अल-बकरा · 153/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَعِينُوا بِالصَّبْرِ وَالصَّلَاةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ ۝١٥٣
Yaaa ayyuhal laazeena aamanus ta`eenoo bissabri was Salaah; innal laaha ma`as-saabireen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَعِينُوا: मदद माँगो, सहायता चाहो।
  • بِالصَّبْرِ: धैर्य और सब्र से।
  • وَالصَّلَاةِ: और नमाज़ से।
  • مَعَ الصَّابِرِينَ: सब्र करने वालों के साथ (अल्लाह की विशेष सहायता और समर्थन)।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! तुम अपने सभी मामलों में अल्लाह से मदद माँगो — सब्र और नमाज़ के ज़रिए। सब्र का मतलब है: मुसीबतों और दुखों पर धैर्य रखना, गुनाहों और पापों से बचना, और अल्लाह की आज्ञा पालन और इबादत पर डटे रहना। नमाज़ वह चीज़ है जो दिल को सुकून देती है, बुराई और अश्लील कामों से रोकती है, और इंसान को अल्लाह से जोड़ती है।

जब कोई इंसान इन दो चीज़ों — सब्र और नमाज़ — के सहारे अल्लाह से मदद माँगता है, तो अल्लाह उसके साथ होता है। यहाँ "अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है" का मतलब यह है कि अल्लाह उन्हें अपनी विशेष मदद, तौफ़ीक़ (सफलता), और सहायता प्रदान करता है। यह अल्लाह की वह खास मौजूदगी है जो सिर्फ़ ईमान वालों और सब्र करने वालों को मिलती है — जो उनकी हिफ़ाज़त, रहनुमाई और नुसरत (मदद) की शक्ल में होती है। (अल्लाह की सामान्य मौजूदगी, जिसका मतलब उसका सब कुछ जानना और घेरना है, सभी मख़लूक़ात के साथ है।)


फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर मुश्किल में — चाहे वह दुख हो, बीमारी हो, या कोई परेशानी — हमें सबसे पहले अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए, और सब्र तथा नमाज़ को अपना हथियार बनाना चाहिए।
  2. नमाज़ सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि एक ऐसा ज़रिया है जो इंसान को ताक़त, सुकून और हिम्मत देती है। जब दिल घबराए, तो नमाज़ में अल्लाह से बात करना सबसे बड़ा इलाज है।
  3. सब्र का इनाम बहुत बड़ा है — अल्लाह सब्र करने वालों के साथ होता है। यानी जो लोग मुसीबत में धैर्य रखते हैं और गुनाहों से बचते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  4. यह आयत हमें बताती है कि ईमान वालों की पहचान यह है कि वे मुश्किलों में घबराते नहीं, बल्कि सब्र और नमाज़ के ज़रिए अल्लाह से मदद माँगते हैं — और यही उनकी कामयाबी की कुंजी है।
  5. इस आयत से हमें यह उम्मीद मिलती है कि चाहे हालात कितने भी बुरे हों, अल्लाह की मदद सब्र करने वालों के साथ है — बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 151-155 — अल-बकरा

151كَمَا أَرْسَلْنَا فِيكُمْ رَسُولًا مِّنكُمْ يَتْلُو عَلَيْكُمْ آيَاتِنَا وَيُزَكِّيكُمْ وَيُعَلِّمُكُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ
और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुम ही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी
152فَاذْكُرُونِي أَذْكُرْكُمْ وَاشْكُرُوا لِي وَلَا تَكْفُرُونِ
पस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा ज़िक्र (खैर) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो
153يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَعِينُوا بِالصَّبْرِ وَالصَّلَاةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है
154وَلَا تَقُولُوا لِمَن يُقْتَلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ أَمْوَاتٌ ۚ بَلْ أَحْيَاءٌ وَلَٰكِن لَّا تَشْعُرُونَ
और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग ज़िन्दा हैं मगर तुम उनकी ज़िन्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते
155وَلَنَبْلُوَنَّكُم بِشَيْءٍ مِّنَ الْخَوْفِ وَالْجُوعِ وَنَقْصٍ مِّنَ الْأَمْوَالِ وَالْأَنفُسِ وَالثَّمَرَاتِ ۗ وَبَشِّرِ الصَّابِرِينَ
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी दे दो
अल-बकराकुरान सूची
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अनुवाद — अल-बकरा 153

सूरा अल-बकरा आयत 153 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए…

सूरा आयत 153/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 151–155. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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