सकते हैं? नहीं! वे सब मिट गए, उनके नाम तक मिट गए, उनके घर उजड़ गए, और उनका कोई निशान बाक़ी न रहा।

यह एक बड़ी सीख और चेतावनी है। जिस तरह अल्लाह ने पहले की उम्मतों को उनके कुफ़्र और सरकशी (अवज्ञा) की वजह से तबाह किया, उसी तरह वह इन मक्का के काफ़िरों को भी तबाह कर सकता है। अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे कोई नहीं ठहर सकता। यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो हक़ को नकारते हैं और नबी की दावत को झुठलाते हैं।

लेकिन इसी के साथ इसमें रहमत (दया) का पैग़ाम भी है कि अल्लाह ने अपने रसूल को यह बताकर तसल्ली दी कि ये मुख़ालिफ़ीन (विरोधी) कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, उनका अंजाम वही होगा जो पहले के ज़ालिमों का हुआ। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके रसूलों को झुठलाते हैं, वे कभी बच नहीं सकते।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करनी चाहिए और उसकी रहमत के तले पनाह लेनी चाहिए। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख़्त है। हमें चाहिए कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें, अपने नबी की सुन्नत पर चलें, और अल्लाह की रहमत के दामन को थामे रहें। यही कामयाबी की राह है।



📜 आयत 96-98 — सूरा मरियम

96إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَيَجْعَلُ لَهُمُ الرَّحْمَٰنُ وُدًّا
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए अनक़रीब ही खुदा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा
97فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لِتُبَشِّرَ بِهِ الْمُتَّقِينَ وَتُنذِرَ بِهِ قَوْمًا لُّدًّا
(ऐ रसूल) हमने उस कुरान को तुम्हारी (अरबी) जुबान में सिर्फ इसलिए आसान कर दिया है कि तुम उसके ज़रिए से परहेज़गारों को (जन्नत की) खुशख़बरी दो और (अरब की) झगड़ालू क़ौम को (अज़ाबे खुदा से) डराओ
98وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًا
और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला भला तुम उनमें से किसी को (कहीं देखते हो) उसकी कुछ भनक भी सुनते हो
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98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
98आयत

अनुवाद — मरियम 98

सूरा मरियम आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला…

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Thursday, October 1, 2026

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