अल-बकरा · 160/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَأُولَٰئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا التَّوَّابُ الرَّحِيمُ ۝١٦٠
Illal lazeena taaboo wa aslahoo wa baiyanoo fa ulaaa`ika atoobu `alaihim; wa Anat Tawwaabur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया पस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابُوا: तौबा की, पश्चाताप किया, गुनाहों से बाज़ आए।
  • وَأَصْلَحُوا: अपने कर्मों को सुधारा, अपनी स्थिति को दुरुस्त किया।
  • وَبَيَّنُوا: जो छिपाया था उसे प्रकट किया, सच्चाई को स्पष्ट किया।
  • أَتُوبُ عَلَيْهِمْ: मैं उनकी तौबा क़बूल करता हूँ, उन पर अपनी रहमत से लौटता हूँ।
  • التَّوَّابُ: बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला।
  • الرَّحِيمُ: बहुत दयालु, असीम रहमत वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और मेहरबानी का दरवाज़ा खोलते हुए फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हक़ को छिपाया, गुमराही फैलाई और अपने कुकर्मों से लोगों को रास्ते से भटकाया, उनके लिए भी माफ़ी की राह मौजूद है—बशर्ते वे तीन शर्तें पूरी करें:

पहली शर्त: वे सच्चे दिल से तौबा करें, यानी अपने किए पर पछताएँ, अल्लाह से माफ़ी माँगें और गुनाहों को छोड़ दें। तौबा सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होनी चाहिए।

दूसरी शर्त: वे अपने अंदर सुधार लाएँ, अपने आचरण को दुरुस्त करें, अच्छे कर्म करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें। सिर्फ़ तौबा करके फिर वही गलतियाँ दोहराना सही नहीं है।

तीसरी शर्त: वे उस हक़ को, जिसे उन्होंने छिपाया था, लोगों के सामने स्पष्ट कर दें। यानी जो सच्चाई, जो इल्म, जो हिदायत उन्होंने दबा रखी थी, उसे अब खुलकर बयान करें, ताकि लोगों तक सही पैग़ाम पहुँचे और उनकी गुमराही दूर हो।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "ऐसे लोगों की तौबा मैं क़बूल करता हूँ।" यह अल्लाह की बहुत बड़ी फज़ल है कि वह गुनाहगारों को माफ़ करने के लिए खुद पेशकश करता है और उन्हें उम्मीद देता है। अल्लाह ने अपनी दो खूबियाँ बयान कीं: वह "तव्वाब" है यानी बार-बार तौबा क़बूल करने वाला, और "रहीम" है यानी अपने बंदों पर बेहद दयालु और मेहरबान है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत कितनी वसीअ है! कोई भी गुनाह इतना बड़ा नहीं कि अल्लाह की माफ़ी से महरूम रह जाए। चाहे इंसान ने कितनी ही बड़ी गलती की हो, जब तक वह सच्चे दिल से लौटता है, अल्लाह उसे गले लगाता है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब रहीम है, मेहरबान है। वह हमारी तौबा का इंतज़ार करता है, हमें माफ़ करने के लिए बेताब है। तो आओ, हम सब अपने गुनाहों से तौबा करें, अपने अंदर सुधार लाएँ, और जो हक़ हम जानते हैं उसे दूसरों तक पहुँचाएँ। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े कभी बंद नहीं होते—जब तक साँसें बाकी हैं, तौबा की गुंजाइश है।

🎧 सुनें

📜 आयत 158-162 — अल-बकरा

158۞ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ أَوِ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَإِنَّ اللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं पस जो शख्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़दरदाँ (और) वाक़िफ़कार है
159إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَىٰ مِن بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِ ۙ أُولَٰئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَ
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं
160إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَأُولَٰئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया पस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ
161إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तों की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा उसी फटकार में रहेंगे
162خَالِدِينَ فِيهَا ۖ لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी
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अनुवाद — अल-बकरा 160

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Tuesday, August 18, 2026

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