Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَكْتُمُونَ – छिपाना, छुपाना
- الْبَيِّنَاتِ – स्पष्ट प्रमाण, वे आयतें और चमत्कार जो सत्य को प्रकट करती हैं
- الْهُدَى – मार्गदर्शन, वह शिक्षाएँ जो सही रास्ता दिखाती हैं
- يَلْعَنُهُمُ – उन्हें रहमत से दूर करे, शाप दे
- اللَّاعِنُونَ – शाप देने वाले, अर्थात सभी मख़लूक़ात (सृष्टि)
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की भेजी हुई स्पष्ट निशानियों और मार्गदर्शन को छिपाते हैं। अल्लाह ने अपनी किताबों (तौरात, इंजील, ज़बूर) में सच्चाई को स्पष्ट रूप से बयान कर दिया था, और अंतिम नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आने की ख़बरें भी दे दी थीं। लेकिन अहले-किताब के विद्वानों ने अपनी दुनियावी ख्वाहिशों और रुतबे के डर से इन सच्चाइयों को छिपा दिया। उन्होंने अपनी किताबों में मौजूद उन आयतों को तहरीफ़ (बदलाव) के ज़रिए छुपाया या बदल दिया, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई की गवाही देती थीं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों पर अल्लाह की लानत है, यानी वे अल्लाह की रहमत से महरूम होंगे। और सिर्फ अल्लाह ही नहीं, बल्कि सारी सृष्टि – फ़रिश्ते, इंसान, जिन्नात – सब उनके लिए बद्दुआ करेंगे। यह कोई मामूली सज़ा नहीं है; यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी रुसवाई और अज़ाब है जो जान-बूझकर हक़ को छिपाते हैं।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि इल्म (ज्ञान) अमानत है। जिसे अल्लाह ने इल्म दिया, उसे चाहिए कि वह उसे बयान करे, छिपाए नहीं। आज भी जो लोग दीन की सच्चाइयों को जानते हुए भी अपने फायदे के लिए छिपाते हैं या गलत तरीके से पेश करते हैं, वे इसी वर्ग में शामिल हो सकते हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को छिपाना बहुत बड़ा गुनाह है, और सच्चाई को फैलाना बहुत बड़ी इबादत है।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम जो भी दीन का इल्म रखते हैं, उसे दूसरों तक पहुँचाएँ। अगर हम किसी को एक अच्छी बात सिखा दें, तो यह हमारे लिए सदका-ए-जारिया है। अल्लाह हमें सच्चाई को छिपाने से बचाए और हमें हक़ को फैलाने वाला बनाए। आमीन।
📜 आयत 157-161 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 159
सूरा अल-बकरा आयत 159 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को…सूरा आयत 159/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 157–161. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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