अल-बकरा · 161/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ ۝١٦١
Innal lazeena kafaroo wamaa too wa hum kuffaarun ulaaa`ika `alaihim la `natul laahi walmalaa`ikati wannaasi ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तों की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा उसी फटकार में रहेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعْنَةُ: रहमत से दूर करना, अभिशाप, फटकार।
  • كَفَرُوا: ईमान न लाना, सत्य को छिपाना, इनकार करना।
  • مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ: कुफ्र की हालत में मरना, यानी बिना तौबा किए मर जाना।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने सत्य को जानते हुए भी उसे छिपाया और इनकार किया, और इसी हालत में — बिना तौबा किए — उनकी मौत आ गई। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की ओर से, फ़रिश्तों की ओर से और सभी इंसानों की ओर से लानत (अभिशाप) है। इसका मतलब यह है कि उन्हें अल्लाह की रहमत से पूरी तरह दूर कर दिया जाएगा, और सारा जहान उन पर फटकार और नाराज़गी का इज़हार करेगा। क़यामत के दिन अल्लाह उन्हें अपनी रहमत से महरूम करेगा, फिर फ़रिश्ते उन पर लानत भेजेंगे, और फिर सारे इंसान — यहाँ तक कि ज़ालिम भी दूसरे ज़ालिमों पर लानत भेजेंगे। ग़ौरतलब है कि जो ज़ालिम ख़ुद भी ज़ालिम है, वह जब दूसरे ज़ालिम पर लानत भेजता है, तो असल में वह अपने आप पर ही लानत भेजता है। यह लानत उन लोगों के लिए है जो कुफ्र पर ज़िद करते रहे और तौबा किए बिना मर गए।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को छिपाना और जानबूझकर इनकार करना बहुत बड़ा गुनाह है, और इस पर मौत आने से पहले तौबा करना ज़रूरी है।
  2. अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा तौबा तक खुला है, लेकिन मौत के बाद कोई मौका नहीं मिलता। इसलिए हमें हर पल अपने अमल को सुधारना चाहिए।
  3. यह आयत हमें अल्लाह की पकड़ से डराती है और बताती है कि कुफ्र और ज़ुल्म का अंजाम बहुत भयानक है — यहाँ तक कि पूरी कायनात उन पर नाराज़ होती है।
  4. इससे हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन को ईमान और नेक अमल पर बिताना चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत और फ़रिश्तों की दुआओं के हक़दार बनें, न कि उनकी लानत के।
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📜 आयत 159-163 — अल-बकरा

159إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَىٰ مِن بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِ ۙ أُولَٰئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَ
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं
160إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَأُولَٰئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया पस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ
161إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तों की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा उसी फटकार में रहेंगे
162خَالِدِينَ فِيهَا ۖ لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी
163وَإِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ
और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
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अनुवाद — अल-बकरा 161

सूरा अल-बकरा आयत 161 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों नें कुफ्र एख्तेयार किया और कुफ़्र ही…

सूरा आयत 161/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 159–163. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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