अल-बकरा · 159/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَىٰ مِن بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِ ۙ أُولَٰئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَ ۝١٥٩
Innal lazeena yaktumoona maaa anzalnaa minal baiyinaati walhudaa mim ba`di maa baiyannaahu linnaasi fil kitaabi ulaaa`ika yal`anuhumul laahu wa yal`anuhumul laa `inoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَكْتُمُونَ – छिपाना, छुपाना
  • الْبَيِّنَاتِ – स्पष्ट प्रमाण, वे आयतें और चमत्कार जो सत्य को प्रकट करती हैं
  • الْهُدَى – मार्गदर्शन, वह शिक्षाएँ जो सही रास्ता दिखाती हैं
  • يَلْعَنُهُمُ – उन्हें रहमत से दूर करे, शाप दे
  • اللَّاعِنُونَ – शाप देने वाले, अर्थात सभी मख़लूक़ात (सृष्टि)

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की भेजी हुई स्पष्ट निशानियों और मार्गदर्शन को छिपाते हैं। अल्लाह ने अपनी किताबों (तौरात, इंजील, ज़बूर) में सच्चाई को स्पष्ट रूप से बयान कर दिया था, और अंतिम नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आने की ख़बरें भी दे दी थीं। लेकिन अहले-किताब के विद्वानों ने अपनी दुनियावी ख्वाहिशों और रुतबे के डर से इन सच्चाइयों को छिपा दिया। उन्होंने अपनी किताबों में मौजूद उन आयतों को तहरीफ़ (बदलाव) के ज़रिए छुपाया या बदल दिया, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई की गवाही देती थीं।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों पर अल्लाह की लानत है, यानी वे अल्लाह की रहमत से महरूम होंगे। और सिर्फ अल्लाह ही नहीं, बल्कि सारी सृष्टि – फ़रिश्ते, इंसान, जिन्नात – सब उनके लिए बद्दुआ करेंगे। यह कोई मामूली सज़ा नहीं है; यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी रुसवाई और अज़ाब है जो जान-बूझकर हक़ को छिपाते हैं।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि इल्म (ज्ञान) अमानत है। जिसे अल्लाह ने इल्म दिया, उसे चाहिए कि वह उसे बयान करे, छिपाए नहीं। आज भी जो लोग दीन की सच्चाइयों को जानते हुए भी अपने फायदे के लिए छिपाते हैं या गलत तरीके से पेश करते हैं, वे इसी वर्ग में शामिल हो सकते हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को छिपाना बहुत बड़ा गुनाह है, और सच्चाई को फैलाना बहुत बड़ी इबादत है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम जो भी दीन का इल्म रखते हैं, उसे दूसरों तक पहुँचाएँ। अगर हम किसी को एक अच्छी बात सिखा दें, तो यह हमारे लिए सदका-ए-जारिया है। अल्लाह हमें सच्चाई को छिपाने से बचाए और हमें हक़ को फैलाने वाला बनाए। आमीन।



📜 आयत 157-161 — सूरा अल-बकरा

157أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَاتٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَرَحْمَةٌ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُهْتَدُونَ
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ्ता है
158۞ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ أَوِ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَإِنَّ اللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं पस जो शख्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़दरदाँ (और) वाक़िफ़कार है
159إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَىٰ مِن بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِ ۙ أُولَٰئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَ
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं
160إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَأُولَٰئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया पस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ
161إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तों की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा उसी फटकार में रहेंगे
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
159आयत

अनुवाद — अल-बकरा 159

सूरा अल-बकरा आयत 159 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को…

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Monday, September 28, 2026

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